Thursday, January 15, 2026
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जस्टिस नागरत्ना ने जिनपर जताई थी आपत्ति, उन्‍होंने अवैध बंग्लादेशी पर क्या कहा


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Justice Vipul Pancholi News: ज्‍यूडिश‍ियरी में कॉलेजियम सिस्‍टम पर एक बार फिर से गंभीर सवाल उठे हैं. इस बार यह सवाल सुप्रीम कोर्ट से ही सामने आए है. टॉप कोर्ट की सीनियर मोस्‍ट जज में से एक जस्टिस नागरत्‍ना ने प…और पढ़ें

जस्टिस नागरत्ना ने जिनपर जताई थी आपत्ति, उन्‍होंने अवैध बंग्लादेशी पर क्या कहाजस्टिस विपुल पंचोली अवैध बांग्‍लादेशी से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट की बेंच का हिस्‍सा हैं. जस्टिस नागरत्‍ना ने उन्‍हें टॉप कोर्ट में प्रमोट करने पर गंभीर सवाल उठाए थे.
Justice Vipul Pancholi News: पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रहे और अब सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस विपुल मनुभाई पंचोली सुर्खियों में हैं. टॉप कोर्ट की सीनियर जज जस्टिस नागरत्‍ना ने जस्टिस पंचोली को प्रमोट कर सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने पर सवाल उठाया था. कैंपेन फॉर ज्‍यूडिशियल अकाउंटेबिलिटी एंड रिफॉर्म्‍स की ओर से जारी बयान में जस्टिस नागरत्‍ना के डिसेंट नोट के बारे में जानकारी दी गई है. उनके इसे नोट को सार्वजनिक नहीं किया गया है. अब वही जस्टिस विपुल पंचोली अवैध बांग्‍लादेशियों से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही पीठ का हिस्‍सा हैं. सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर जारी सुनवाई के दौरान पीठ ने केंद्र से कथित बांग्‍लादेशियों को डिपोर्ट करने के तौर-तरीकों पर न केवल कठिन सवाल पूछे, बल्कि इसपर जवाब भी मांगा गया है. इस पीठ में जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्‍या बागची भी शामिल हैं.

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से उस याचिका पर जवाब मांगा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि विभिन्न राज्यों में बंगाली भाषा बोलने वाले प्रवासी मजदूरों को बांग्लादेशी नागरिक होने के शक में हिरासत में लिया जा रहा है. साथ ही उन्‍हें डिपोर्ट भी किया जा रहा है. बेंच ने कहा कि देश में अवैध घुसपैठ की समस्या है, लेकिन यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि क्या केवल भाषा के आधार पर किसी को विदेशी मानकर कार्रवाई की जा रही है? जस्टिस बागची ने कहा, ‘हमें यह स्पष्ट करने की जरूरत है कि क्या किसी भाषा के आधार पर विदेशी मानने का कोई पूर्वाग्रह मौजूद है. यदि ऐसा है तो क्या यह सही है?’बता दें कि यह मुद्दा तृणमूल कांग्रेस सांसद और वेस्ट बंगाल माइग्रेंट वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड के अध्यक्ष समीरुल इस्लाम की याचिका पर सुनवाई के दौरान उठा. याचिका में मांग की गई है कि बंगाली भाषी प्रवासी मजदूरों को बिना नागरिकता स्थिति निर्धारित किए बांग्लादेश भेजने से रोका जाए.

बंगाली भाषा और अवैध बांग्‍लादेशी

याचिकाकर्ता की ओर से पेश सीनियर वकील प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि कई मजदूरों को सिर्फ इसलिए बांग्लादेश भेज दिया गया, क्योंकि वे बंगाली बोलते थे. उन्होंने कहा, ‘किसी को केवल भाषा के आधार पर कैसे विदेशी मान सकते हैं? किसी को बाहर भेजने से पहले अदालत, ट्रिब्यूनल या केंद्र सरकार को ही यह तय करना होगा कि वे विदेशी हैं या नहीं.’ केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आपत्ति जताई कि कोई संगठन इस मामले में अदालत का दरवाजा क्यों खटखटा रहा है, जबकि प्रभावित लोग स्वयं सामने नहीं आ रहे. उन्होंने कहा, ‘भारत अवैध प्रवासियों की राजधानी नहीं हो सकता. हमें अपने नागरिकों के संसाधन बचाने हैं.’ सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने हालांकि केंद्र से स्पष्ट करने को कहा कि क्या बंगाली भाषा बोलने वालों को ही शक की बुनियाद बनाया जा रहा है. जस्टिस बागची ने कहा, ‘यह मुद्दा संवेदनशील है. एक ओर राष्ट्रीय सुरक्षा है, दूसरी ओर साझा सांस्कृतिक विरासत. पंजाब और बंगाल दोनों की यही स्थिति है, जहां भाषा तो साझा है, लेकिन सीमा हमें अलग करती है.’

सोनाली बीबी का मामला

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोलकाता हाईकोर्ट में लंबित हैबियस कॉर्पस याचिका पर उसकी सुनवाई पर कोई रोक नहीं है और हाईकोर्ट स्वतंत्र रूप से आदेश पारित कर सकता है. बता दें कि सोनाली बीबी नाम की एक महिला को बांग्‍लादेश डिपोर्ट कर दिया गया. वह 8 महीने की गर्भवती हैं. गंभीर बात यह है कि बांग्‍लादेश ने भी उन्‍हें अपना नागरिक नहीं माना और जेल भेज दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह इस याचिका और रोहिंग्या मामले से जुड़े लंबित याचिका दोनों पर अपना जवाब दाखिल करे. अब यह मामला 11 सितंबर को सुनवाई के लिए लिस्‍ट किया गया है.

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Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें

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