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Supreme Court Verdict on Waqf Law: वक्फ बोर्ड कानून 2025 पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है. कोर्ट ने इस कानून पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. हालांकि, कोर्ट ने कई फैसले ऐसे सुनाए हैं, जिससे मुस्लिम पक्ष को काफी राहत मिली है.
Supreme Court Verdict on Waqf Law: वक्फ कानून 2025 पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार 15 अगस्त फैसला सुना दिया है. कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा साफ कर दिया कि इस कानून पर रोक लगाने का हमें अधिकार नहीं है. हालांकि, कोर्ट ने ये भी कहा कि कुछ धाराओं में सुरक्षा की जरूरत थी. उसी पर आगे की सुनवाई किया है, जिसमें वक्फ बोर्ड का मुख्य कार्यकारी अधिकारी कोई गैर मुस्लिम नहीं होने की सलाह दी गई है. साथ ही वक्फ की संपत्ति पर कलेक्टर के अधिकार पर कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कि उनका फैसला अंतिम नहीं माना जाएगा.
याचिकाकार्ता भी प्रतापगढ़ी
वक्फ कानून की संवैधानिकता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने वालों में कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी भी थे. इनके अलावा डीएमके, एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी, कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) और जमीयत उलमा-ए-हिंद ने इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.
सुप्रीम कोर्ट के वक्फ कानून पर टिप्पणी के महत्वपूर्ण बातें-
- सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 के उस प्रावधान पर रोक लगा दी है जिसके अनुसार किसी व्यक्ति को वक्फ बनाने के लिए पांच वर्षों तक इस्लाम का अनुयायी होना आवश्यक था. शीर्ष कोर्ट ने कहा कि यह प्रावधान तब तक स्थगित रहेगा जब तक यह निर्धारित करने के लिए नियम नहीं बन जाते कि कोई व्यक्ति इस्लाम का अनुयायी है या नहीं.
- सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के सभी प्रावधानों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. हालांकि, न्यायालय का कहना है कि कुछ धाराओं को संरक्षण की आवश्यकता है.
- सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ अधिनियम के उस प्रावधान पर भी रोक लगा दी है जो कलेक्टर को यह निर्धारित करने का अधिकार देता था कि वक्फ घोषित की गई संपत्ति सरकारी है या नहीं और आदेश पारित कर सकता था.
- सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि कलेक्टर को नागरिकों के व्यक्तिगत अधिकारों का न्याय करने की अनुमति नहीं दी जा सकती और यह शक्तियों के पृथक्करण का उल्लंघन होगा.
- सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि वक्फ बोर्ड में तीन से अधिक गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल नहीं किया जाना चाहिए. फिलहाल वक्फ परिषदों में कुल मिलाकर चार से अधिक गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल नहीं किया जाएगा.
सीजेआई की टिप्पणी
आज वक्फ संशोधन कानून 2025 पर आज सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आ गया है. इस दौरान सीजेआई बीआर गवई ने टिप्पणी करते हुए कहा, ‘हमने यह माना है कि किसी भी क़ानून की संवैधानिकता के पक्ष में हमेशा एक अनुमान होता है. हस्तक्षेप सिर्फ अत्यंत विरल मामलों में ही किया जा सकता है. हमने प्रत्येक धारा को लेकर प्रारंभिक चुनौती पर विचार किया है. हमें यह नहीं लगा कि पूरे अधिनियम के प्रावधानों पर रोक लगाने का कोई आधार है. लेकिन कुछ धाराओं को सुरक्षा की आवश्यकता है. धारा 3(र) उपबंध में यह शर्त लगाई गई है कि व्यक्ति को 5 वर्षों तक इस्लाम का पालन करना चाहिए. बिना किसी तंत्र के यह प्रावधान मनमानी शक्तियों के प्रयोग की ओर ले जाएगा, इसलिए इसे स्थगित किया जाता है.’

दीप राज दीपक 2022 में न्यूज़18 से जुड़े. वर्तमान में होम पेज पर कार्यरत. राजनीति और समसामयिक मामलों, सामाजिक, विज्ञान, शोध और वायरल खबरों में रुचि. क्रिकेट और मनोरंजन जगत की खबरों में भी दिलचस्पी. बनारस हिंदू व…और पढ़ें
दीप राज दीपक 2022 में न्यूज़18 से जुड़े. वर्तमान में होम पेज पर कार्यरत. राजनीति और समसामयिक मामलों, सामाजिक, विज्ञान, शोध और वायरल खबरों में रुचि. क्रिकेट और मनोरंजन जगत की खबरों में भी दिलचस्पी. बनारस हिंदू व… और पढ़ें

