पूर्व केंद्रीय मंत्री व एआईसीसी सचिव भंवर जितेंद्र सिंह तथा राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने अलवर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मनरेगा योजना का नाम और स्वरूप बदलने का कड़ा विरोध किया। उन्होंने राजस्थान में कांग्रेस द्वारा आगामी आंदोलन औ
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भंवर जितेंद्र सिंह ने कहा कि भाजपा सरकार ने केवल मनरेगा का नाम ही नहीं बदला, बल्कि इसके एक्ट को बदलकर इसे एक योजना बना दिया है। पहले इस योजना में केंद्र सरकार 90 प्रतिशत और राज्य सरकार 10 प्रतिशत खर्च वहन करती थी, लेकिन अब केंद्र सरकार केवल 60 प्रतिशत और राज्य सरकार को 40 प्रतिशत राशि देनी होगी। इससे साफ है कि सरकार धीरे-धीरे इस योजना को खत्म करना चाहती है। जिन मजदूरों को साल में 100 दिन का रोजगार मिलता था, वह भी उनसे छीना जाएगा। सरकार की मंशा गरीबों को और गरीब बनाने की है, जिससे वे आत्महत्या की ओर मजबूर हों।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाएगी और हर जॉब कार्ड धारक को आंदोलन से जोड़ेगी, ताकि लोगों को बताया जा सके कि सरकार किस तरह मनरेगा को खत्म करने की साजिश कर रही है।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि अब इस योजना को पीएम पोर्टल से जोड़कर मजदूरों को जहां जरूरत होगी वहां भेजा जाएगा। पहले मनरेगा के तहत मजदूर अपने गांव, ढाणी और आसपास के क्षेत्रों में काम करते थे, लेकिन अब बड़े जागीरदार गरीब मजदूरों को बंधुआ मजदूर बनाने की स्थिति पैदा कर दी जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा जानती थी कि कांग्रेस इसका विरोध करेगी, इसलिए योजना का नाम भगवान श्रीराम के नाम पर रख दिया गया, ताकि विरोध को धार्मिक रंग दिया जा सके।
जूली ने कहा कि सरकार यह प्रचार करेगी कि काम के दिन 100 से बढ़ाकर 125 कर दिए गए हैं, जबकि सच्चाई यह है कि एक्ट बदलकर पूरी योजना की आत्मा ही खत्म कर दी गई है।
उन्होंने आंदोलन की रूपरेखा बताते हुए कहा कि 11 जनवरी को पूरे राजस्थान में धरना, 12 से 29 जनवरी तक गांव-गांव और ढाणी-ढाणी जाकर जनसंपर्क, 30 जनवरी को वार्ड और ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद दूसरे सप्ताह में विधानसभा का घेराव होगा। वहीं 15 से 20 जनवरी के बीच एआईसीसी की ओर से चार बड़ी रैलियां आयोजित की जाएंगी।

