जयपुर-कोटा हाईवे पर चाकसू तहसील के निमोड़िया गांव में करोड़ों रुपये की लागत से गोलोक धाम का निर्माण किया जा रहा है। 21 बीघा जमीन पर विकसित हो रहे इस केंद्र का उद्देश्य बीमार, बेसहारा और सड़कों पर घूमने वाली गायों को सुरक्षित आश्रय देना है। यहां पहले चरण में 300 गायों के रहने, उपचार और देखभाल की व्यवस्था की जा रही है। निर्माण कार्य जनवरी से शुरू हुआ और वर्तमान में यहां 80 से अधिक गायों की देखरेख की जा रही है।
गोलोक धाम के संरक्षक जैन मुनि प्रज्ञासागर महाराज ने बताया कि यह केवल गौशाला नहीं, बल्कि गोवंश का अभयारण्य होगा। यहां गाय के जन्म से लेकर उसके पूरे जीवन तक की उपयोगिता को समझाने का प्रयास किया जाएगा। दूध, गोबर और गोमूत्र के महत्व को समाज तक पहुंचाने के साथ गायों को स्वतंत्र वातावरण में रखने की व्यवस्था की जा रही है। उनका कहना है कि इस स्थान को गौसेवा, जीव दया और संस्कृति से जोड़कर विकसित किया जा रहा है।
जनवरी से शुरू हुआ निर्माण, अब तक 80 से अधिक गायों की देखभाल
महाराज ने बताया- गोलोक का निर्माण 23 जनवरी से शुरू हुआ। 15 फरवरी को विधिवत शुभारंभ के बाद टीन शेड में गायों को रखने की व्यवस्था की गई। शुरुआत में 57 गायों से सेवा कार्य शुरू हुआ था, जबकि अब यहां 80 से अधिक गायों की देखभाल की जा रही है। निर्माण कार्य को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है और दीपावली से दिसंबर तक अधिकांश काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
पहले चरण में 300 गायों के लिए तैयार होगी व्यवस्था
प्रज्ञासागर महाराज ने बताया – उपलब्ध जमीन पर पहले चरण में 300 गायों के रहने की सुविधा विकसित की जा रही है। भविष्य में अतिरिक्त भूमि मिलने पर इसकी क्षमता और बढ़ाई जा सकती है। यहां गायों के लिए खुला वातावरण, चारा, पानी और उपचार जैसी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
गौशाला को आत्मनिर्भर केंद्र बनाने की योजना
गौशाला के चेयरमैन राजीव जैन ने बताया कि भारतीय कृषि और ग्रामीण जीवन में गाय का विशेष महत्व रहा है। इसी सोच के साथ इस स्थान को सेवा, स्वावलंबन और सतत विकास के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां जैविक खेती, गोबर खाद, गोमूत्र आधारित उत्पाद और दुग्ध उत्पादन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना है।
ग्रामीण विकास और पर्यावरण संरक्षण पर रहेगा जोर
गोलोक धाम के अध्यक्ष देवेंद्र बाकलीवाल निमोड़िया ने बताया कि यह केंद्र केवल गायों के आश्रय तक सीमित नहीं रहेगा। इसे ग्रामीण विकास, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता से जोड़कर विकसित किया जाएगा। उनका कहना है कि गौशालाओं को समाज और प्रकृति के संतुलन का केंद्र बनाने की जरूरत है।
समिति के अन्य पदाधिकारी भी जुड़े
गौ अभयारण्य के संचालन और विकास कार्य में महामंत्री अमित बाकलीवाल, कोषाध्यक्ष रोहित जैन, प्रवक्ता चेतन बाकलीवाल और सरपंच पलक बाकलीवाल की भी भूमिका है। स्थानीय स्तर पर समाज के सहयोग से इस परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है।
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