सम गांव स्थित एक सरकारी टीचर अजीत चारण ने एक बिल्ली के छोटे बच्चे को हाथ में पकड़े हुए की एक तस्वीर साझा की। ये बिल्ली कोई साधारण बिल्ली नहीं बल्कि बेहद दुर्लभ कैराकल बिल्ली का बच्चा है।
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दरअसल, जैसलमेर में पिछले कुछ वर्षों से दूर दराज इलाकों में बड़े आकार की बिल्ली के देखे जाने की कई अपुष्ट सूचनाएं मिल रही थी। संकेत मिल रहा था कि यह कैराकल बिल्ली हो सकती है, लेकिन इसकी पुष्टि के लिए किसी के पास कोई तस्वीर नहीं थी।
लेकिन हाल ही में टीचर अजीत चारण द्वारा इस बिल्ली की तस्वीर साझा करने से विशेषज्ञों में जैसलमेर में कैराकल के होने के सुखद संकेत मिलने लगे हैं। अब वन विभाग की टीम उस इलाके में वाटर हॉल पर कैमरे लगाएगी ताकि इस जीव की रेगिस्तान में दस्तक की पुष्टि हो सके। क्योंकि अगर बिल्ली का बच्चा मिला है तो इसका परिवार भी रामगढ़ इलाके में जरूर होगा।
रामगढ़ जाते समय एक खेत के पास मिला कैराकल बिल्ली का बच्चा।
रामगढ़ इलाके में मिला बिल्ली का बच्चा शिक्षक अजीत चारण ने बताया कि कुछ समय पहले रामगढ़ में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने गए थे। उस दौरान उन्होंने एक खेत में इस बिल्ली का शावक दिखा। इस पर उन्होंने पकड़कर साथ में फोटो लिए तथा वापस उसी समय जंगल में छोड़ दिया।
सोशल मीडिया पर तस्वीर साझा होने के कुछ ही मिनटों में सलीम अली पक्षी विज्ञान एवं प्राकृतिक इतिहास केंद्र की विशेषज्ञ डॉ. शोमिता मुखर्जी और गुरु गोविंदसिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. सुमित डूकिया ने इसकी पुष्टि कैराकल के बच्चे के रूप में की। विशेषज्ञों का मानना है कि रेगिस्तान में कैराकल बिल्ली मिलना सुखद संकेत है।
तीन दशकों से नहीं दिखी कैराकल, पूर्वी राजस्थान में मौजूद
पिछले तीन दशकों से अधिक समय में राजस्थान के थार रेगिस्तान में कैराकल के देखे जाने की कोई पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि पूर्वी राजस्थान के रणथंभोर, रामगढ़ और मुकुंदरा के टाइगर रिजर्व में समय समय पर कुछ कैराकल देखे जाते रहे हैं। इससे पहले कैराकल राजस्थान के रेगिस्तान में पाए जाते थे।
विशेष रूप से पश्चिमी भारत के शुष्क और अर्थ शुष्क क्षेत्रों में, जिनमें थार रेगिस्तान जैसे क्षेत्र शामिल है। ऐतिहासिक रूप से ये अधिक व्यापक हैं, भारत में इनकी संख्या अत्यंत कम है। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व जैसे संरक्षित क्षेत्रों में हाल ही में कैमरा ट्रैप द्वारा देखे गए दृश्य इनकी उपस्थिति की पुष्टि हुई है जो इस दुर्लभ मध्यम आकार की जंगली बिल्ली के लिए संरक्षण प्रयासों और आवास संरक्षण के महत्व को उजागर करते है।

बेहद दुर्लभ जीव है कैराकल बिल्ली।
भारत में सिर्फ 50 के आसपास ही बची, संरक्षण जरूरी
जिले में कैराकल दिखना राजस्थान और भारत में कैराकल की आबादी को समझने और संरक्षित करने के लिए काम कर रहे वन्यजीव शोधकर्ताओं और वन प्रबंधकों के लिए महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करता है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह जैसलमेर के रामगढ़ व आसपास के बार्डर इलाके में देखने को मिली है। लेकिन अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
यह तस्वीर भले ही कुछ महीने पुरानी हो, लेकिन कैराकल और वह भी एक शावक के देखे जाने की पुष्टि करने वाला एक बहुत अच्छा रिकॉर्ड है जो इसके प्रजनन की भी पुष्टि करता है।
बेहद दुर्लभ है ये जीव आईयूसीएन की रेड लिस्ट में शामिल कैराकल कैट मध्यम आकार की जंगली बिल्ली होती है। इसकी ऊंची छलांग लगाने की क्षमता काफी अधिक होती है। ये अधिकतर मिडिल ईस्ट, अफ्रीका, सेंट्रल एशिया के जंगलों में अधिक पाई जाती है। भारतीय वन्य जीव संस्थान के सर्वेक्षण के अनुसार भारत में करीब 50 के आसपास कैराकल कैट ही बची है।
1952 में चीतों के लुप्त होने के बाद ये दूसरी बिल्ली है जो भारत में विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुकी है। आईयूसीएन ने इसे रेड लिस्ट में शामिल कर रखा है। जंगल में रहने वाले तेंदुआ एवं छोटी जंगली बिल्ली के बीच का वन्यजीव कैराकल कैट कैराकल जंगली बिल्लियों की एक प्रजाति है।
यह जंगल में रहने वाले तेंदुआ एवं छोटी जंगली बिल्ली के बीच का वन्यजीव है। यह दिखने में बहुत ही खूबसूरत व फुर्तीला होता है। डॉ. डऊकिया ने अधिकारियों से भारत पाक सीमा क्षेत्र के निकट विशिष्ट क्षेत्रों में उचित सर्वेक्षण करने तथा इसके संरक्षण तथा आवास संरक्षण के लिए एक व्यापक योजना विकसित करने की मांग की है।
वन विभाग लगाएगा वाटर हॉल पर कैमरे जिला वन अधिकारी कुमार शुभम ने बताया- हालांकि तस्वीर मिली है मगर ये पुष्टि नहीं हुई है कि ये जीव हमारे यहां है। अब हमारी टीम रामगढ़ इलाके में बने वाटर हॉल पर कैमरे लगाएगी ताकि पानी पीने के लिए कैराकल की भी पुष्टि हो जाए। अगर ये इस इलाके में है तो ये बहुत बड़ी बात हिअ और इसके संरक्षण के प्रयास शुरू किए जाएंगे।

भारत में केवल 50 ही है कैराकल बिल्ली।

