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कोई सिंगर पर्दे पर आए और लीड हीरो-हीरोइन पर भारी पड़ जाए ऐसा बहुत कम होता है. 57 साल आई एक बॉलीवुड फिल्म में ऐसा ही कुछ हुआ. सिंगर ने ऑनस्क्रीन गाने गाए और एक्टिंग की. अपनी अदाकारी से पूरी महफिल लूट थी. म्यूजिकल कॉमेडी वाली इस फिल्म के गाने बहुत पॉप्युलर हुए थे. मूवी भी हिट निकली. आज इस फिल्म की गिनती कल्ट फिल्मों में होती है.
बॉलीवुड में कुछ ऐसी फिल्में बनीं जो गीतों के जैसे सदाबहार लगती हैं. ऐसी ही एक फिल्म 1968 में रिलीज हुई थी. नाम था : पड़ोसन. यह एक म्यूजिकल कॉमेडी फिल्म थी जिसका डायरेक्शन ज्योति स्वरूप ने किया था. फिल्म में हमें सुनील दत्त, सायरा बानो, महमूद, किशोर कुमार और ओमप्रकाश नजर आए थे. फिल्म की शानदार कहानी, जानदार अभिनय और कर्णप्रिय गीतों ने समा बांध दिया था. 57 साल भी इस फिल्म के एक गाने को प्रेमी अपने प्यार का इजहार करने के लिए इस्तेमाल करते हैं.

पड़ोसन फिल्म का निर्माण महमूद प्रोडक्शन के तले महमूद और एनसी सिप्पी ने किया था. फिल्म के डायलॉग और स्क्रीनप्ले राजेंद्र कृष्ण ने लिखी थी. कहानी अरुण चौधरी ने लिखी थी. महान संगीतकार आरडी बर्मन ने म्यूजिक तैयार किया था. फिल्म में कुल 9 गाने रखे गए थे. गाने राजेंद्र कृष्ण ने लिखे थे. फिल्म के कुछ गाने आज भी पॉप्युलर गानों हैं : ‘मैं चली–मैं चली.’ ‘कहना है…कहना है आज तुमसे ये पहली बार..’ ‘मेरे सामने वाली खिड़की में एक चांद का टुकड़ा रहता है…’ ‘एक चतुर नार, करके श्रृंगार..’.

यह फिल्म 1952 में आई बांग्ला फिल्म पाशेर बाड़ी का रीमेक थी. पाशेर बाड़ी लेखक अरुण चौधरी की एक लघुकथा पर आधारित थी. पड़ोसन मूवी 1968 में कमाई के मामले में छठे नंबर पर रही थी. फिल्म का कुल बजट लगभग 80 लाख रुपये था. फिल्म में वर्ल्डवाइड 2.8 करोड़ का कलेक्शन किया था. यह एक हिट साबित हुई थी.

फिल्म में महमूद और सुनील दत्त जैसे दिग्गज कलाकार थे लेकिन दर्शकों की वाहवाही सिंगर किशोर कुमार ने लूटी थी. किशोर दा इस फिल्म को नहीं करना चाहते थे. महमूद लगभग एक माह तक उनका पीछा करते रहे. आखिर में महमूद ने किशोर कुमार के घर के बाहर तंबू लगा लिया. पूरी रात तंबू से किशोर कुमार से फिल्म करने के लिए आवाज लगाते रहे. थक-हारकर किशोर कुमार को यह फिल्म करनी पड़ी.

फिल्म के एक गाने ‘मेरी प्यारी बिंदु’ का किस्सा भी निराला है. इस गाने में किशोर कुमार और अन्य एक्टर्स नाचते आते हैं. दरअसल, कोरियाग्राफर उस दिन आया ही नहीं था. महमूद फिल्म को टालना नहीं चाहते थे. ऐसे में यह गाना किशोर दा ने कोरियोग्राफ किया था.

फिल्म पड़ोसन में किशोर दा ने मन्नाडे को हराया था. उन दिनों किशोर कुमार को कई लोग क्लासिकल सिंगर नहीं मानते थे. दरअसल, फिल्म में महमूद का कैरेक्टर किशोर कुमार के कैरेक्टर विद्यापति से हार जाता है. मन्नाडे ने महमूद के लिए आवाज दी थी. आरडी बर्मन ने जब मन्नाडे ओ बताया कि आपको फिल्म में किशोर कुमार से हारना है, तो वह भड़क गए. फिर महमूद मन्नाडे से मिले. पूरा मामला जानकर मन्नाडे हंस पड़े.

गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान किशोर दा ने अपने से ही कुछ ऐसे फिजूल के शब्द गीत में जोड़ दिए, जिससे वहां पर मौजूद सब हैरान रह गए. फिर जब फाइनल रिकॉर्डिंग को सुना गया तो हर किसी ने किशोर दा की तारीफ की.

फिल्म में महमूद ने एक दक्षिण भारतीय का किरदार का निभाया था. दक्षिण भारतीय लहजा लाने के लिए महमूद ने बड़ी मेहनत की थी. उन्होंने अपना काफी समय दक्षिण भारतीयों के बीच काफी वक्त गुजारा था. अपना सिर भी मुंडवा लिया था.

