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मशहूर गायिका आशा भोसले ने 92 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया, जिससे संगीत के आठ दशकों के एक सुनहरे युग का अंत हो गया. संगीत निर्देशक समीर टंडन ने याद किया कि आशा ताई अपनी मृत्यु को लेकर बेहद शांत थीं और इसे सहजता से स्वीकार कर चुकी थीं. उन्होंने बताया कि आशा ताई अक्सर अपनी शर्तों पर और पूरे सुकून के साथ विदा लेने की इच्छा जताती थीं. उनके मन में किसी बात का मलाल नहीं था, बस खुद से मिलने और शांति से विदा होने की एक गहरी चाह थी.
कंपोजर ने आशा भोसले के साथ अपनी बातचीत को लेकर खुलासा किया.
नई दिल्ली. दिग्गज गायिका ने रविवार को 92 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया. इसी के साथ संगीत के उस सुनहरे सफर पर विराम लग गया जो लगभग 7 दशकों से भी ज्यादा लंबा था. उनके निधन की खबर आते ही फिल्म और संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई है. हर कोई उनकी बेमिसाल कलाकारी और उनके मिलनसार स्वभाव को याद कर भावुक हो रहा है. अब म्यूजिक कंपोजर शमीर टंडन ने भी आशा भोसले को लेकर बात की.
शमीर का आशा ताई के साथ सिर्फ काम का ही नहीं, बल्कि एक गहरा जज्बाती रिश्ता भी था. न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए उन्होंने बताया कि आशा ताई उनके लिए एक मार्गदर्शक और मां के समान थीं. उन्होंने उन तमाम मुलाकातों और गानों को याद किया, जो उन्होंने आशा भोसले के साथ मिलकर सजाए थे.
‘पेज 3’ में आशा भोसले संग किया था काम
आशा भोसले के दिल के करीब थे गाने के बोल
शमीर ने आशा भोसले के साथ रिकॉर्ड किए गए आखिरी हिंदी गानों में से एक का जिक्र भी किया, जिसे प्रसून जोशी ने लिखा है. उन्होंने बताया कि इस गाने के बोल आशा ताई के दिल के बेहद करीब थे, जैसे वो खुद को उस गाने में देख रही हों. उस गाने के बोल कुछ ऐसे हैं ‘जाने दो, जाने दो, खुद से मिलना है, जाने दो’ इन शब्दों में एक तरह का सुकून और खुद की तलाश नजर आती है, जिसे आशा ताई ने बड़ी गहराई से महसूस किया था.
आशा भोसले ने बताई थी अपने दिल की बात
शमीर टंडन ने बताया कि उम्र के इस पड़ाव पर आशा ताई अक्सर जीवन की पूर्णता की बात करती थीं. वह बड़े इत्मीनान से कहती थीं, ‘अब बस बहुत हो गया, अब मुझे अच्छे तरीके से चले जाना है. अब मुझे खुद से मिलना है.’ शमीर के मुताबिक, उनके इन शब्दों में एक तरह का संतोष और शांति झलकती थी, जैसे उन्हें अब किसी बात का कोई मलाल न हो और वह अपनी आगे की यात्रा के लिए पूरी तरह तैयार हों.
आज शाम में होगा आशा भोसले का अंतिम संस्कार
साल 1933 में जन्मीं आशा भोसले ने 50 के दशक से अपनी पहचान बनानी शुरू की थी. उन्होंने शास्त्रीय संगीत, गजल, लोकगीत और पॉप समेत कई भाषाओं में 11000 से ज्यादा गाने गाए. दुनिया की सबसे ज्यादा रिकॉर्डिंग करने वाली कलाकार के रूप में उनका नाम गिनीज बुक में दर्ज है. संगीत में उनके बेमिसाल योगदान के लिए उन्हें दादा साहब फाल्के, पद्म विभूषण और दो बार नेशनल अवॉर्ड से नवाजा गया. आज शाम आशा भोसले का अंतिम संस्कार शिवाजी पार्क में होगा.
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साल 2015 में दैनिक भास्कर से करियर की शुरुआत की. फिर दैनिक जागरण में बतौर टीम लीड काम किया. डिजिटल करियर की शुरुआत आज तक से की और एबीपी, ज़ी न्यूज़, बिज़नेस वर्ल्ड जैसे संस्थानों में काम किया. पिछले 6 सालों से …और पढ़ें

