Friday, April 10, 2026
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दावा- अमेरिका ने अफगानिस्तान विदेश मंत्री की पाकिस्तान यात्रा रोकी: 4 अगस्त को इस्लामाबाद जाना था; तालिबान से जुड़े होने के कारण प्रतिबंध लगे


5 मिनट पहले

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पाकिस्तानी मीडिया डॅान ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया की अमेरिका ने अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी की पाकिस्तान यात्रा रद्द कर दी है। अमेरिका की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के यात्रा प्रतिबंधों के कारण यह फैसला लिया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका, अफगानिस्तान-पाकिस्तान के बीच बढ़ती नजदीकियों और तालिबान के चीन से गहरे होते रिश्तों से परेशान है। मुत्ताकी को 4 अगस्त को इस्लामाबाद जाना था, लेकिन अमेरिका ने UN की विशेष अनुमति को रोक दिया, जिसके बिना मुत्ताकी विदेश यात्रा नहीं कर सकते।

मुत्ताकी पर तालिबान से जुड़े होने के कारण अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हैं, जिसके चलते उन्हें विदेश यात्रा के लिए UN की मंजूरी चाहिए होती है। वहीं, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता शफकत अली खान ने कहा कि- कुछ समस्याओं के कारण यह यात्रा नहीं हुई, इसलिए इसे रद्द कहना ठीक नहीं है।

उनका यह दौरा इस्लामाबाद और काबुल के बीच संबंधों को बेहतर करने के लिए था। मुत्ताकी से पहले पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार काबुल गए थे।

2001 से संयुक्त राष्ट्र के तालिबान प्रतिबंध के तहत मुत्ताकी पर यात्रा प्रतिबंध है।

2001 से संयुक्त राष्ट्र के तालिबान प्रतिबंध के तहत मुत्ताकी पर यात्रा प्रतिबंध है।

तालिबान से जुड़े लोगों पर नजर रखती है UNSC समिति

UNSC की प्रतिबंध समिति 1988 में बनी थी। इसमें 5 स्थायी सदस्य (चीन, फ्रांस, रूस, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका) और 10 अस्थायी सदस्य शामिल हैं।

ये तालिबान से जुड़े लोगों पर यात्रा प्रतिबंध, संपत्ति जब्ती और हथियारों पर रोक जैसे कदमों को लागू करती है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने इस मंजूरी को देने में देरी की और आखिरी समय में इसे पूरी तरह रोक दिया। इससे मुत्ताकी की पाकिस्तान यात्रा रद्द हो गई।

  • समिति का काम 1988 प्रतिबंध के तहत सूचीबद्ध व्यक्तियों और समूहों की निगरानी करना है।
  • समिति तालिबान से जुड़े व्यक्तियों और समूहों पर संपत्ति फ्रीज, यात्रा प्रतिबंध, और हथियार प्रतिबंध जैसे प्रतिबंधों को लागू करती है।
  • समिति प्रतिबंधों से छूट के लिए अनुरोधों पर विचार करती है और निर्णय लेती है।

अफगानिस्तान-पाकिस्तान के बीच रिश्ते से परेशान अमेरिका

दूसरी तरफ, चीन और रूस इस कमेटी में तालिबान पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने की वकालत करते हैं, जिससे कमेटी में अक्सर तनाव देखा जाता है। माना जा रहा है कि अमेरिका ने इस यात्रा को रोककर अपनी चिंताओं को जाहिर किया।

हालांकि, जब अमेरिकी विदेश मंत्रालय से इस बारे में सवाल किया गया, तो उनके प्रवक्ता ने कहा- हम अफवाहों पर कोई टिप्पणी नहीं करते। इस जवाब से यह साफ नहीं हुआ कि अमेरिका ने जानबूझकर मंजूरी रोकी है या नहीं।

पाकिस्तानी प्रवक्ता बोले- यात्रा की आधिकारिक तारीख तय नहीं

वहीं, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता शफकत अली खान ने शुक्रवार को कहा था- कुछ समस्याओं के कारण यह यात्रा नहीं हो सकी। हम इन मुद्दों को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने यह भी साफ किया कि मुत्ताकी की यात्रा की कोई आधिकारिक तारीख तय नहीं हुई थी, इसलिए इसे रद्द या स्थगित कहना ठीक नहीं है। खान ने उम्मीद जताई कि जल्द ही इन समस्याओं का समाधान हो जाएगा और अफगान विदेश मंत्री का पाकिस्तान में स्वागत किया जाएगा।

क्यों खास थी यह यात्रा

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हाल के महीनों में रिश्तों में सुधार देखा गया है। 19 अप्रैल 2025 में पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार की काबुल यात्रा के बाद दोनों देशों ने उच्च-स्तरीय बातचीत शुरू की थी मुत्ताकी की यह यात्रा उसी दिशा में एक और कदम थी।

पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार 19 अप्रैल को काबुल पहुंचे थे। उन्होंने अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी से मुलाकात की थी।

पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार 19 अप्रैल को काबुल पहुंचे थे। उन्होंने अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी से मुलाकात की थी।

भारतीय विदेश सचिव से मिले थे मुत्ताकी

तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद भारत और तालिबान सरकार के बीच बातचीत की शुरुआत जनवरी में हुई थी। 8 जनवरी को विक्रम मिसरी और मुत्ताकी के बीच दुबई में बैठक हुई थी। तब अफगान विदेश मंत्री ने अफगानिस्तान के लोगों से जुड़ने और उनका समर्थन करने के लिए भारतीय नेतृत्व की सराहना की थी।

इसके बाद विदेश मंत्रालय के जॉइंट सेक्रेटरी आनंद प्रकाश ने 28 अप्रैल को मुत्ताकी से मुलाकात की थी। उस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार और सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई थी। अब एस जयशंकर और मुत्ताकी की फोन पर बातचीत हुई है।

भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी और तालिबान के विदेश मंत्री मुत्ताकी के बीच 8 जनवरी को दुबई में बातचीत हुई थी।

भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी और तालिबान के विदेश मंत्री मुत्ताकी के बीच 8 जनवरी को दुबई में बातचीत हुई थी।

भारत से तालिबान सरकार को मान्यता नहीं, 20 साल में 25 हजार करोड़ दिए

भारत ने अब तक तालिबान सरकार को आधिकारिक मान्यता नहीं दी है, लेकिन भारत ने पिछले 20 सालों में अफगानिस्तान को 20 हजार करोड़ रुपये की मदद कर चुका है। पिछले साल नवंबर में तालिबान ने मुंबई स्थित अफगान वाणिज्य दूतावास में अपना डिप्लोमैट अपॉइंट किया था। रूस, चीन, तुर्की, ईरान और उज़्बेकिस्तान में पहले से ही अफगान दूतावास हैं।

रूस दुनिया का पहला देश जिसने तालिबान सरकार को मान्यता दी

अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता को रूस ने 3 जुलाई को आधिकारिक मान्यता दी थी । ऐसा करने वाला रूस दुनिया का पहला देश बना।

यह घोषणा काबुल में अफगान विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी और अफगानिस्तान में रूस के राजदूत दिमित्री झिरनोव के बीच हुई बैठक के बाद की गई थी।

तालिबान सरकार ने रूस के इस कदम को बहादुरी भरा फैसला बताया था। मुत्ताकी ने बैठक के बाद जारी एक वीडियो बयान में कहा था,

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यह साहसी फैसला दूसरों के लिए एक मिसाल बनेगा। अब मान्यता की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, रूस सबसे आगे रहा।

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तालिबान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जिया अहमद तकाल ने भी पुष्टि करते हुए कहा था कि रूस पहला देश है जिसने इस्लामिक अमीरात को आधिकारिक मान्यता दी है।

3 जुलाई को रूसी राजनयिक और तालिबान मंत्री के बीच काबुल में बैठक हुई थी। जिसके बाद रुस ने तालिबान को मान्यता दी।

3 जुलाई को रूसी राजनयिक और तालिबान मंत्री के बीच काबुल में बैठक हुई थी। जिसके बाद रुस ने तालिबान को मान्यता दी।

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