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Delhi University Zyber App: दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों ने सोशल नेटवर्किंग की दुनिया में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है. उन्होंने Zyber नाम का एक नया ऐप लॉन्च किया है. जो डेटिंग और फोटो-प्रोफाइल के दौर में एक अलग पहचान बना रहा है. इस ऐप में न तो कोई फोटो अपलोड करने की सुविधा है और न ही डेटिंग का कोई विकल्प. पूरी तरह से सुरक्षा और इंटरेस्ट-बेस्ड नेटवर्किंग पर केंद्रित यह ऐप फिलहाल चुनिंदा कॉलेजों में छात्रों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. क्या बिना चेहरा देखे दोस्ती का यह नया तरीका कैंपस में नया ट्रेंड सेट करेगा?
दिल्ली: दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों और एलुमनाइ द्वारा तैयार किया गया AI-बेस्ड प्लेटफॉर्म Zyber आज के डिजिटल दौर में एक नई सोच के साथ सामने आया है. जहां मौजूदा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे Instagram और facebook यूजर्स को घंटों स्क्रॉलिंग और कंटेंट में उलझाए रखते हैं. वहीं जाइबर का फोकस रियल टाइम बातचीत पर है. इस प्लेटफॉर्म की खासियत यह है कि यहां आप उन लोगों से जुड़ते हैं जो उसी समय बातचीत के लिए उपलब्ध हैं. यानी अब मैसेज करके इंतजार करने की समस्या खत्म यहां तुरंत कनेक्शन और बातचीत संभव है.
कॉमन इंटरेस्ट पर आधारित नेटवर्किंग
फलित सिजारिया फाउंडर ज़ाइबर के कहते हैं की इसकी सबसे बड़ी ताकत इसका इंटरेस्ट बेस्ड कनेक्शन मॉडल है. चाहे आप UPSC की तैयारी कर रहे हों, कॉर्पोरेट करियर की ओर बढ़ रहे हों या थिएटर, डिबेटिंग या फैशन में रुचि रखते हों यह ऐप आपको उन्हीं लोगों से जोड़ता है जिनकी रुचि आपसे मिलती है. दिल्ली यूनिवर्सिटी के कॉलेजों जैसे St. Stephen’s College, Miranda House, SRCC और Hansraj College में इसे फिलहाल सीमित रूप से शुरू किया गया है, ताकि पहले इसकी सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके.
सुरक्षा और भरोसे पर खास जोर
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर जहां फेक प्रोफाइल और सुरक्षा की चिंता रहती है. वहीं जाइबर ने इस पर खास ध्यान दिया है. हर यूजर का मोबाइल OTP और ईमेल वेरिफिकेशन, कॉलेज, कोर्स और वर्ष की जानकारी, कॉलेज टीम द्वारा प्रोफाइल अप्रूवल, कॉल और मीटिंग के बाद रेटिंग सिस्टम, इसके अलावा, यूजर अपनी पहचान को वेरिफाई करने के लिए LinkedIn या अन्य सोशल मीडिया प्रोफाइल भी शेयर कर सकते हैं.
नो फोटो, नो डेटिंग सिर्फ रियल कनेक्शन
जाइबर को खास तौर पर डेटिंग ऐप बनने से बचाने के लिए इसमें प्रोफाइल फोटो नहीं दिखाई जाती. यूजर केवल एक अवतार और प्रोफेशनल डिटेल्स के आधार पर जुड़ते हैं. इसका मकसद है कि लोग एक-दूसरे को लुक्स नहीं, बल्कि इंटरेस्ट और एक्सपीरियंस के आधार पर जानें.
पोस्ट-कोविड अकेलेपन का समाधान
Zyber के फाउंडर के अनुसार कोविड के बाद कॉलेजों में स्टूडेंट्स के बीच नेटवर्किंग और बातचीत काफी कम हो गई है. सीनियर्स और जूनियर्स के बीच का कनेक्शन भी कमजोर पड़ा है. ऐसे में यह प्लेटफॉर्म उस गैप को भरने की कोशिश कर रहा है. जहां छात्र रियल टाइम में नए लोगों से मिल सकें और अपने नेटवर्क को मजबूत बना सकें.
क्या बोले यूजर
ऐप इस्तेमाल कर रही छात्रा के अनुसार Zyber पर बातचीत जजमेंट-फ्री है. यहां लोग प्रोफाइल फोटो देखकर नहीं, बल्कि समान रुचियों के आधार पर जुड़ते हैं. इससे न सिर्फ नए कनेक्शन बनते हैं बल्कि करियर और प्रतियोगिताओं में भी मदद मिलती है. Zyber ऐप फिलहाल चुनिंदा कॉलेजों के छात्रों के लिए उपलब्ध है. इसे App Store और Google Play Store से डाउनलोड किया जा सकता है.
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मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें

