Monday, September 14, 2026
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गोवा में एक पोस्टर से बदली सियासी तस्वीर: बिना कांग्रेस – बीजेपी, नए गठबंधन की तैयारी; तीसरी बार धोखा न खाने का आह्वान – New Delhi News



गोवा में सड़कों पर लगे आप व गोवा फॉर्वर्ड पार्टी के पोस्टर

गोवा में फरवरी 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासत ने अचानक करवट ले ली है। इसी बीच आम आदमी पार्टी और गोवा फॉरवर्ड पार्टी की ओर से लगाए गए एक साझा पोस्टर ने राज्य की चुनावी राजनीति में तीसरे विकल्प को लेकर चर्चा बढ़ा दी है।

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पोस्टर पर लिखा है, कांग्रेस और बीजेपी ने गोवा की जनता को दो बार ठगा, अब तीसरी बार उन्हें ऐसा मत करने देना।

गोवा की सड़कों पर दिखाई दे रहा यह पोस्टर महज चुनावी प्रचार नहीं, बल्कि 2027 के चुनाव की नई राजनीतिक लाइन खींचने की कोशिश है। संदेश सीधा है, गोवा को हर बार बीजेपी और कांग्रेस के बीच चुनाव करने के लिए मजबूर क्यों किया जाए।

क्या गोवा की जनता के पास अपना मजबूत, स्थानीय और गैर-बीजेपी, गैर-कांग्रेस विकल्प नहीं हो सकता। आप और गोवा फॉरवर्ड पार्टी इसी सवाल को राजनीतिक ताकत में बदलने की कोशिश कर रहे हैं।

गोवा में लंबे समय से चुनावी मुकाबला मुख्य रूप से बीजेपी और कांग्रेस के बीच रहा है। हालांकि पिछले कुछ चुनावों में क्षेत्रीय दलों और आम आदमी पार्टी जैसे नए राजनीतिक खिलाड़ियों ने इस समीकरण को प्रभावित किया है।

2022 के विधानसभा चुनाव में AAP ने दो सीटों पर जीत दर्ज की थी और उसका वोट शेयर करीब 6.77 प्रतिशत रहा था। वर्तमान विधानसभा में भी पार्टी के दो विधायक हैं।बेनाउलिम से वेन्जी वीगास और वेलिम से क्रूज सिल्वा AAP का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि गोवा फॉरवर्ड पार्टी के अध्यक्ष विजय सरदेसाई फतोर्डा से विधायक हैं।

संभावित AAP और गोवा फारवर्ड पार्टी समीकरण का एक महत्वपूर्ण पहलू दक्षिण गोवा है, जहां इन दोनों दलों की विधानसभा में मौजूदगी है। AAP के दोनों मौजूदा विधायक दक्षिण गोवा से हैं और विजय सरदेसाई भी दक्षिण गोवा की फतोर्डा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं।

इसके साथ ही AAP उत्तर गोवा में भी अपना संगठनात्मक आधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है। इससे 2027 के चुनाव में पार्टी के राज्यव्यापी विस्तार की संभावनाओं को लेकर राजनीतिक चर्चा बढ़ी है।

AAP और गोवा फॉरवर्ड पार्टी की राजनीति का एक अहम हिस्सा बीजेपी और कांग्रेस दोनों से दूरी बनाए रखना है। AAP की ओर से बीजेपी सरकार की नीतियों को लेकर रोजगार, पर्यावरण, जमीन और स्थानीय हितों जैसे मुद्दे उठाए जाते रहे हैं, जबकि कांग्रेस भी BJP के खिलाफ अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

ऐसे में तीसरे राजनीतिक विकल्प की सक्रियता विपक्षी वोटों के समीकरण को प्रभावित कर सकती है। हाल के दिनों में AAP और GFP के बीच संभावित तीसरे मोर्चे को लेकर बातचीत की खबरों के साथ गोवा फर्स्ट जैसे व्यापक राजनीतिक सहयोग की चर्चाएं भी सामने आई हैं।

यदि दोनों दल चुनाव से पहले सीटों के तालमेल और साझा कार्यक्रम पर सहमति बनाते हैं, तो गोवा का चुनावी मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के पारंपरिक द्विध्रुवीय मुकाबले से आगे बढ़कर बहुकोणीय हो सकता है।

आप- गोवा फॉरवर्ड पार्टी का साझा पोस्टर इसी बदलते राजनीतिक समीकरण की ओर संकेत करता है। तीसरी बार मत ठगने देना का संदेश बीजेपी और कांग्रेस दोनों के खिलाफ राजनीतिक विकल्प खड़ा करने की कोशिश को स्पष्ट करता है।

अब सवाल यह है कि क्या यह संभावित गैर-बीजेपी, गैर-कांग्रेस गठबंधन चुनाव तक एक संगठित राजनीतिक ताकत का रूप ले पाता है और उत्तर गोवा से दक्षिण गोवा तक अपनी मौजूदगी को वोट में बदल पाता है।

फरवरी 2027 के विधानसभा चुनाव में अभी कई महीने बाकी हैं, लेकिन गोवा में चुनावी नैरेटिव तैयार होना शुरू हो चुका है। आम आदमी पार्टी और गोवा फॉरवर्ड पार्टी के बीच बढ़ता राजनीतिक तालमेल इस बार के चुनाव में बीजेपी बनाम कांग्रेस से अलग तीसरे विकल्प को एक महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दा बना सकता है।



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