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एआर रहमान का ताजा बयान केवल एक शिकायत नहीं है, बल्कि गिरते हुए संगीत के लेवल की ओर इशारा है, जहां क्रिएटिविटी पर बिजनेस हावी हो गया है. उन्होंने बॉलीवुड में बीते 8 सालों में कई मौके गंवाए हैं.
नई दिल्ली: एआर रहमान जैसे दिग्गज संगीतकार का मानना कि उन्हें पिछले 8 सालों में बॉलीवुड में काम नहीं मिला है, जो संगीत जगत और बॉलीवुड के बदलते स्वरूप पर एक गहरी और गंभीर चिंता जाहिर करता है. एआर रहमान का बयान कई सवाल भी खड़े करता है. (फोटो साभार: Instagram@arrahman)

एआर रहमान ने ‘बीबीसी एशियन नेटवर्क’ पर खुलकर कहा कि अब संगीत जगत में निर्णय लेने की शक्ति उन लोगों के पास है जो क्रिएटिव नहीं हैं. वे शायद म्यूजिक कंपनियों के अधिकारियों और कॉर्पोरेट जगत की ओर इशारा कर रहे हैं जो संगीत को कला के बजाय सिर्फ एक ‘प्रोडक्ट’ या ‘डेटा’ के रूप में देखते हैं.(फोटो साभार: Instagram@arrahman)

आजकल बॉलीवुड में एक ही फिल्म के लिए 4-5 अलग-अलग संगीतकारों से गाने बनवाने का चलन है. एआर रहमान जैसे कलाकार फिल्म के संगीत को एक सूत्र में पिरोने के लिए मशहूर हैं, इस सिस्टम में फिट नहीं बैठते. उन्होंने कहां, ‘अगर म्यूजिक कंपनी अपने पांच कंपोजर रख लेती है, तो बढ़िया है. मुझे परिवार के साथ समय बिताने का मौका मिलता है.’ (फोटो साभार: Instagram@arrahman)
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एआर रहमान ने अपनी जर्नी के उन पहलुओं को भी बयां किया जो अक्सर लोग नहीं जानते. वे ‘रोजा’ और ‘बॉम्बे’ जैसी बड़ी फिल्मों के बाद भी खुद को ‘आउटसाइडर’ ही महसूस करते थे. एआर रहमान की जिंदगी में टर्निंग प्वाइंट 1999 की फिल्म ‘ताल’ से आया, जिसने उन्हें उत्तर भारत के हर घर तक पहुंचाया. (फोटो साभार: Instagram@arrahman)

एआर रहमान ने सुभाष घई की सलाह पर न सिर्फ हिंदी, बल्कि उर्दू और पंजाबी भी सीखी, ताकि वे संगीत की आत्मा को बेहतर ढंग से समझ सकें. एआर रहमान के लिए म्यूजिक की क्वालिटी सबसे ज्यादा मायने रखती है.(फोटो साभार: Instagram@arrahman)

एआर रहमान ने जब देखा कि उनके तमिल गानों के हिंदी अनुवाद खराब हो रहे हैं, तो उन्होंने इसे ‘अपमानजनक’ माना. उन्होंने इसी वजह से ओरिजिनल हिंदी फिल्मों पर ध्यान दिया, ताकि गीत और संगीत में तालमेल बना रहे. (फोटो साभार: Instagram@arrahman)

दिलचस्प बात है कि जहां बॉलीवुड में एआर रहमान के पास काम कम हुआ है, वहीं मणिरत्नम जैसे निर्देशकों के साथ वह साउथ इंडियन फिल्मों में और ग्लोबल प्रोजेक्ट्स में लगातार सक्रिय हैं. उनका यह रुख दिखाता है कि वह ‘क्वांटिटी’ के बजाय ‘क्वालिटी’ को तवज्जो दे रहे हैं.
(फोटो साभार: Instagram@arrahman)

एआर रहमान काम के पीछे नहीं भागते. उन्हें ईमानदारी से काम मिलना चाहिए. उन्हें इंडस्ट्री की राजनीति और कानाफूसी सुनाई देती है, लेकिन वह सीधे इसमें शामिल नहीं होते. (फोटो साभार: Instagram@arrahman)

