Thursday, January 15, 2026
Homeराज्यदिल्लीदिल्ली-NCR की सुरक्षा के लिए तैनात होगा स्वदेशी डिफेंस सिस्टम: ड्रोन-फाइटर...

दिल्ली-NCR की सुरक्षा के लिए तैनात होगा स्वदेशी डिफेंस सिस्टम: ड्रोन-फाइटर जेट के हमलों को नाकाम करेगा; अगस्त में सफल परीक्षण किया जा चुका


नई दिल्ली11 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

IADWS का 23 अगस्त को ओडिशा के तट पर सफल परीक्षण किया गया था।

भारत अब राजधानी दिल्ली-NCR को मिसाइलों, ड्रोन और फाइटर जेट हमले जैसे खतरों से बचाने के लिए अपना खुद का मल्टी-लेयर्ड एयर डिफेंस सिस्टम लगाने जा रहा है। रक्षा मंत्रालय इस प्रोजेक्ट को तेजी से आगे बढ़ा रहा है।

वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों के अनुसार नया इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस वेपन सिस्टम (IADWS) पूरी तरह देश में बने हथियारों से तैयार होगा। इस सिस्टम का सबसे बड़ा हिस्सा DRDO की बनाई QRSAM मिसाइल और VSHORADS होगा।

इनके साथ कई तरह के सेंसर, रडार और एक आधुनिक कंट्रोल सिस्टम जोड़ा जाएगा, जिससे हर खतरे पर तुरंत नजर रखी जा सके। ये पूरा सिस्टम भारतीय वायुसेना ऑपरेट करेगी। IADWS का 23 अगस्त को सफल परीक्षण भी हो चुका है।

IADWS का 23 अगस्त को ओडिशा के तट पर सफल परीक्षण किया गया था।

IADWS का 23 अगस्त को ओडिशा के तट पर सफल परीक्षण किया गया था।

सुदर्शन चक्र मिशन का हिस्सा

IADWS एक मल्टीलेयर एयर डिफेंस सिस्टम है, ये दुश्मन के हवाई हमले नाकाम करेगा। इसे सुदर्शन चक्र मिशन का एक हिस्सा माना जा रहा है। यह स्वॉर्म (एक साथ छोड़े गए कई ड्रोन्स) ड्रोन अटैक के खिलाफ रक्षा कवच बनेगा। पीएम नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से दिए अपने भाषण में सुदर्शन चक्र मिशन की घोषणा की थी।

इसके बाद 23 अगस्त को ओडिशा के तट पर IADWS का सफल परीक्षण किया गया था। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने इसकी जानकारी देते हुए X पोस्ट में लिखा था- इस परीक्षण ने हमारे देश की मल्टी लेयर एयर डिफेंस कैपेबिलिटी बढ़ाई है। यह सिस्टम दुश्मन के हवाई खतरों के खिलाफ रीजनल डिफेंस को मजबूती देगा।

एक साथ 3 टारगेट मार गिराए

इस सिस्टम के सफल परीक्षण से भारत की इग्ला और CIWS जैसे विदेशी डिफेंस सिस्टम पर निर्भरता कम हो जाएगी।

इस सिस्टम के सफल परीक्षण से भारत की इग्ला और CIWS जैसे विदेशी डिफेंस सिस्टम पर निर्भरता कम हो जाएगी।

परीक्षण के दौरान इस सिस्टम ने 2 हाई स्पीड फिक्स विंग अनमैन्ड ड्रोन, मल्टी कॉप्टर ड्रोन समेत तीन अलग-अलग टारगेट पर अटैक किया। ये तीनों टारगेट अलग-अलग दूरी और ऊंचाई पर थे। IADWS ने इन तीनों को एक साथ निशाना बनाकर पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया।

सिस्टम का कॉन्सेप्ट इस तरह से तैयार किया गया है कि पहले रडार यूनिट आने वाले खतरों पर नजर रखती है और उन्हें क्लासिफाई करती है। इसके बाद कमांड सेंटर ज्यादा ऊंचाई से आने वाले तेज खतरों के लिए क्विक एक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल (QRSAM) को निर्देश देता है।

कम रेंज वाले और धीमी गति से होने वाले हमले के लिए एडवांस्ड वैरी शॉर्ट एयर डिफेंस सिस्टम मिसाइलें (VSHORADS) एक्टिवेट होती हैं। इसके साथ ही साथ ड्रोन और चीप सैचुरेटेड अटैक के लिए लेजर बेस्ड डायरेक्टेड एनर्जी वेपन (DEW) हमला करते हैं।

अमेरिका के महंगे NASAMS-II की जगह स्वदेशी सिस्टम भारत पहले अमेरिका का NASAMS-II सिस्टम खरीदना चाहता था, जो वॉशिंगटन DC और व्हाइट हाउस की सुरक्षा करता है। इसके लिए बातचीत भी चली, लेकिन उसका खर्च बहुत ज्यादा था। इसके बाद सरकार ने पूरी तरह स्वदेशी विकल्प अपनाने का फैसला किया। यह कदम ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा सेक्टर के लिए बड़ी बढ़त माना जा रहा है।

NASAMS-II यही सिस्टम वॉशिंगटन DC और व्हाइट हाउस की सुरक्षा करता है।

NASAMS-II यही सिस्टम वॉशिंगटन DC और व्हाइट हाउस की सुरक्षा करता है।

DRDO की बड़ी भूमिका

DRDO मिसाइल सिस्टम को रडार, डेटा लिंक और रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम से जोड़ने की जिम्मेदारी संभालेगा। अधिकारियों के मुताबिक, इतनी जटिल एयर डिफेंस व्यवस्था के लिए कई सिस्टमों को एक साथ जोड़ना जरूरी है।

भारत के पास है आकाशतीर डिफेंस सिस्टम

पंजाब के आदमपुर एयरबेस से 13 मई को पीएम मोदी ने जिस एयर डिफेंस सिस्टम की तारीफ की थी, वह भारत का आकाशतीर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इसकी मदद से ही पाकिस्तान की ओर से आ रहे सैकड़ों ड्रोन, मिसाइल और रॉकेट को हवा में ही मार गिराया गया था। इसे भारत का आयरन डोम कहा गया है।

आकाशतीर एक स्वदेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-पावर्ड एयर डिफेंस सिस्टम है जिसे भारतीय सेना के लिए डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO), इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) ने संयुक्त रूप से डिजाइन और डेवलप किया है।

इसका काम लो-लेवल एयरस्पेस की निगरानी करना और ग्राउंड पर तैनात एयर डिफेंस वेपन सिस्टम को कंट्रोल करना है। आकाशतीर रडार, सेंसर और कम्युनिकेशन सिस्टम को इंटिग्रेट करके सिंगल नेटवर्क बनाता है, जो रियल टाइम में हवाई खतरों का पता लगाने, ट्रैक करने और उन्हें न्यूट्रिलाइज करने में सक्षम है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद सुरक्षा पर जोर मई में पाकिस्तान द्वारा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय इलाके को निशाना बनाने की कोशिश की खबरों के बाद राजधानी की हवाई सुरक्षा को और मजबूत करने की जरूरत महसूस की गई। उसी के बाद इस प्रोजेक्ट को प्राथमिकता दी गई।

————————-

ये खबर भी पढ़ें…

जर्मनी से ₹70 हजार करोड़ में 6 पनडुब्बियां खरीदेगा भारत: जर्मन कंपनी से बातचीत को मंजूरी

भारत सरकार वायुसेना और नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए दो बड़ी डील करने के लिए तैयार हो गई है। पहली डील रक्षा मंत्रालय और मझगांव डॉकयार्ड्स लिमिटेड (MDL) जर्मनी से 6 सबमरीन खरीदने वाली है। सरकार ने ‘प्रोजेक्ट 75 इंडिया’ के तहत भारत में बनने वाली इन पनडुब्बियों की खरीद को लेकर बातचीत शुरू करने की मंजूरी दे दी है। यह डील 70 हजार करोड़ में हो सकती है। पढ़ें पूरी खबर…

खबरें और भी हैं…



Source link

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments