- वसीम का केस इस पूरे ऑपरेशन का क्लासिक उदाहरण है. पाकिस्तान हाई कमीशन की ‘Recruit–Reward–Exploit’ स्ट्रेटेजी के तहत पहले ऐसे लोगों को टारगेट किया जाता है जो कमजोर आर्थिक स्थिति में हों या जिनके रिश्तेदार पाकिस्तान में हों.
- 2022 में जब वसीम ने वीजा के लिए अप्लाई किया, तो पहले उसका वीजा रिजेक्ट कर दिया गया. बाद में उसे सिर्फ 20,000 रुपये की रिश्वत लेकर मंजूरी दी गई. यही उसकी ‘कम्प्रोमाइजिंग पॉइंट’ बन गई. उसके बाद उसे लगातार पैसे ट्रांसफर किए जाने लगे.
- 4 से 5 लाख रुपये उसके बैंक अकाउंट में भेजे गए, कुछ रकम कैश में दी गई. वसीम को पाकिस्तान में ‘कसूर’ बुलाया गया, जहां उसकी ISI अधिकारियों से सीधी मुलाकात हुई.
- वापस आने के बाद वह जाफर के संपर्क में रहा, और भारतीय आर्मी के जवानों की मूवमेंट, फोन नंबर और लोकेशन जैसी जानकारी भेजता रहा. इसके बदले उसे डिजिटल पेमेंट और नकद इनाम मिलते रहे.
‘वीजा करप्शन’ के नाम पर जासूसी का नेटवर्क
रिपोर्ट के मुताबिक, पाक हाई कमीशन के कर्मचारी वीजा करप्शन को ही जासूसी का एंट्री पॉइंट बना चुके हैं. वीजा प्रक्रिया के दौरान रिश्वत और लेन-देन के जरिये लोगों को धीरे-धीरे अपने कब्जे में लिया जाता है.
यह ऑपरेशन खासतौर पर हरियाणा के नूह, पलवल और पंजाब के मलेरकोटला जैसे इलाकों में सक्रिय है, जहां भारत-पाक रिश्तों की वजह से कुछ परिवारों के रिश्तेदार पाकिस्तान में रहते हैं. इन्हीं ‘फैमिली वीजा’ की आड़ में ISI अपने एजेंट भर्ती करती है.
ISI के ‘डिजिटल हैंडलर’, व्हाट्सएप और UPI से चल रहा स्पाई नेटवर्क
जांच में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तानी अफसर अपने लोकल एजेंट्स से संपर्क के लिए व्हाट्सएप, डिजिटल पेमेंट और फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल करते हैं. पैसों का लेन-देन अब ‘UPI’ और डिजिटल वॉलेट्स से होता है, जिससे ट्रेस करना मुश्किल हो जाता है.
इंटेलिजेंस एजेंसियों की बड़ी कार्रवाई
वसीम अकरम की गिरफ्तारी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क की पहचान है. इंटेलिजेंस एजेंसियों का मानना है कि पाक हाई कमीशन की वीजा डेस्क को ISI ने संस्थागत तौर पर जासूसी हब बना दिया है. इस रणनीति को पाकिस्तान की ‘Hybrid Espionage Strategy’ कहा जा रहा है. भावनात्मक रिश्ता, पैसों का लालच और डिजिटल हेरफेर, तीनों को एक साथ इस्तेमाल किया जाता है.
भारत की सख्त चेतावनी, अब नहीं चलेगी कूटनीति की आड़ में जासूसी
भारत सरकार अब इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की तैयारी में है. सूत्रों के मुताबिक, जल्द ही पाकिस्तान हाई कमीशन के कुछ और अधिकारियों को भी देश छोड़ने के आदेश दिए जा सकते हैं. यह मामला सिर्फ एक जासूसी नेटवर्क का नहीं, बल्कि पाकिस्तान द्वारा लगातार भारतीय लोकतंत्र और सुरक्षा ढांचे में सेंध लगाने की कोशिशों का सबूत है.

