नर्मदा नदी में अवैध रेत खनन का मुद्दा फिर से गहरा गया है। एनजीटी ने इस गंभीर पर्यावरणीय उल्लंघन का संज्ञान लिया है। राेके के बावजूद नदी तटों पर रेत माफियाओं का राज बेरोकटोक जारी है।
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NGT रिपोर्ट के अनुसार, बरगी बांध से लेकर नर्मदा नदी के तट तक रेत माफिया बड़े पैमाने पर अवैध खनन कर रहे हैं। ये माफिया आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल कर सीधे नदी के तल से रेत निकाल रहे हैं, जो साफ तौर से पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन है।
इस अवैध व्यापार का केंद्र बने क्षेत्रों में बरगी के बासा पारा, सालीबाड़ा, गौरीघाट के भीटोनी, जामताड़ा और छिवला जैसे इलाके प्रमुख हैं।
एक संयुक्त समिति का गठन दरअसल, गंभीर स्थिति को देखते हुए NGT की केंद्रीय पीठ ने एक संयुक्त समिति का गठन किया था। इस समिति में जबलपुर के कलेक्टर और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि शामिल हैं। समिति को चार सप्ताह के भीतर इस मामले पर एक तथ्यात्मक और प्रामाणिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
इस समिति की रिपोर्ट में बताया है कि अवैध खनन के साथ-साथ नियमों का भी उल्लंघन हो रहा है। नियमों के अनुसार, एक स्थान पर चार ट्रक से अधिक रेत का भंडारण सख्त वर्जित है, लेकिन रेत माफिया खुलेआम बड़ी मात्रा में रेत जमा कर रहे हैं और अनधिकृत डिपो बना रहे हैं।
ग्राम बसा में चलाया संयुक्त अभियान रिपोर्ट में बताया है कि खनिज, राजस्व और पुलिस विभाग ने 4 जुलाई 2025 को ग्राम बसा में एक संयुक्त अभियान चलाया था! इस अभियान में 55 घन मीटर अवैध रूप से भंडारित रेत जब्त की गई। हालांकि, मौके पर कोई व्यक्ति या वाहन नहीं मिला, जिससे इसे लावारिस मानकर जब्त कर लिया गया। हालांकि, अवैध खनन और भंडारण के अन्य मामलों में अभी तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।
वित्तीय वर्ष 2024-25 में अवैध खनिज उत्खनन, भंडारण और परिवहन के 161 मामलों में ₹10,239,413 का जुर्माना वसूला गया, जबकि 2025-26 अगस्त तक में 37 मामलों में ₹5,899,743 का जुर्माना वसूला है।
बता दें जबलपुर कलेक्टर ने इस मामले की जांच के लिए खनिज अधिकारी एके राय को समिति का सदस्य नियुक्त किया था|

