Saturday, April 11, 2026
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दिल्‍ली से कटरा, वाराणसी या अयोध्‍या कौन सी वंदे भारत बना चलता फिरता ATM


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वंदे भारत आम लोगों को राहत देने के साथ-साथ रेलवे के लिए फायदे का सौदा बन चुकी है और राजस्‍व में बढ़ोत्‍तरी हो रही है. इतना ही नहीं एक रूट पर चलने वाली वंदे भारत तो रेलवे के लिए चलता फिरता एटीएम बन चुकी है. आइए जानते हैं यह ट्रेन किस रूट पर चलती है.

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79 वंदे भारत मौजूदा समय विभिन्‍न रूटों पर चल रही हैं.

नई दिल्‍ली. वंदे भारत एक्‍सप्रेस लोगों की पसंदीदा ट्रेन बनती जा रही है. यही वजह है देश के लगभग सभी प्रमुख शहरों से ट्रेन का ऑपरेशन शुरू हो चुका है. ये ट्रेनें आम लोगों को राहत देने के साथ-साथ रेलवे के लिए फायदे का सौदा बन चुकी हैं और राजस्‍व में बढ़ोत्‍तरी हो रही है. इतना ही नहीं एक रूट पर चलने वाली वंदे भारत तो रेलवे के लिए चलता फिरता एटीएम बन चुकी है. आइए जानते हैं यह ट्रेन किस रूट पर चलती है.

रेल मंत्रालय एडीजी धर्मेन्‍द्र तिवारी ने बताया कि एक साल में करीब 4 करोड़ यात्रियों ने वंदे भारत से सफर किया है. यह पिछले वित्‍तीय साल वर्ष 2024-25 के मुकाबले 34 प्रतिशत ज्यादा है. तब 2.97 करोड़ यात्रियों ने सफर किया है. अगर बात की जाए, जब से वंदे भारत शुरू हुई है, तब से कुल 9.1 करोड़ से ज्यादा यात्रियों सफर किया है. इतना ही नहीं वंदे भारत ने अब तक 1 लाख ट्रिप्स पूरी कर चुकी है.

100 फीसदी आक्‍यूपेंसी

रेल मंत्रालय के अनुसार ज्‍यादातर रूट में आक्‍यूपेंसी रेट काफी बेहतर है. अगर इसा साल शुरुआती तीन महीनों की बात की जाए तो 119 ट्रिप्‍स में कुल 1.21 लाख यात्री सफर चुके हैं. इसका मतलब कि ट्रेन में 100 फीसदी आक्‍यूपेंसी रेट है. ट्रेन की सभी सीटें भरी ल रही है.

कौन रूट है रेलवे के लिए एटीएम

भारतीय रेलवे के सबसे ज्‍यादा वंदे भारत वाला कमाऊ रूट नई दिल्ली-वाराणसी रूट पर सबसे ज्यादा 73 लाख यात्री सफर कर चुके हैं. यानी इस रूट पर यात्रियों की संख्‍या देखते हुए कमाऊ रूट है. वहीं दूसरे नंबर पर नई दिल्ली-श्री माता वैष्णो देवी कटरा रूट है, जिस पर 56 लाख यात्रियों ने सफर किया. वहीं सिकंदराबाद-विशाखापट्टनम रूट पर 48 लाख यात्रियों, चेन्नई-मैसूर रूट पर 36 लाख यात्री ने सफर किया है.

पर्यटन और धार्मिक स्‍थल को करती हैं कनेक्‍ट

ये ट्रेनें न सिर्फ बड़े शहरों को जोड़ रही हैं, बल्कि तीर्थ स्थलों, पर्यटन स्थलों और सांस्कृतिक केंद्रों तक लोगों का आना जाना कर रही हैं. इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिल रहा है.



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