Monday, May 11, 2026
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केरल में वेणुगोपाल का तिलक या बने रहेंगे राहुल गांधी के ‘टाइपराइटर’?


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केरल में वेणुगोपाल का तिलक या बने रहेंगे राहुल गांधी के ‘टाइपराइटर’?

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केरल में जीत के बाद कांग्रेस में सीएम पद की जंग तेज हो गई है. यदि केसी वेणुगोपाल को गुटबाजी रोकने के लिए तिरुवनंतपुरम भेजा जाता है, तो दिल्ली में राहुल गांधी के लिए अपने सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार को खोना एक बड़ी चुनौती होगी. क्या दिल्ली की राजनीति छोड़ केरल जाएंगे वेणुगोपाल?

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कौन होगा केरल में कांग्रेस का सीएम कैंडिडेट?

कौन होगा केरल का अगला सीएम? देश के पांच राज्यों के चुनावी नतीजों के बाद अब सरकार गठन की सरगर्मी तेज हो गई है. जहां बंगाल में भाजपा ने किला फतह किया और तमिलनाडु में ‘थलापति’ विजय के रूप में नया सूर्य उदय हुआ, वहीं केरल में कांग्रेस की प्रचंड जीत 102 सीटें के बाद भी ‘कौन बनेगा मुख्यमंत्री’ का सस्पेंस बरकरार है. पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी और असम में हिमंता बिस्वा सरमा के नाम तय होने के बाद अब सबकी नजरें केरल पर हैं. कांग्रेस नीत यूडीएफ (UDF) ने 140 में से 102 सीटें जीतकर वामपंथियों के 10 साल के शासन को उखाड़ फेंका है. लेकिन जीत के साथ ही पुराने जख्म भी हरे हो गए हैं. मुख्यमंत्री पद के लिए वीडी सतीशन, रमेश चेन्निथला और प्रदेश अध्यक्ष के सुधाकरन के बीच ‘साइलेंट वॉर’ छिड़ा हुआ है. इस गुटबाजी को खत्म करने के लिए आलाकमान के पास एकमात्र विकल्प के रूप में केसी वेणुगोपाल का नाम सामने आ रहा है.

केसी वेणुगोपाल वर्तमान में कांग्रेस के संगठन महासचिव हैं और राहुल गांधी के सबसे करीबी सलाहकारों में गिने जाते हैं. कांग्रेस के हर फैसले और नियुक्तियों में केसी का ही साइन चलता है. जिस तरह बीजेपी में अरुण सिंह का रोल है, पार्टी का अध्यक्ष जेपी नड्डा रहें या नितिन नबीन, सिग्नेचर वाला लेटर अरुण सिंह का ही निकलेगा. ठीक उसी तरह कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे रहें या कोई और नियुक्तियों वाला लेटर पर केसी वेणुगोपाल का ही साइन होता है. 2024 के लोकसभा चुनावों और उसके बाद पार्टी को मजबूत करने के लिए वेणुगोपाल ने ही राहुल गांधी के ‘वार रूम’ को संभाला है. संगठन के हर छोटे-बड़े फैसले और इंडिया गठबंधन के साथ समन्वय में उनकी भूमिका ‘चाणक्य’ जैसी रही है.

केरल में गुटबाजी तो दिल्ली में राहुल गांधी की जरुरत?

केरल में गुटबाजी इतनी गहरी है कि सतीशन और चेन्निथला के समर्थक किसी एक नाम पर सहमत नहीं हैं. ऐसे में वेणुगोपाल एक ‘न्यूट्रल’ और सर्वमान्य चेहरे के रूप में उभर सकते हैं. अगर केसी वेणुगोपाल दिल्ली छोड़कर तिरुवनंतपुरम में मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालते हैं, तो राहुल गांधी के लिए यह एक बड़ा व्यक्तिगत और राजनीतिक झटका होगा. राहुल गांधी को एक ऐसा नया चेहरा खोजना होगा जो संगठन की बारीकियों को वेणुगोपाल की तरह समझता हो.

केसी के केरल जाने से कांग्रेस को होगा नुकसान?

वेणुगोपाल गांधी परिवार और पार्टी के क्षेत्रीय क्षत्रपों के बीच एक सेतु का काम करते हैं. उनके जाने से यह कड़ी टूट सकती है. आगामी चुनावों के लिए जो खाका वेणुगोपाल ने तैयार किया है, उसे बीच में छोड़कर जाना कांग्रेस के राष्ट्रीय अभियान को धीमा कर सकता है.

अंतिम फैसला किसके हाथ?

अजय माकन और मुकुल वासनिक जैसे पर्यवेक्षक केरल से रिपोर्ट लेकर दिल्ली लौट चुके हैं. अब गेंद राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के पाले में है. क्या वे केरल को बचाने के लिए दिल्ली के अपने सबसे भरोसेमंद सिपाही की ‘कुर्बानी’ देंगे? या फिर केरल में किसी स्थानीय नेता को कमान सौंपकर वेणुगोपाल को अपने पास ही रखेंगे?

कुलमिलाकर जहां कांग्रेस केरल में उलझी है, वहीं भाजपा ने अपनी राहें स्पष्ट कर ली हैं. बंगा में सुवेंदु अधिकारी सीएम बन गए हैं और हिमंता बिस्वा सरमा को दोबारा असम विधायक दल का नेता चुन लिया गया है. 12 मई को सरमा शपथ लेंगे. पुडुचेरी में भी एन. रंगासामी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार दोबारा सत्ता संभालने को तैयार है. वहीं, केरल की 102 सीटों की जीत कांग्रेस के लिए संजीवनी तो है, लेकिन अगर केसी वेणुगोपाल मुख्यमंत्री बनते हैं, तो तिरुवनंतपुरम की जीत दिल्ली के लिए एक नई सिरदर्दी साबित हो सकती है.

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रविशंकर सिंहChief Reporter

I am an alumnus of Bharatiya Vidya Bhavan, Delhi with a career in journalism that spans across several prestigious newsrooms. Over the years, I have honed my craft at Sahara Samay, Tehelka, P7 and Live India, a…और पढ़ें



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