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POK Protests Against Pakistan: पीओके में चल रहे हिंसक प्रदर्शन बताते हैं कि पाकिस्तानी फौज के दमन और संसाधनों की लूट से जनता किस कदर त्रस्त है. ‘आजाद कश्मीर’ की बात करने वालों को भारत से सीखना चाहिए कि कश्मीर की असली जीत लोगों की जिंदगी सुधारने में है.
नई दिल्ली/इस्लामाबाद: पाकिस्तान की पूर्व कप्तान सना मीर ने महिला वर्ल्ड कप के दौरान प्रॉपेगेंडा फैलाने की कोशिश की. उन्होंने कमेंट्री में एक पाकिस्तानी खिलाड़ी को ‘आजाद कश्मीर’ से बताते हुए इंट्रोड्यूस किया. ये घटना मामूली लग सकती है लेकिन यही घटना पाकिस्तान की सोच की पोल खोल देती है. पाकिस्तान हर मंच पर ‘आजाद कश्मीर’ का झूठा नैरेटिव बेचता है. मगर असलियत ये है कि जिसे वो ‘आजाद’ कहते हैं, वहां लोग भूख, दमन और हिंसा से जूझ रहे हैं. सना मीर को बाद में सोशल मीडिया पर सफाई देनी पड़ी कि उनका मकसद राजनीति करना नहीं था. लेकिन सवाल ये है कि खेल की कमेंट्री में भी पाकिस्तान के लोग अगर पीओके को ‘आजाद’ बताने लगें तो यह वहीं से शुरू होने वाला झूठ है, जो दशकों से पाकिस्तान चला रहा है. असल हालात इस झूठ से बिल्कुल उलट हैं.
पीओके की हकीकत क्या है?
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में लगातार जबरदस्त प्रदर्शन हो रहे हैं. लोग सड़कों पर उतरे, पुलिस से भिड़ गए, कई मारे गए. इंटरनेट बंद कर दिया गया, बाजार ठप हो गए. लोगों की मांगें क्या हैं? सस्ती बिजली, स्वास्थ्य सुविधाएं, नौकरियां और भ्रष्टाचार से मुक्ति.
सिर्फ इतना ही नहीं, संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी के आंदोलन ने बता दिया कि लोग पाकिस्तान से अब तंग आ चुके हैं. पीओके की जनता खुलेआम पाकिस्तानी सेना और सरकार पर अत्याचार का आरोप लगा रही है. कुछ नेताओं ने तो सेना की तुलना ‘चुड़ैल’ तक से कर दी. यह वही ‘आजाद कश्मीर’ है, जिसकी कल्पना पाकिस्तानी नेताओं ने नारेबाजी में बेची थी.

