Sunday, April 12, 2026
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‘धर्म के नाम पर लोगों को मारना…’, एआर रहमान ने इस्लाम, हिंदू-ईसाइयत पर की बात, बताई अपनी सबसे बड़ी दिक्कत


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एआर रहमान देश के सबसे पॉपुलर म्यूजिक कंपोजर्स में से एक हैं. वह बॉलीवुड से लेकर साउथ इंडस्ट्री और हॉलीवुड में भी अपने हुनर का जलवा बिखेर चुके हैं. उन्होंने अपने शानदार म्यूजिक से लोगों के दिलों में खास जगह बनाई है. हाल ही में रहमान ने सभी धर्मों को लेकर अपनी समझ पर बात की. उन्होने कहा कि वह सभी धर्मों का सम्मान करते हैं, लेकिन धर्म के नाम पर लोगों को मारना या फिर नुकसान पहुंचाना सही नहीं है.

एआर रहमान ने धर्म को लेकर अपनी समझ पर खुलकर बात की है.

नई दिल्ली. ऑस्कर विजेता म्यूजिक कंपोजर एआर रहमान अपनी बेबाकी के लिए भी जाने जाते हैं. उन्होंने हमेशा अपनी स्पिरिचुअल जर्नी और सूफीवाद अपनाने के अपने फैसले के बारे में खुलकर बात की है. हाल ही में एआर रहमान ने धर्म को लेकर अपनी समझ, म्यूजिक की भूमिका को लेकर चर्चा की. साथ ही खुलासा किया कि वह क्यों सूफी मार्ग की ओर आकर्षित हुए.

निखिल कामत के पॉडकास्ट पर एआर रहमान अपने धार्मिक दृष्टिकोण को लेकर बात की. कंपोजर ने कहा कि उन्होंने विभिन्न धर्मों की शिक्षाओं को समझा है. एआर रहमान ने बताया, ‘मैं सभी धर्मों का प्रशंसक हूं. मैंने इस्लाम, हिंदू धर्म और ईसाइयत का अध्ययन किया है. मेरी एक ही समस्या है कि धर्म के नाम पर किसी को मारना या चोट पहुंचाना बहुत गलत है.’

स्टेज को पवित्र स्थान मानते हैं एआर रहमान

एआर रहमान ने बताया कि स्टेज पर परफॉर्म करना उनके लिए एक पवित्र स्थान में प्रवेश करने जैसा लगता है, जहां अलग-अलग संस्कृतियों और आस्थाओं के लोग एक साथ आते हैं. उन्होंने कहा, ‘मुझे लोगों का मनोरंजन करना पसंद है और जब मैं परफॉर्म करता हूं, तो मुझे लगता है कि वह एक दरगाह जैसा है और हम सब एकता के फल का आनंद ले रहे है. अलग-अलग धर्मों के लोग, जो अलग-अलग भाषाएं बोलते हैं, वहां एक साथ आते हैं.’

एआर रहमान ने बताई सूफीवाद की खासियत

कंपोजर ने बताया कि सूफीवाद उनके लिए क्या मायने रखता है. उनके अनुसार, यह अहंकार और नकारात्मक मानवीय प्रवृत्तियों को त्यागने की एक प्रक्रिया है. एआर रहमान ने कहा, ‘सूफीवाद ऐसा है, जैसे मरने से पहले मर जाना. इसमें कई परदे होते हैं जो आपको आत्मचिंतन कराते हैं, और उन परदों को हटाने के लिए आपको अपने भीतर की कई चीजों को मिटाना पड़ता है. वासना, लालच, जलन- इन सबका मरना जरूरी है. आपका अहंकार समाप्त हो जाता है, तब आप ईश्वर की तरह पारदर्शी हो जाते हैं.’

परखी जाती है आस्था की सच्चाई

उन्होंने आगे कहा कि किसी भी धर्म से होने के बावजूद सबसे महत्वपूर्ण बात है- आस्था की सच्चाई. एआर रहमान ने कहा, ‘मुझे आस्था की समानता पसंद है. हम अलग-अलग धर्मों का पालन कर सकते हैं, लेकिन आस्था की सच्चाई ही परखी जाती है. वही हमें अच्छे काम करने के लिए प्रेरित करती है. मानवता को उसी से लाभ मिलता है. हम सभी को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध होना चाहिए, क्योंकि जब आध्यात्मिक समृद्धि आती है, तो भौतिक समृद्धि अपने आप आ जाती है.’

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Kamta Prasad

साल 2015 में दैनिक भास्कर से करियर की शुरुआत की. फिर दैनिक जागरण में बतौर टीम लीड काम किया. डिजिटल करियर की शुरुआत आज तक से की और एबीपी, ज़ी न्यूज़, बिज़नेस वर्ल्ड जैसे संस्थानों में काम किया. पिछले 6 सालों से …और पढ़ें

साल 2015 में दैनिक भास्कर से करियर की शुरुआत की. फिर दैनिक जागरण में बतौर टीम लीड काम किया. डिजिटल करियर की शुरुआत आज तक से की और एबीपी, ज़ी न्यूज़, बिज़नेस वर्ल्ड जैसे संस्थानों में काम किया. पिछले 6 सालों से … और पढ़ें

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