Thursday, January 15, 2026
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इंदौर में बच्चों के स्वास्थ्य के लिए ‘बचपन कार्ड’: पहले फेस में टाइप वन डायबिटीज ग्रस्त बच्चों के लिए बनेगा; फ्री कंसल्टेशन के साथ मेडिकल फेसिलिटी भी – Indore News



बच्चे स्वस्थ होंगे तभी हमारा भविष्य सुखद होगा। इसी के दृष्टिगत अरबिंदो समूह ने एक अनूठी पहल करते हुए 18 साल तक की उम्र के बच्चों की जरूरी चिकित्सा जांचों एवं समुचित उपचार के लिए “बचपन कार्ड” की शुरुआत की है।

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‘बाल दिवस’ के साथ-साथ ‘वर्ल्ड डायबिटीज डे’ को भी ध्यान में रखते हुए इसे सबसे पहले ‘टाइप वन डायबिटीज’ से ग्रस्त बच्चों को बचपन कार्ड उपलब्ध कराया जा रहा है। यह कार्ड सही मायनों में प्रदेशभर के बच्चों के लिए सेफ हेल्थ गार्ड साबित होगा।

यह जानकारी अरबिंदो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (SAIMS) के परिसर में आयोजित विशेष कार्यक्रम “ब्लू सांता कैंप” का उद्घाटन करते हुए फाउंडर चेयरमैन डॉ. विनोद भंडारी ने दी। इस अवसर पर डायबिटीज से बचाव में काम आने वाले ‘टेरो कार्पस मार्सुपियम’ यानी ‘बीजा प्लांट’ के 100 पौधे भी अस्पताल परिसर में लगाए गए। डॉ. भंडारी ने कहा कि इन पौधों का संरक्षण करके ही डायबिटीज पर नियंत्रण के अपने लक्ष्य को पूरा कर सकते हैं।

उन्होंने बताया कि हाल में अस्पताल में 8 से 80 साल तक के 300 डायबिटिक पेशेंट्स पर किए गए एक्सपेरीमेंट से साबित हुआ कि बीजा प्लांट मरीजों को शुगर से निजात दिलाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। अनुसंधान में पाया कि इन पौधों से बने पात्र में पानी पीने से चंद महीनों में ही 75 से अधिक (लगभग एक चौथाई) मरीजों का शुगर लेवल सही स्तर पर पहुंच गया और उनकी दवाएं बंद हो गईं। शुगर कंट्रोल के लिए हमें होलिस्टिक अप्रोच अपनाना होगा और एलोपैथी के साथ अन्य चिकित्सा पद्धतियों का बेहतर समन्वय स्थापित कर मरीजों को त्वरित एवं स्थायी राहत देने के हरसंभव प्रयास करने होंगे।

बचपन कार्ड में हर बच्चे का पूरा रिकॉर्ड मैनेजिंग डायरेक्टर और अरबिंदो विवि के प्रो-चांसलर डॉ. महक भंडारी ने बताया कि “बचपन” कार्ड के माध्यम से हर बच्चे की बीमारी, वजन, शारीरिक एवं मानसिक स्थिति समेत उसकी सभी चिकित्सकीय आवश्यकताओं का पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा और उसी के हिसाब से उस बच्चे की स्पेशल केयर की जाएगी। खास बात यह है कि कार्ड के माध्यम से उसका पूरा रिकॉर्ड एक ही स्थान पर सुरक्षित रहेगा। इससे इमरजेंसी अथवा किसी अन्य जरूरत के वक्त उसके तत्काल उपयोग से मरीज को श्रेष्ठतम चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराई जा सकेंगी।

सुपर-स्पेशियलिटी मेडिकल फेसिलिटी – डॉ. गुंजन केला ने बताया कि ‘बचपन कार्ड’ के माध्यम से मरीजों को फ्री कंसलटेशन के साथ-साथ हर तरह की सुपर स्पेशियलिटी मेडिकल फेसिलिटी भी उपलब्ध कराएंगे।

– इनमें थाइराइड[ स्कैन, पीडियाट्रिक बोन स्कैन, न्यूक्लियर स्कैन, स्लीप स्टडीज और अन्य सुपर स्पेशलिटीज सेवाएं शामिल होंगी।

– हर बच्चे का न्यूरो, गैस्ट्रो, एंडो, कार्डियो और ह्यूमेटोलॉजी जैसी स्पेशल इन्वेस्टिगेशन का पूरा रिकॉर्ड मेंटेन किया जाएगा।

हर पांच में से एक की ब्लड शुगर सामान्य से ज्यादा उधर, डॉ. संदीप जुल्का (सीनियर एंडोक्राइनोलॉजिस्ट और डायबिटीज एक्सपर्ट) और उनकी टीम द्वारा भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लि. के सहयोग से इंदौर में एक विशेष जनस्वास्थ्य और सड़क सुरक्षा जन जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। इसके तहत पहले फेस में टीम ने 11 नवंबर को देवास नाका से राऊ के बीच स्थित 6 पेट्रोल पंपों पर सुबह 9 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक आमजन के रैंडम ब्लड शुगर टेस्ट किए गए।

इस दौरान 500 से ज्यादा लोगों की शुगर जांच की गई। जांच में हर पांच में से एक व्यक्ति की ब्लड शुगर सामान्य से बढ़ी हुई पाई गई, जबकि हर 10 में से 1 को डायबिटीज पाई गई। 10 में से दो लोग इस बात से अनजान थे कि उन्हें डायबिटीज हो सकती हैं। ये आंकड़े इस दिशा में समाज में फैली अनभिज्ञता को दिखाते हैं। अधिकतर लोग नियमित स्वास्थ्य जांच नहीं कराते और तभी परीक्षण करवाते हैं जब बीमारी गंभीर रूप ले लेती है।

यह आंकड़ा बताता है कि हमें अब केवल इलाज नहीं, बल्कि समय पर जांच और जागरूकता को प्राथमिकता देनी होगी। हर व्यक्ति को अपनी दिनचर्या में स्वास्थ्य जांच को उतनी ही गंभीरता से शामिल करना चाहिए जितनी से हम रोजमर्रा के अन्य कार्य करते हैं। 20 वर्ष से ज्यादा उम्र के व्यक्ति को वर्ष में एक बार शुगर टेस्ट करवाना कोई कठिन काम नहीं है, लेकिन यह आपकी आने वाली जिंदगी को सुरक्षित कर सकता है।

डॉ. जुल्का का कहना है कि उद्देश्य केवल जांच करना नहीं था, बल्कि यह समझाना था कि ‘स्वास्थ्य’ और ‘सुरक्षा’ दोनों जीवन के अभिन्न अंग हैं। जैसे सड़क पर सावधानी बरतना हमें दुर्घटनाओं से बचाता है, वैसे ही नियमित जांच हमें बीमारियों से बचा सकती है। एक सजग नागरिक वही है जो अपने स्वास्थ्य और सुरक्षा दोनों की जिम्मेदारी स्वयं लेता है। इस अभियान के जरिए हम यही संदेश देना चाहते हैं कि बदलाव सरकारों या डॉक्टरों से नहीं, बल्कि व्यक्तिगत जागरूकता से शुरू होता है। जब हर व्यक्ति अपने स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदार बनेगा, तभी हम एक स्वस्थ और सुरक्षित समाज की दिशा में आगे बढ़ पाएंगेl

16 नवंबर को डायबिटीज रिवर्सल; कब, कैसे और क्या कभी नहीं

दूसरे चरण में इंदौर में डायबिटीज के वास्तविक कारणों, नियंत्रण और रिवर्सल को समझने के लिए ‘डायबिटीज (रिवर्सल) कब, कैसे और क्या कभी नहीं’ विषय पर महत्वपूर्ण सेशन 16 नवंबर सुबह 11 बजे से 12 बजे तक जाल सभागृह में एक विशेष सेमिनार का आयोजन किया जाएा। इस पहल का उद्देश्य नागरिकों में डायबिटीज के प्रति जागरूकता बढ़ाना, समय-समय पर स्वास्थ्य जांच की आदत को प्रोत्साहित करना और साथ ही सड़क सुरक्षा के नियमों का महत्व समझाना है।



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