नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू जिला न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार किया है, जिससे कांग्रेस नेतृत्व को बड़ी राहत मिली है। इसी फैसले के बाद राजधानी भोपाल में कांग्रेस समर्थक कार्यक
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कोर्ट ने क्या निर्णय सुनाया?
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि ED द्वारा दायर की गई चार्जशीट कानूनी रूप से मान्य नहीं है, क्योंकि यह किसी प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) पर आधारित नहीं थी। कोर्ट के अनुसार धारा 3 और 4 के तहत धनशोधन के आरोप तभी देखे जा सकते हैं जब मामले का आधार एक वैध FIR हो। इसीलिए अदालत ने ED की शिकायत पर कार्रवाई शुरू करने से इनकार किया।
कोर्ट ने यह भी कहा कि ED की दलीलें कानून के अनुरूप नहीं थीं और प्रचलित नियमों के अनुसार मुकदमे का आधार मजबूत नहीं माना जा सकता। इसी वजह से सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य नेताओं के खिलाफ ED की चार्जशीट को खारिज कर दिया गया।
जानिए नेशनल हेराल्ड मामला
यह मामला 2012 से सुर्खियों में है, जब भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) और इससे जुड़ी कंपनी यंग इंडियन के बारे में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप यह था कि AJL के 90 करोड़ रुपए के ऋण को गांधी परिवार की कंपनी यंग इंडियन को सौंपकर संपत्तियों का अवैध लाभ उठाया गया। ED ने इसका धनशोघन के रूप में केस बनाया था, जिसमें सोनिया गांधी, राहुल गांधी सहित कई अन्य नामजद थे।
भोपाल में विरोध-प्रदर्शन
कोर्ट फैसले के बाद भोपाल में कांग्रेस कार्यकर्ता बीजेपी कार्यालय घेराव कर रहे हैं। विरोध प्रदर्शन में पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह मामला न्याय के साथ समझौता है और इसे ‘राजनीतिक बदले की कार्रवाई’ बताया गया है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि न्याय के निर्णय का विरोध-प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है और बीजेपी पर आरोप लगाया जा रहा है कि केंद्रीय एजेंसियों का राजनीतिक इस्तेमाल किया गया।

