विवेक शर्मा | तिलहर3 मिनट पहले
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शाहजहांपुर जिले की तिलहर नवीन गल्ला मंडी में सरकारी धान खरीद केंद्रों पर धीमी रफ्तार के कारण किसान अपना धान बाजार में बेचने को मजबूर हैं। केंद्रों पर राइस मिलों का अटैचमेंट न होने से खरीद प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
1 अक्टूबर से शुरू हुई खरीद प्रक्रिया के बावजूद, 17 अक्टूबर तक सरकारी केंद्रों पर केवल 3815.60 किलोग्राम धान की खरीद हो पाई है। आगे के आंकड़े संकलित किए जा रहे हैं।
किसानों का आरोप है कि सरकारी केंद्रों पर उनके धान को नमी और गंदगी बताकर खारिज किया जा रहा है, जिसके कारण उन्हें निजी आढ़तों पर कम दामों में धान बेचना पड़ रहा है।

केंद्रों तक पहुंचने वाले रास्तों पर किसानों का धान और खरीदे गए धान की बोरियां रखी होने से आवागमन में बाधा आ रही है। राइस मिलों से अटैचमेंट न होने के कारण खरीदा गया धान भी केंद्रों के आसपास ढेर के रूप में पड़ा है।
इसके अतिरिक्त, अधिकांश सरकारी खरीद केंद्रों पर किसानों के लिए बैठने की व्यवस्था और शुद्ध पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं, जबकि इनके निर्देश दिए गए थे।
मंडी में भारतीय खाद्य निगम (आरएफसी) के सात और अन्य समितियों के आठ सहित कुल 15 सरकारी धान खरीद केंद्र स्थापित किए गए हैं।
मंडी में कई स्थानों पर लावारिस धान के ढेर और धान से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां भी देखी जा रही हैं, जिनके मालिकों का पता नहीं चल पाता। इससे धान माफिया की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है, लेकिन प्रशासन की ओर से इस पर कोई कार्रवाई नहीं दिख रही है।

भारतीय किसान यूनियन युवा प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष आदित्य सिंह लोधी ने कहा कि हर साल की तरह इस बार भी किसानों को केवल दिशा-निर्देशों के नाम पर गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी केंद्रों पर नाममात्र की खरीद हो रही है, जिसका सीधा फायदा धान माफिया को मिल रहा है।

