जैसलमेर। डाबला वन रेंज में हिरण और उसका बच्चा।
जैसलमेर के वन्य जीव प्रेमी सुमेर सिंह सांवता ने 2 महीने पहले जिस अंधी मादा हिरण को कुत्तों से बचाया था, आज उस हिरण ने एक बच्चे जो जन्म दिया। अंधी मादा द्वारा रेस्क्यू के बाद बच्चे को जन्म देने पर सभी वन्य जीव प्रेमी बेहद खुश है।
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वन्य जीव प्रेमी सुमेर सिंह सांवता ने बताया- इस भीषण गर्मी में एक अंधी मादा ने सुन्दर से बच्चे को जन्म दिया है। हम सब बेहद खुश हैं कि हमने जिस अंधी मादा हिरण को शिकार होने से बचाया था, आज उसने एक नन्हे मेहमान को जन्म दिया है। हालांकि मां अपने बच्चे को देख नहीं सकती मगर उसकी भावना को हम महसूस कर रहे हैं।
ऐसा लग रहा है जैसे वो मन की आंखों से हमको धन्यवाद दे रही है। हम सब बहुत ज्यादा खुश है की हमारी मेहनत रंग लाई है। इसमें वन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी भी धन्यवाद के पात्र है, कि उन्होंने इस हिरण की 2 महीने तक देखभाल की और एक नए मेहमान को धरती पर लाने में अपना योगदान दिया।
अंधी मादा हिरण ने दिया नन्हे बच्चे को जन्म।
2 महीने पहले कुत्तों से बचाया था
वन्यजीव प्रेमी सुमेरसिंह भाटी ने बताया- करीब दो महीने पहले गर्भवती मादा हिरण को कुत्तों ने घेर लिया था। मादा हिरण अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रही थी। उसकी आंखों की रोशनी भी साथ छोड़ चुकी थी, मगर उसका मां बनने का सपना अभी बाकी था।
सूचना मिलने पर सुमेर सिंह अपनी टीम के साथ मौके पर रेस्क्यू के लिए पहुंचे और गर्भवती मादा हिरण को कुत्तों के चंगुल से छुड़वाकर वन विभाग की डाबला रेंज टीम के हवाले किया। वन विभाग ने मादा हिरण के लिए सुरक्षित, शांत और चिकित्सकीय निगरानी वाला आश्रय स्थल तैयार किया। वनकर्मियों ने दो महीने तक उसकी न सिर्फ देखभाल की, बल्कि उसकी शारीरिक और मानसिक स्थिति को भी बेहतर बनाने का हरसंभव प्रयास किया।
सुमेरसिंह भाटी ने इस मौके पर भावुक होते हुए कहा कि मुझे बेहद खुशी है कि दो जिंदगियां आज सुरक्षित हैं। जब मैंने उसे उस हाल में देखा था, तो यही सोचा था कि शायद अब इसकी जिंदगी बचाना मुश्किल होगा, लेकिन वन विभाग की सेवा, और उस मां की ममता ने चमत्कार कर दिया। यह मेरे जीवन का सबसे भावनात्मक क्षण है।

