Last Updated:
कुम्हरौरी जितना खाने में स्वादिष्ट लगता है, उसे बनाने में उतना ही मुश्किल होता है. पांच से छह घंटों की मेहनत से यह बनता है. अभी कुम्हरौरी बनाने का उचित समय है. इस समय कुम्हरौरी तैयार कर उसे साल भर सुरक्षित रख सकते हैं. मिथिलांचल में यह घर-घर बनता. अगर आप देसी सब्जी…
आर्या झा/मधुबनी: आज के दौर में लोगों को मौसम और सीजन से कोई खास मतलब नहीं होता. उन्हें सभी सीजन में मनपसंद फल और सब्जी चाहिए. यही वजह है कि गाजर, खीरा, तरबूज, खरबूज सहित तमाम सीजनी फल और सब्जियां साल के बारह महीने मिलते रहते हैं. ये तमाम तौर तरीकों से उगाए और स्टोर किए जाते हैं और उन्हें सालभर बेचा जाता है. इससे पहले लोग सीजनी सब्जियां और ताजी फल-सब्जी ही खाना पसंद करते थे. सीजन के अलावा बाकी समय के लिए लोग घरों पर तमाम तरह की ऐसी चीजें तैयार करते थे जिनसे कभी भी सब्जी बनाई जा सकती थी. इन्हें सूखी सब्जी भी कहते हैं. इनमें अदौरी दनौरी, चिप्स और कुम्हरौरी आदि तमाम तरह की सूखी सब्जियां तैयार की जाती थी. इन सब्जियों को बारिश के समय, जब सब्जियां महंगी हों उस समय और अन्य सीजन में भी लोग घरों में बनाकर खाते थे. अब बाजारीकरण ने इन चीजों को पीछे छोड़ दिया. तो आज इन सब्जियों के बारे में जानेंगे जिनसे हमारी नई पीढ़ी दूर होती जा रही है. इससे लोगों की निर्भरता केमिकल और प्रिजर्वेटिव के जरिए स्टोर करके रखी गई सब्जी और फल पर बढ़ती जा रही है.
कुम्हर ( पेठा) से बनने वाली सब्जी
कुम्हरौरी जितना खाने में स्वादिष्ट लगता है, उसे बनाने में उतना ही मुश्किल होता है. पांच से छह घंटों की मेहनत से यह बनता है. अभी कुम्हरौरी बनाने का उचित समय है. इस समय कुम्हरौरी तैयार कर उसे साल भर सुरक्षित रख सकते हैं. मिथिलांचल में यह घर-घर बनता. अगर आप देसी सब्जी, ट्रेडिशनल डिश खाने के शौकीन हैं तो फिर अभी कुम्हरौरी बना सकते हैं या फिर किसी से बनवा भी सकते हैं. इसमें उड़द की बेसन काफी महत्वपूर्ण होती है. उसके बिना यह बनना असंभव है.
कुम्हरौरी बनाने के लिए कुम्हर (पेठा ) को पहले साफ करके छिलका हटाकर उसे कद्दूकस कर लेना है. कद्दूकस करने के बाद उसमें पानी बहुत निकलता है. कपड़े की मदद से पानी निचोड़ लें. उसके बाद उड़द बेसन में बनाना है. घर का उड़द दाल का बेसन हो तो अच्छा या फिर बाजार से भी खरीद सकते हैं. कद्दूकस कुम्हर, पंचफोरन हींग और उड़द बेसन को काफी समय मथने के बाद फिर इसे छोटा-छोटा गोल आकार में बनाकर धूप में सूखने के लिए रख देते हैं. तीन-चार दिन के हवा और धूप पर सूखने के बाद यह तैयार होता है.
कुम्हरौरी बनाने में काफी मेहनत लगती है. कहीं कहीं यह बाजार में भी मिल जाता है. बाजार में इसकी कीमत 1400 से 1500 रुपए किलो होती है. पेठा या कुम्हर खरीद कर खुद से घर पर बनाते हैं तो एक किलो के पैसे में दस किलो बन जाएगा. पेट के लिए भी यह काफी ठंडा होता है. खाने में भी काफी स्वाद आता है .आलू,प्याज, मसाला के साथ कुम्हरौरी की सब्जी खाने में बड़ा लाजवाब स्वाद लगता है.
About the Author
जी न्यूज, इंडिया डॉट कॉम, लोकमत, इंडिया अहेड, न्यूज बाइट्स के बाद अब न्यूज 18 के हाइपर लोकल सेगमेंट लोकल 18 के लिए काम कर रहा हूं. विभिन्न संस्थानों में सामान्य खबरों के अलावा टेक, ऑटो, हेल्थ और लाइफ स्टाइल बीट…और पढ़ें

