राज्यपाल हरिभाउ किसनराव बागड़े ने कहा कि मेवाड़ देश पर मर मिटने वालों की धरा है। इतिहास साक्षी है कि भारत वर्ष पर जब-जब पश्चिम की ओर से बाहरी आक्रमण हुए, तब-तब मेवाड़ प्रहरी के रूप में खड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक दौर में भारत का इतिहास विदेशिय
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राज्यपाल बागड़े बुधवार की रात को उदयपुर के महाराणा प्रताप गौरव केंद्र राष्ट्रीय तीर्थ स्थित कुम्भा सभागार में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती के उपलक्ष में आयोजित संगोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
संगोष्ठी में संबोधित करते राज्यपाल हरिभाऊ
उन्होंने कहा कि बप्पा रावल से महाराणा प्रताप तक और उनके बाद के शासकों ने विदेशी आक्रांताओं को खदेड़कर देश की रक्षा की। महाराणा प्रताप का संपूर्ण जीवन स्वाभिमान के लिए संघर्ष की प्रेरणा देता है। देश की अस्मिता की रक्षा के लिए उनके योगदान को युगों-युगों तक याद रखा जाएगा।
इतिहास में झूठे तथ्य अंकित किए राज्यपाल बागड़े ने कहा कि प्रारंभिक दौर में भारत का इतिहास विदेशियों ने लिखा। इसमें कई झूठे तथ्य अंकित किए गए। उन्होंने आमेर की राजकुमारी और अकबर के विवाह को भी झूठा बताया। उन्होंने कहा कि अकबर की आत्म कथा अकबरनामा में इसका कोई जिक्र नहीं हैं। इसके अलावा महाराणा प्रताप की ओर से अकबर को संधि की चिठ्ठी लिखने का तथ्य भी पूरी तरह से भ्रामक है।
राज्यपाल ने कहा कि महाराणा प्रताप ने कभी अपने आत्मसम्मान से समझौता नहीं किया। इतिहास में अकबर के बारे में ज्यादा और महाराणा प्रताप के बारे में कम पढ़ाया जाता है। हालांकि अब धीरे-धीरे स्थितियां सुधर रही हैं। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में नई पीढी को अपनी संस्कृति और गौरवशाली इतिहास को सहेजते हुए हर क्षेत्र में अग्रसर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

संगोष्ठी में शामिल प्रबुद्धजन
शिवाजी-महाराणा प्रताप समकालीन होते तो तस्वीर दूसरी होती राज्यपाल बागड़े ने कहा कि महाराणा प्रताप और शिवाजी महाराज राष्ट्र भक्ति के पर्याय थे। दोनों के जन्म के बीच 90 साल का अंतराल है। यदि वे दोनों समकालीन होते तो देश की तस्वीर दूसरी होती। वीरता और देशभक्ति को लेकर दोनों को समान दृष्टि से देखा जाता है। यहां तक कि शिवाजी महाराज का भौंसलेवंश तो स्वयं को मेवाड़ के सिसोदिया वंश से जोड़ता है। महाराणा प्रताप की वीरता को सम्मान देने के लिए संभाजीनगर में प्रताप की अश्वारूढ़ प्रतिमा स्थापित की गई है।

राज्यपाल प्रताप गौरव केंद्र में महाराणा प्रताप के जीवन की मुख्य घटनाओं पर आधारित पैनोरमा का अवलोकन करते
मेवाड़ की हवाओं में ही देशभक्ति बसी हुई है राज्यपाल ने यह भी कहा कि मेवाड़ की धरती राष्ट्रधर्म के लिए सतत संघर्ष करती रही है। यहां की हवाओं में ही देशभक्ति बसी हुई है। उन्होंने कहा कि आज के समय में राष्ट्रभक्ति को फिर से केंद्र में लाना होगा और इसके लिए सबसे पहले इतिहास की पुनः व्याख्या करनी होगी।
भारत-पाक सीमा पर बसे ग्रामीणों की प्रशंसा की राज्यपाल ने भारत-पाक सीमा पर बसे ग्रामीणों की प्रशंसा करते हुए कहा कि युद्ध के समय जब गोलियां चल रही होती हैं, तब वे ग्रामीण भारत माता के जयकारे लगाकर हमारे वीर जवानों का उत्साह बढ़ाते हैं। यह असली भारत है, जो न केवल वीरता दिखाता है, बल्कि देश की आत्मा की रक्षा भी करता है।

कार्यक्रम में राज्यपाल के साथ सांसद मदन राठौड़ और अन्य जनप्रतिनिधि
महाराणा प्रताप भारत के स्व की लड़ाई के पुरोधा मुख्य वक्ता ऑर्गनाइजर समाचार पत्र के प्रधान संपादक प्रफुल्ल केतकर ने कहा कि महाराणा प्रताप भारत के स्व अर्थात् स्वराज और स्वाभिमान की लड़ाई के पुरोधा हैं। यही लड़ाई 1857 की क्रांति का मूल है। वीर सावरकर ने देश के स्वाभिमान के संघर्ष के जो छह पृष्ठ लिखे, उसमें से एक पृष्ठ मेवाड़ के संघर्ष का है। उन्होंने कहा कि उसी स्व के संघर्ष को जीवित रखने के लिए प्रताप गौरव केंद्र जैसे स्थलों की स्थापना की आवश्यकता महसूस हुई, उसी स्व को जीवित रखने के लिए महाराणा प्रताप की जयंती मनाना आवश्यक है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ भी मौजूद रहे कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़, राज्यसभा सांसद चुन्नीलाल गरासिया, लोकसभा सांसद डॉ मन्नालाल रावत, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष शांतिलाल चपलोत प्रबुद्धजन एवं गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

