दिल्ली के सत्य निकेतन में जर्जर इमारत के हादसे के बाद दिल्ली में पीजी और छात्र आवासों की सुरक्षा को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। देश-विदेश से उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली आने वाले छात्रों को सुरक्षित, सुलभ और किफायती आवास उपलब्ध कराने के लिए उप राज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू ने 18 सदस्यीय हाई-पावर कमेटी के गठन को मंजूरी दी है। समिति की अध्यक्षता शिक्षा मंत्री आशीष सूद करेंगे। बैठक में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और शिक्षा मंत्री आशीष सूद मौजूद रहे। एलजी ने समिति को पीजी से जुड़े मौजूदा नियमों की समीक्षा करने, छात्रों के लिए वैकल्पिक हॉस्टल विकसित करने और खाली पड़ी सरकारी इमारतों के उपयोग की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए हैं। 60 दिन में रिपोर्ट देनी होगी समिति को गठन की तारीख से 60 दिन के भीतर ठोस सिफारिशों के साथ रिपोर्ट देनी होगी। यह फैसला ऐसे समय हुआ है जब सत्य निकेतन हादसे ने राजधानी में जर्जर इमारतों में चल रहे पीजी, निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और छात्रों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सरकार अब छात्र आवासों की सुरक्षा व्यवस्था को व्यापक स्तर पर व्यवस्थित करने की तैयारी में है। मांग और उपलब्ध हॉस्टल का होगा आकलन समिति दिल्ली में छात्रों की आवास जरूरत और उपलब्ध हॉस्टल सुविधा के बीच अंतर का आकलन करेगी। इसके आधार पर विश्वविद्यालयों, एमसीडी, डीडीए और एनडीएमसी के सहयोग से नए छात्र आवास विकसित करने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। डीडीए की खाली या कम उपयोग वाली संपत्तियों को छात्र आवास में बदलने की व्यवहार्यता भी जांची जाएगी। सुरक्षित पीजी का बनेगा केंद्रीय डेटाबेस सभी संस्थागत हॉस्टलों और कानूनी रूप से पंजीकृत पीजी का केंद्रीय डेटाबेस तैयार किया जाएगा। छात्रों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाने की योजना है, जहां वे असुरक्षित आवास, अधिक भीड़, आग के खतरे और अन्य सुरक्षा संबंधी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे। फायर-ड्रिल और आपदा प्रोटोकॉल छात्र आवासों के लिए मानक आपातकालीन निकासी और आपदा-प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल तैयार होगा। छात्रों, वार्डन, विश्वविद्यालय अधिकारियों और पीजी संचालकों के लिए नियमित फायर व डिजास्टर मॉक ड्रिल कराई जाएगी।
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