नवादा नगर परिषद ने शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनके आतंक को नियंत्रित करने के लिए एक व्यापक अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत ‘कैच-न्यूटर-रिलीज’ (CNR) पद्धति का उपयोग करते हुए आवारा कुत्तों की नसबंदी और एंटी-रेबीज टीकाकरण किया जाएगा। इसकी शुरुआत नगर क्षेत्र और सदर अस्पताल से हुई है। अभियान के पहले दिन, नगर परिषद की टीम ने डॉग कैचिंग व्हीकल के साथ विभिन्न इलाकों का दौरा किया और लगभग 20 आवारा कुत्तों को पकड़ा। नगर परिषद क्षेत्र के सभी 44 वार्डों में आवारा कुत्तों की निगरानी की जाएगी। इस अभियान के संचालन की जिम्मेदारी मध्यप्रदेश की एजेंसी ‘द केयर ऑफ एनिमल एंड सोसाइटी’ को सौंपी गई है। 10 से 15 हजार आवारा नर और मादा कुत्तों की नसबंदी करना लक्ष्य नगर परिषद के अनुसार, इस अभियान का लक्ष्य शहर में अनुमानित 10 से 15 हजार आवारा नर और मादा कुत्तों की नसबंदी करना है। इसका मुख्य उद्देश्य उनकी बढ़ती आबादी को नियंत्रित करना है। पकड़े गए सभी कुत्तों को एंटी-रेबीज वैक्सीन भी लगाई जाएगी ताकि रेबीज के खतरे को कम किया जा सके। 30 से 35 लोग कुत्तों के काटने के इलाज के लिए पहुंचते नवादा सदर अस्पताल में प्रतिदिन 30 से 35 लोग कुत्तों के काटने के इलाज के लिए पहुंचते हैं, जिनमें बच्चों से जुड़े कई मामले गंभीर होते हैं। नगर परिषद का दावा है कि इस पहल से आवारा कुत्तों के हमलों की घटनाओं में कमी आएगी। यह अभियान सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद शुरू किया गया है, जिसमें कोर्ट ने स्कूल, अस्पताल और रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश दिए थे। पकड़े गए कुत्तों की पहले स्वास्थ्य जांच की जाएगी इस कार्य के लिए नगर परिषद ने बुधौल में एक विशेष श्वान बंध्याकरण केंद्र स्थापित किया है। यहां पकड़े गए कुत्तों की पहले स्वास्थ्य जांच की जाएगी, जिसके बाद उनकी नसबंदी या बंध्याकरण ऑपरेशन किया जाएगा। ऑपरेशन के बाद तीन से पांच दिनों तक उनकी उचित देखभाल की जाएगी और भोजन उपलब्ध कराने के लिए एक रसोइया भी तैनात किया गया है। घाव ठीक होने के बाद इन कुत्तों को उसी इलाके में वापस छोड़ दिया जाएगा, जहां से उन्हें पकड़ा गया था।
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