Sunday, April 12, 2026
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न धर्मेंद्र सा हैंडसम, न अमिताभ सी कद-काठी, गर्लफ्रेंड के चक्कर में बना हीरो, 25 हफ्ते थिएटर से नहीं हटी फिल्में


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3 silver jubilee films of Amol Palekar: एक्टिंग की दुनिया का वो जादूगर अभिनेता, जिसने अपनी सादगी से न सिर्फ लोगों का दिल जीता, बल्कि इंडस्ट्री पर भी धाक जमाई वो कोई और नहीं अमोल पालेकर हैं. जिनकी तीन सिल्वर जुबली हिट्स से बॉक्स ऑफिस पर धूम मचाई थी. वहीं काफी समय तक सिनेमाघरों में लगी रही.

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राजेश खन्ना को देते थे टक्कर

नई दिल्ली. अमिताभ बच्चन, शत्रुघ्न सिन्हा और राजेश खन्ना जैसे एक्टर जब इडंस्ट्री में अपनी धाक जमाए हुए थे. तब एक ऐसे एक्टर ने इंडस्ट्री में एंट्री ली, जिसने एक आम इंसान की जिंदगी को पर्दे पर बड़ी ही खूबसूरती से उकेरा. बॉलीवुड में सादगी भरे हीरो की जो खाली जगह थी, उसे अमोल पालेकर ने भरा. एक्टिंग की दुनिया में उनकी एंट्री के पीछे की कहानी भी काफी दिलचस्प है.

अमोल ने अपने करियर में अ‘छोटी सी बात’, ‘गोलमाल’, ‘रजनीगंधा’, ‘चितचोर’, ‘खामोश’, ‘बातों बातों में’ और ‘रंग बिरंगी’ जैसी कई ऐसी फिल्मों में काम किया है, जिनमें उनके रोल को काफी पसंद किया गया था. थिएटर के अलावा वह वेब सीरीज में भी नजर आ चुके हैं. अमेजन प्राइम की वेब सीरीज ‘फर्जी’ में शाहिद कपूर के दादा का रोल में वह नजर आए थे. उनका मनोज बाजपेयी की फिल्म ‘गुलमोहर’ में भी अहम रोल रहा था.

गर्लफ्रेंड की वजह से बने हीरो

अमोल पालेकर जब एक्टिंग की दुनिया से नहीं जुड़े थे,तब वह बैंक ऑफ इंडिया में क्लर्क के तौर पर काम करते थे.एक्टिंग लाइन में आने की उनकी कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं. खबरों की मानें, तो अमोल पालेकर अपनी गर्लफ्रेंड चित्रा के साथ ज्यादा से ज्यादा वक्त बिताने के लिए थियेटर से जुड़े थे, क्योंकि उनकी गर्लफ्रेंड थियेटर की एक कलाकार थीं.इसी दौरान उनकी मुलाकात सत्यदेव दुबे से हुई, इसके बाद उन्हें नाटक में काम करने का मौका मिला. अमोल पालेकर ने अपने एक इंटरव्यू में भी बताया था कि एक्टिंग उन्होंने सत्यदेव दुबे से सीखी थी. इसके बाद ही उन्होंने अपना फिल्मी करियर शुरू किया था.

सादगी से जीता लोगों का दिल

25 हफ्ते सिनेमाघरों से नहीं हटी थी फिल्में

70 और 80 के दशक में तो अमोल पालेकर ने अपनी धाक जमा रखी थी. उनके सादगी भरे अंदाज को लोग काफी पसंद करते थे. करियर की शुरुआत में ही उनकी हिंदी फिल्में लगातार सिल्वर जुबली हिट साबित हुईं. एक्टिंग की दुनिया में उन्होंने मराठी फिल्म ‘बाजीरावाचा बेटा’ (1969) से कदम रखा था.असली पहचान तो उन्हें साल
1974 में बसु चटर्जी की ‘रजनीगंधा’ से मिली थी. इसके बाद वह छोटी सी बात’ (1975) और ‘चितचोर’ (1976) जैसी फिल्मों ने उन्हें स्टार बना दिया था. उनकी ये तीनों फिल्में ही सिल्वर जुबली हिट साबित हुई थी.उनकी ये फिल्में एक ही शहर में 25 हफ्ते तक लगातार सिनेमाघरों में लगी रही थी.

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Munish Kumar

न्यूज 18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे मुनीष कुमार का डिजिटल मीडिया में 9 सालों का अनुभव है. एंटरटेनमेंट रिपोर्टिंग, लेखन, फिल्म रिव्यू और इंटरव्यू में विशेषज्ञता है. मुनीष ने जामिया मिल्लिया इ…और पढ़ें

न्यूज 18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे मुनीष कुमार का डिजिटल मीडिया में 9 सालों का अनुभव है. एंटरटेनमेंट रिपोर्टिंग, लेखन, फिल्म रिव्यू और इंटरव्यू में विशेषज्ञता है. मुनीष ने जामिया मिल्लिया इ… और पढ़ें

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