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Bilaspur News: कड़ाही में पानी गर्म किया जाता है और उसमें काटी हुई भाजी डालकर कुछ देर के लिए उबाला जाता है. इससे भाजी मुलायम हो जाती है और उसका कच्चा स्वाद खत्म हो जाता है. उबलने के बाद भाजी को पानी से निकालकर अलग रख लिया जाता है.
बिलासपुर. छत्तीसगढ़ में जैसे ही ठंड दस्तक देती है, वैसे ही गांवों में पारंपरिक हरी भाजी की खुशबू रसोई में फैलने लगती है. पालक, मेथी, चौलाई और सरसों भाजी जैसी सब्जियां इस मौसम में खूब खाई जाती हैं. इनमें से सरसों भाजी की सब्जी सबसे खास मानी जाती है. ग्रामीण इलाकों में इसे चावल, रोटी और यहां तक कि बासी भात के साथ भी बड़े चाव से खाया जाता है. बिलासपुर जिले की गृहिणी भाग्यवती ने पारंपरिक सरसों की भाजी बनाने की रेसिपी साझा की है.
चुनकर लाई जाती है ताजी सरसों भाजी
भाग्यवती ने लोकल 18 से कहा कि इस रेसिपी की शुरुआत ताजी सरसों भाजी से होती है. खेतों से भाजी तोड़कर लाई जाती है और घर पहुंचते ही उसे अच्छी तरह साफ पानी में धोकर मिट्टी और धूल हटा दी जाती है. इसके बाद भाजी को बारीक काटकर पकाने के लिए तैयार किया जाता है.
उबालकर मिलती है मुलायम बनावट
उन्होंने कहा कि कड़ाही में पानी गर्म किया जाता है और उसमें काटी हुई भाजी डालकर कुछ देर उबाला जाता है. इससे भाजी नरम हो जाती है और उसका कच्चा स्वाद खत्म हो जाता है. उबलने के बाद भाजी को पानी से निकालकर अलग रखा जाता है.
तड़के से आती है असली छत्तीसगढ़ी खुशबू
उन्होंने आगे कहा कि अब कड़ाही में तेल गर्म किया जाता है. फिर उसमें लहसुन, मेथी दाना और सूखी लाल मिर्च डालकर तड़का लगाया जाता है. इसी तड़के में उबाली हुई सरसों भाजी डाल दी जाती है और इसे धीमी आंच पर पकाया जाता है.
भाग्यवती ने कहा कि भाजी पकने के दौरान इसमें स्वाद अनुसार नमक और टमाटर डाला जाता है. टमाटर के गल जाने और मसाले मिल जाने के बाद भाजी पूरी तरह तैयार हो जाती है. यह सरसों भाजी ठंड में शरीर को गर्म रखने और सेहत के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है. छत्तीसगढ़ में इस भाजी को रोटी, चावल या फिर पारंपरिक बासी भात के साथ बड़े चाव से खाया जाता है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

