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Bollywood Best Movies : फिल्म एक इमोशन है. इमोशन को शिद्दत के साथ जो भी पर्दे पर उतार ले गया, वही सच्चा फिल्मकार है. फिल्म बनाने के लिए भाषा आड़े नहीं आती. फिल्म भावनाओं को व्यक्त करने का एक जरिया है. युगांडा में जन्में, अमेरिका में पले-बढ़े फिल्मकार ने जब हिंदी में फिल्म बनाई तो कोई यकीन नहीं कर पाया. युंगाडा में जन्में एक शख्स ने भारत में ऐसी हिंदी फिल्म बनाई जो बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रही. ऐसे ही अंग्रेज नाम के एक शख्स ने पाकिस्तान को एक्सपोज करते हुए ऐसी देशभक्ति की फिल्म बनाई, जिसने दर्शकों के दिल पर राज किया. दोनों फिल्में नेशनल अवॉर्ड भी जीत ले गईं. ये फिल्में कौन सी थीं, इनके डायरेक्टर-प्रोड्यूसर कौने थे, आइये जानते हैं दिलचस्प फैक्ट्स…..
बॉलीवुड की कुछ प्रेरणादायी-कल्ट मूवी ऐसे फिल्मकारों ने बनाई हैं, जिनका बैकग्राउंड हैरान करने वाला है. 7 साल के अंतराल में बॉक्स ऑफिस पर दो ऐसी फिल्में आई जिनकी सराहना खुले दिल से हर सिनेप्रेमी ने की. ये फिल्में थीं : सरफरोश और चक दे इंडिया. 30 अप्रैल 1999 को रिलीज हुई सरफरोश में पाकिस्तान की ओर से प्रायोजित आतंकवाद पर खुलकर बात की गई थी. फिल्म में पाकिस्तान शब्द का खुलकर इस्तेमाल किया गया था. वहीं चक दे इंडिया जहां 10 अगस्त 2007 को रिलीज हुई थी. पहली फिल्म जहां हिट रही, वहीं दूसरी फिल्म सुपरहिट रही. दोनों ही फिल्मों के बनने की कहानी बेहद दिलचस्प है.

सबसे पहले बात करते हैं 26 साल पहले आई हिंदी फिल्म ‘सरफरोश’ की जिसे जॉन मैथ्यू मैथन ने डायरेक्ट किया था. उनका नाम किसी अंग्रेजो के जैसा है लेकिन दिल उतना ही हिंदुस्तानी. 1999 में रिलीज हुई सरफरोश फिल्म की कहानी-स्क्रीनप्ले सबकुछ जॉन मैथ्यू मैथन ने ही लिखे थे. आमिर खान ने कहानी सुनते ही झट से फिल्म करने के लिए हामी भर दी थी. सरफरोश में आमिर खान, नसीरुद्दीन शाह, सोनाली बेंद्रे, मुकेश ऋषि नजर आए थे. जतिन-ललित का सुपरहिट म्यूजिक था. फिल्म का एक गाना’जिंदगी मौत न बन जाए, संभालो यारो, मुश्किलों में है वतन…’ आज भी 26 जनवरी और 15 अगस्त को स्कूल-कॉलेज के प्रोग्राम्स में सुनाई देता है. इसके अलावा ‘होशवालों को खबर क्या, जिंदगी क्या चीज है’, इस दीवाने लड़के को, कोई समझाए और ‘जो हाल दिल का इधर हो रहा है’ आज भी उतने ही पॉप्युलर हैं. इस फिल्म के रिलीज होने के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच कारगिल युद्ध शुरू हो गया था. इसका फायदा फिल्म को हुआ.

फिल्म के डायरेक्टर जॉन मैथ्यू ने 1992 से स्क्रिप्ट पर काम शुरू किया था. पूरे सात रिसर्च में लगाए. आमिर खान ने कहा था कि जब उन्होंने जॉन मैथ्यू का नाम सुना तो लगा कि जॉन का अंग्रेज नाम है, वो एड फिल्में बनाते हैं तो आधी घंटे से ज्यादा की फिल्म नहीं बना पाएगा. जब स्क्रिप्ट सुनी तो आंखें हैरानी से खुली रह गईं. फिल्म में नसीरुद्दीन शाह निगेटिव किरदार में थे. उनका किरदार पाकिस्तानी गजल गायक गुलफाम हसन का किरदार था जो पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए काम करता है.
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हिंदी सिनेमा के इतिहास का संभवत: पहली बार सरफरोश फिल्म में पाकिस्तान का नाम सीधे तौर पर लिया गया था. इससे पहले पड़ोसी मुल्क कहा जाता था. सेंसर बोर्ड ने आपत्ति भी जताई थी लेकिन आमिर खान और उनकी टीम ने संघर्ष किया. यह शब्द पास करवाया. एसीपी अजय सिंह राठौर के किरदार में आमिर खान छा गए थे. 8 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने 33 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. यह एक हिट फिल्म साबित हुई थी. फिल्म को एक नेशनल अवॉर्ड और 4 फिल्म फेयर अवॉर्ड भी मिले थे.

बॉलीवुड में प्रेरणादायी फिल्मों में शुमार ‘चक दे इंडिया’ को बार-बार देखने पर भी मन नहीं भरता. फिल्म 10 अगस्त 2007 में रिलीज हुई थी. यह एक स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्म थी. फिल्म का डायरेक्शन युगांडा में जन्मे शिमित अमीन ने किया था. उन्होंने अपनी पढ़ाई लिखाई अमेरिका के फ्लोरिडा में की. फिल्म में म्यूजिक सलीम-सुलेमान का था. गीत जयदीप साहनी ने ही लिखे थे. फिल्म का टाइटल सॉन्ग ‘कुछ करिये कुछ करिये….चक दे इंडिया’ की धुन ‘जुम्मा-चुम्मा दे दे चुम्मा’ से इंस्पायर्ड थी. यह धुन आदित्य चोपड़ा ने बनाई थी. फिल्म का यह गाना नेशनल एंथम बन गया था. आज भी देश-विदेश में होने वाले भारतीय टीम के किसी भी मैच में यह गाना सुनाई देता है. इस गाने को सुनते ही खिलाड़ियों-दर्शकों में नया जोश पैदा हो जाता है. देश के लिए कुछ कर गुजरने का भाव आता है.

कहानी जयदीप साहनी ने लिखी थी जो इससे पहले बंटी और बबली, खोसला का घोसला जैसी फिल्में लिख चुके थे. जयदीप साहनी को इस फिल्म को बनाने का आइडिया 2004 में एक न्यूजपेपर में छपे आर्टिकल से आया था. चक दे इंडिया फिल्म में शाहरुख खान हॉकी कोच कबीर खान के किरदार में नजर आए थे. इस फिल्म में शाहरुख खान की शानदार एक्टिंग की बहुत सराहना की गई थी. उनके आलोचकों ने भी एक्टिंग को सराहा था. किसी को यकीन नहीं होगा कि यह फिल्म शुरुआत में चार दिन तक दर्शकों का इंतजार करती रही. जिस समय यह फिल्म रिलीज हुई, जयदीप साहनी यूएस में थे. उन्होंने यश चोपड़ा को फोन मिलाकर हालचाल जाना तो पता चला कि शुक्रवार को फिल्म देखने कोई नहीं आया. मंगलवार से ऐसा चमत्कार हुआ कि दर्शक सिनेमाघरों में लाइन में लगकर टिकट खरीदने लगे. चक दे इंडिया की कहानी अल्मोड़ा के रहने वाले गोलकीपर मीर रंजन नेगी की लाइफ से भी इंस्पायर्ड थी. भारतीय पुरुष टीम में गोलकीपर नेगी 1982 में एशियन गेम्स खेले गए थे. आखिरी मैच में भारत को पाकिस्तान से 1-7 से शिकस्त मिली थी. नेगी पर कई आरोप भी लगाए गए, उन्हें देशद्रोही तक बताया गया था.

फिल्म का टाइटल सॉन्ग नेशनल एंथम बन गया. संगीतकार सलीम-सुलेमान ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि टाइटल सॉन्ग ‘चक दे इंडिया’ के 7 वर्जन तैयार किए थे. हर बार आदित्य चोपड़ा रिजेक्ट कर देते थे. सलीम-सुलेमान तो फिल्म छोड़ने का मन भी बना चुके थे. फिर आदित्य चोपड़ा ने ‘जुम्मा चुम्मा दे दे, जुम्मा चुम्मा दे दे चुम्मा..’ गाना उन्हें सुनाया और इसी तरह की मेलोडी पर टाइटल सॉन्ग तैयार कीजिए. सलीम-सुलेमान ने जयदीप साहनी को बुलाया और कहा कि कुछ भी करिये लेकिन गाना लिखिए. जयदीप साहने ने भी गाने की पहली लाइन लिखी – ‘कुछ करिये..’ लिख दी. फिर ‘चक दे’ दो बार यूज करने को कहा तो पूरी लाइन ‘कुछ करिये कुछ करिये’ जयदीप साहनी ने लिख दी. सिर्फ दो घंटे में ऐसी ट्यून बनी जिसे आज लाखों लोग गुनगुनाते हैं.

फिल्म के टाइटल का कनेक्शन नाइकी इंडिया की टैग लाइन से है. दरअसल, जयदीप ने नाइकी इंडिया की टैग लाइन जस्ट डू इट को हिंदी में चक दे लिखा था. चक दे का अर्थ होता है प्रेरणा. पहले फिल्म का नाम चक दे था, फिर आदित्य चोपड़ा ने इंडिया जोड़ दिया. इस तरह से फिल्म का नाम ‘चक दे इंडिया’ हो गया. 22 करोड़ के बजट में बनी इस मूवी ने 101 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. यह एक सुपरहिट फिल्म साबित हुई थी. आईएमडीबी पर 8.1 रेटिंग मिली हुई है. 2007 में यह फिल्म सबसे ज्यादा पैसे कमाने के मामले में तीसरे नंबर पर रही थी. सबसे दिलचस्प बात यह है कि जिस दिन चक दे इंडिया फिल्म रिलीज हुई, उसी दिन सनी देओल की फिल्म ‘काफिला’ रिलीज हुई थी. इस फिल्म में सनी देओल ने कर्नल समीर अहमद की भूमिका निभाई थी. यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गई थी, वहीं चक दे इंडिया सुपरहिट साबित हुई थी.

