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Inflation Effect : आरबीआई गवर्नर ने उम्मीदों पर पानी फेरते हुए लगातार चौथी बार रेपो रेट घटाने से इनकार कर दिया. इससे कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या खुदरा महंगाई फिर सिर उठा रही और इसी के दबाव में कर्ज और सस्ता…और पढ़ें
हाइलाइट्स
- आरबीआई ने रेपो रेट घटाने से इनकार किया.
- खुदरा महंगाई दर 4% के दायरे में बनी रहेगी.
- त्योहारी सीजन में महंगाई का ज्यादा असर नहीं होगा.
आरबीआई गवर्नर ने एमपीसी बैठक के बाद कहा कि खुदरा महंगाई इस साल हमारे काबू में बनी रहेगी. उन्होंने बताया कि कोर महंगाई भले ही थोड़ा बढ़कर 4.4 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है, लेकिन उपभोक्ता आधारित खुदरा महंगाई दर 4 फीसदी के दायरे में ही बनी रहेगी. सोने की कीमतों में आ रहे उछाल की वजह से कोर महंगाई दर में भी बढ़त देखी जा रही है, लेकिन चालू वित्तवर्ष की चौथी तिमाही को छोड़कर ज्यादातर समय खुदरा महंगाई 4 फीसदी के दायरे में ही रहेगी.
गवर्नर ने चालू वित्तवर्ष के लिए खुदरा महंगाई के आंकड़े बताए. उन्होंने कहा कि वित्तवर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में खुदरा महंगाई की दर 3.1 फीसदी रहने का अनुमान है, जो पहले 3.7 फीसदी का अनुमान लगाया गया था. दूसरी तिमाही में खुदरा महंगाई और भी गिरकर 2.1 फीसदी पहुंच गई है, जो पहले 3.4 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया था. इससे पता चलता है कि खुदरा महंगाई पूरी तरह हमारे काबू में है और आम आदमी को आगे भी इससे राहत मिलने का अनुमान है.
त्योहारों पर कितनी रहेगी महंगाई
आरबीआई गवर्नर की मानें तो अक्टूबर से शुरू हो रहे त्योहारी सीजन में भी आम आदमी पर महंगाई का ज्यादा असर नहीं होगा. चालू वित्तवर्ष की तीसरी तिमाही यानी अक्टूबर-दिसंबर में भी खुदरा महंगाई 4 फीसदी से नीचे बनी रहेगी. हालांकि, यह पहली और दूसरी तिमाही के मुकाबले थोड़ी ऊपर जाएगी फिर भी तीसरी तिमाही में खुदरा महंगाई का अनुमान 3.1 फीसदी रखा गया है. पहले यह अनुमान 3.9 फीसदी का था, लेकिन खाने-पीने की चीजों के दाम नीचे आने से खुदरा महंगाई में लगातार गिरावट आई है.
2026 से लग सकता है झटका
आरबीआई गवर्नर ने बताया कि खुदरा महंगाई चालू वित्तवर्ष की शुरुआती तीन तिमाहियों में तो 4 फीसदी से नीचे ही बनी रहेगी, लेकिन चौथी तिमाही में यह दायरे से बाहर जा सकती है. गवर्नर ने अनुमान जताया कि जनवरी-मार्च की चौथी तिमाही में खुदरा महंगाई दर 4.4 फीसदी रहने का अनुमान है, जो पहले भी इतना ही लगाया गया था. हालांकि, अगले वित्तवर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून (2027) में यह आंकड़ा बढ़कर 4.9 फीसदी तक जा सकता है.
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि… और पढ़ें

