Wednesday, January 14, 2026
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दिल्ली धमाका-37 दिन पहले शादी में बना आतंकियों का ग्रुप: पाकिस्तानी हैंडलर के संपर्क में थे; कश्मीर में चिपके पोस्टर से नजर में आए


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नई दिल्ली55 मिनट पहले

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दिल्ली में लाल किला के पास 10 नवंबर को हुए धमाके के पीछे जैश-ए-मोहम्मद का नया वाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल (आतंकियों का ग्रुप) उजागर हुआ है। इस मॉड्यूल में डॉक्टर, प्रोफेसर और महिला सदस्य शामिल थे, जो पाकिस्तानी हैंडलर्स के सीधे संपर्क में थे।

जांच में पता चला है कि यह नेटवर्क मेडिकल प्रोफेशन और शैक्षणिक संस्थानों की आड़ में काम कर रहा था, और हरियाणा के फरीदाबाद, जम्मू-कश्मीर के पुलवामा और यूपी के सहारनपुर सहित कई इलाकों से जुड़ा था। इसकी शुरुआत धमाके से 37 दिन पहले 4 अक्टूबर को सहारनपुर में एक शादी से हुई थी। इसके बाद ग्रुप ने फौजियों को धमकाने वाले पोस्टर, हथियार, विस्फोटक और फंडिंग के नेटवर्क तैयार करना शुरू किया।

सुरक्षा एजेंसियों को कश्मीर में 19 अक्टूबर को जैश के पोस्टर दिखने से मॉड्यूल के एक्टिव होने का सुराग मिला। जांच में सामने आया कि नेटवर्क की सबसे अहम महिला सदस्य डॉ. शाहीन सईद थी। वह जैश सरगना मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर से जुड़ी थी।

4 अक्टूबर को एक्टिव हुआ था मॉड्यूल

जांच में पता चला कि यह मॉड्यूल 4 अक्टूबर को एक्टिव हुआ था, जब सहारनपुर में डॉ. आदिल की शादी डॉ. रुकैया से हुई थी। शादी में कुछ ‘खास मेहमान’ शामिल थे, जिनकी पहचान एजेंसियां कर रही हैं।

शादी के अगले दिन इस मॉड्यूल ने काम शुरू किया। इसका मकसद फौजियों को धमकाने वाले पोस्टर लगाना, हथियारों की सप्लाई और पैसों का इंतजाम करना था। डॉ. आदिल लॉजिस्टिक और फाइनेंशियल चैनल संभालता था। नेटवर्क का प्लान था कि मेडिकल प्रोफेशन की आड़ में फंडिंग और ट्रांसपोर्टेशन चैनल बनाए जाएं।

पोस्टर से मिला पहला सुराग

जांच की शुरुआत तब हुई जब कश्मीर के नौगाम इलाके में 19 अक्टूबर को जैश सके पोस्टर दिखे। पुलिस ने केस दर्ज किया। 27 अक्टूबर को फिर से 25 से ज्यादा पोस्टर लगे। 50 अधिकारियों की टीम ने 60 CCTV कैमरे खंगाले। 31 अक्टूबर को डॉ. आदिल फुटेज में दिखा, जो पोस्टर लगाने वाले इलाकों में घूम रहा था।

फोन सर्विलांस से पता चला कि वह पाकिस्तानी हैंडलर्स से संपर्क में था। उसकी लोकेशन सहारनपुर मिली और 6 नवंबर को उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उसके पास से AK-47, ग्रेनेड और विस्फोटक बरामद हुए। पूछताछ में उसने बताया कि फरीदाबाद में पढ़ा रहे डॉ. मुजम्मिल के पास भारी मात्रा में विस्फोटक है। इसके बाद 9 नवंबर को जम्मू-कश्मीर पुलिस फरीदाबाद पहुंची और अगले दिन मुजम्मिल को पकड़ लिया गया।

दो दोस्त पहले डॉक्टर, फिर आतंकी बने

कश्मीर के पुलवामा जिले के कोइल गांव के दो युवक, डॉ. मुजम्मिल और डॉ. उमर नबी, साथ पढ़े और डॉक्टर बने। बाद में दोनों आतंक की राह पर चले। उनके घर सिर्फ 800 मीटर दूर हैं।

अब मुजम्मिल अरेस्ट है और उमर धमाके में मारा गया। गांव में उनके परिवार दुखी और सदमे में हैं। उमर के बहनोई ने बताया कि उसने आखिरी बार शुक्रवार दोपहर फोन किया था और कहा था कि चार दिन बाद घर लौटेगा। वहीं गांव वालों कहना है कि जिन पर हम गर्व करते थे, आज उन्हीं की वजह से हम शर्मिंदा हैं।

मॉड्यूल की अहम कड़ी थी डॉ. शाहीन सईद

इस नेटवर्क की सबसे अहम सदस्य डॉ. शाहीन सईद है। वह जैश सरगना मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर के सीधे संपर्क में थी और महिला आतंकी विंग ‘जमात उल मोमिनात’ से जुड़ी थी। यह विंग सादिया ने अपने पति यूसुफ अहमद की मौत के बाद बनाई थी। शाहीन को फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी से गिरफ्तार किया गया और श्रीनगर ले जाया गया।

शाहीन ने इलाहाबाद मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस किया और कानपुर मेडिकल कॉलेज में 7 साल असिस्टेंट प्रोफेसर रही। 2021 में वह नौकरी छोड़कर गायब हो गई थी। वह डॉ. मुजम्मिल के संपर्क में आई, फिर पाकिस्तान के हैंडलर के निर्देश पर महिलाओं को कट्टरपंथ की राह पर लाने लगी।

अब UP ATS ने उसके भाई डॉ. परवेज को लखनऊ से गिरफ्तार किया है, जो इंटीग्रल मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर था।

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