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Repo Rate Hike : आरबीआई ने रेपो रेट को बढ़ाकर अब 5.50 फीसदी कर दिया है. लंबे समय के बाद केंद्रीय बैंक ने ब्याज दर में इजाफा किया है. एसबीआई रिसर्च का कहना है कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी का यह सिलसिला अब रुकने वाला नहीं है.
आरबीआई का रुख अब मौद्रिक सख्ती (Monetary Tightening) की ओर झुक चुका है. (Photo : Canva)
नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बैंक ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट का इजाफा कर दिया है. अब ब्याज दर 5.50 फीसदी हो गई है. एसबीआई रिसर्च (SBI Research) की ताजा रिपोर्ट कहती है कि यह तो बस शुरुआत है. असली झटका तो दिसंबर के महीने में लगने वाला है. रिपोर्ट में कहा गया है कि दिसंबर में होने वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में आरबीआई रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ोतरी कर सकता है.
एसबीआई रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 50 बेसिस प्वाइंट्स की यह बढ़ोतरी काफी हद तक वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी. रिपोर्ट में सुझाव दिया गया कि जल्द ही ग्लोबल हालात अस्थिर हो सकते हैं, इसलिए आरबीआई को छोटी-छोटी बढ़ोतरी के बजाय एक बार में ही दरें बढ़ाने का मौका चुनना चाहिए.
रेपो रेट 6 फीसदी करना अच्छा विकल्प
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर डॉ. सौम्य कांति घोष ने कहा, “दिसंबर तक रेपो रेट को 6 फीसदी करना सबसे अच्छा विकल्प हो सकता है.” आरबीआई की एमपीसी में रेपो रेट को सर्वसम्मति से 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.50 फीसदी करने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि अब आगे नीतिगत विकल्प असल में या तो दरें बढ़ाने या उन्हें स्थिर रखने तक ही सीमित हैं, जो बदलती परिस्थितियों पर निर्भर करेगा.
सख्त मॉनेटरी पॉलिसी की ओर RBI
डॉ. घोष ने कहा कि अक्टूबर की पॉलिसी बैठक के विश्लेषण से साफ है कि आरबीआई का रुख अब सिर्फ सतर्कता बरतने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्पष्ट रूप से मौद्रिक सख्ती (Monetary Tightening) की ओर झुक चुका है. केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 27 के लिए जीडीपी ग्रोथ अनुमान को 40 आधार अंक बढ़ाकर 7.1% और खुदरा महंगाई के अनुमान को 20 आधार अंक बढ़ाकर 5.20% कर दिया है.
नवंबर 2026 में पीक पर पहुंच सकती है महंगाई
एसबीआई ने आरबीआई के पुराने पॉलिसी साइकल का अध्ययन कर बताया कि ब्याज दरें बढ़ाने की रफ्तार सीधे तौर पर महंगाई के दबाव की अवधि और गंभीरता से तय होती है. रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि नवंबर 2026 में खुदरा महंगाई लगभग 6.8% के अपने उच्चतम स्तर (Peak) पर पहुंच सकती है. इसी के मद्देनजर रेपो रेट के भी 6.0% के पीक स्तर को छूने की पूरी संभावना है. हालांकि, महंगाई के ट्रेंड में बदलाव के आधार पर ब्याज दरें बढ़ाने की मात्रा और रफ्तार में काफी अंतर हो सकता है. टाइटनिंग साइकल की रफ्तार भी उतनी ही अहम है.
एसबीआई रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में कहा गया है कि कैपिटल फ्लो को आसान बनाने के लिए भारत को एक स्पष्ट एआई पॉलिसी की जरूरत है, क्योंकि स्पष्ट पॉलिसी के बिना कैपिटल फ्लो की संभावना कम है. साथ ही, इसमें यह भी कहा गया है कि रुपये के लिए सुरक्षा उपाय करने की जरूरत है, क्योंकि यह अब एक चिंताजनक बेंचमार्क की ओर बढ़ रहा है.
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रुली बिश्नोई मीडिया इंडस्ट्री में 20 साल से अधिक के अनुभव वाले सीनियर पत्रकार हैं. वह अभी News18 Hindi (hindi.news18.com) से जुड़े हैं और बिजनेस वर्टिकल में काम करते हैं. यहां वे बिजनेस जगत के मुश्किल आंकड़ों …
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