Sunday, April 12, 2026
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टेस्ला के ऑटोपायलट कार का एक्सीडेंट: कोर्ट ने पीड़ित को 2100 करोड़ मुआवजा देने को कहा, कंपनी बोली- ड्राइवर फोन में व्यस्त था


मुंबई2 मिनट पहले

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टेस्ला की ऑटो ड्राइव कार के एक्सीडेंट के एक मामले में इलॉन मस्क की कंपनी को 243 मिलियन डॉलर (करीब 2,100 करोड़ रुपए) का मुआवजा देना होगा। फ्लोरिडा के मियामी कोर्ट ने 4 साल तक चले ट्रायल में कंपनी को भी जिम्मेदार मानते हुए यह आदेश दिया है।

मामला 2019 का है, जब फ्लोरिडा के लार्गो में टेस्ला की ऑटोपायलट सिस्टम वाली गाड़ी से हादसा हुआ। सिस्टम में खराबी के चलते टेस्ला मॉडल S सेडान ने एक SUV को टक्कर मारी थी। इस दुर्घटना में 22 साल की नाइबेल बेनावाइड्स की मौत हो गई और उसका बॉयफ्रेंड डिलन एंगुलो गंभीर रूप से घायल हो गया था।

मामले में कंपनी ने कहा था कि ड्राइवर फोन चलाने में व्यस्त था। हालांकि, कोर्ट ने माना कि टेस्ला का सिस्टम खराब था और हादसे की जिम्मेदारी सिर्फ ड्राइवर की नहीं थी।

टेस्ला ऑटोपायलट क्रैश केस में क्या-क्या हुआ

  • 2021 में ही पीड़ितों के परिवार ने टेस्ला के खिलाफ केस फाइल किया। परिवार ने आरोप लगाया कि कंपनी ने ऑटोपायलट सिस्टम में खराबी की बात छुपाई और इस हादसे से पहले और बाद के डेटा और वीडियो फुटेज को भी खत्म कर दिया।
  • केस 2021 से 2025, चार साल तक चला। इस दौरान टेस्ला इस तरह के एक्सीडेंट के ज्यादातर मामलों को सेटल करती रही या कोर्ट में खारिज करवाती रही, लेकिन ये मामला ट्रायल तक पहुंच गया।
  • टेस्ला ने मियामी की फेडरल कोर्ट में जूरी के सामने ड्राइवर को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की, लेकिन पीड़ितों के वकील ऑटोपायलट सिस्टम की खराबी पर अड़े रहे। आखिर में टेस्ला गाड़ी में खराबी मानती है, लेकिन सबूत छुपाने के आरोप खारिज करती है।

कोर्ट के फैसले को टेस्ला ने गलत माना

कोर्ट के फैसले को गलत ठहराते हुए टेस्ला ने कहा,

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आज का फैसला गलत है। इससे केवल मोटर व्हीकल सेफ्टी को पीछे धकेलने और टेस्ला तथा पूरी इंडस्ट्री के लाइफसेविंग टेक्नोलॉजी को डेवलप करने और लागू करने के प्रयास खतरे में आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि मुकदमा दायर करने वालों ने एक कहानी गढ़ी है जिसमें कार को दोषी ठहराया गया है, जबकि ड्रायवर ने पहले दिन ही एक्सीडेंट की जिम्मेदारी ले ली थी।

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टेस्ला का ऑटोपायलट फीचर कैसे काम करता है?

  • ऑटोपायलट का मतलब है कि बिना ड्राइवर की मदद के कार का चलना। ऑटोपायलट टेक्नोलॉजी कई अलग-अलग इनपुट के आधार पर काम करती है। जैसे लोकेशन और मैप के लिए ये डायरेक्ट सैटेलाइट से कनेक्ट होती है। पैसेंजर को कहां जाना है, इसको मैप में सिलेक्ट किया जाता है। इसके बाद रूट का सिलेक्शन होता है।
  • जब कार ऑटोपायलट मोड पर चलती है तब सैटेलाइट के साथ उसे कार के चारों तरफ दिए गए कैमरा से भी इनपुट मिलता है। यानी कार के सामने या पीछे, दाएं या बाएं कोई ऑब्जेक्ट तो नहीं है। किसी ऑब्जेक्ट के होने पर कार लेफ्ट-राइट मूव होती है या फिर रुक जाती है।
  • कार में कई सेंसर भी होते हैं, जो कार को रोड-लेन में रखने में मदद करते हैं और सिग्नल को रीड करते हैं। ऑटोपायलट मोड में कार की स्पीड 100 किमी प्रति घंटा से ऊपर तक हो जाती है। हालांकि, इस तकनीक में कई बार सेंसर काम करना बंद कर देते हैं जिसके चलते हादसा हो जाता है।

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