सेंट पीटर्सबर्ग22 घंटे पहले
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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 4 जून को सेंट पीटर्सबर्ग में एक कार्यक्रम के दौरान।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत को सुखोई SU-57 स्टेल्थ फाइटर जेट को लेकर बड़ा ऑफर दिया है। उन्होंने कहा है कि रूस, भारत के साथ मिलकर इस विमान का विकास और उत्पादन करने के लिए तैयार है। साथ ही रूस जरूरी रक्षा तकनीकें साझा करने के लिए भी तैयार है।
पुतिन ने गुरुवार को सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम के दौरान अंतरराष्ट्रीय मीडिया से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि पहले भी भारत को इसे बनाने के प्रोजेक्ट में साझेदार बनने का ऑफर दिया था। उस समय भारत ने कहा था कि रूस पहले इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाए, उसके बाद भारत इसमें शामिल होने पर विचार करेगा।
पुतिन ने कहा-
यह विमान हमारा जॉइंट प्रोजेक्ट हो सकता था। हमने इसे अपने दम पर विकसित किया, लेकिन अब भी हम भारत के साथ इस क्षेत्र में काम करने के लिए तैयार हैं। हम भारत को यह विमान देने और इसके आगे के विकास में साझेदारी करने के लिए तैयार हैं। इसमें हमें कोई समस्या नजर नहीं आती। यही बात एयर डिफेंस सिस्टम पर भी लागू होती है।

पुतिन ने अमेरिका-भारत के संबंधों पर कहा कि US कई मुद्दों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इस तरह की कोशिशें बेकार हैं। भारत इसका विरोध करेगा।

पुतिन ने गुरुवार को PTI समेत दुनिया की प्रमुख न्यूज एजेंसियों के हेड से बातचीत की।
पुतिन बोले- SU-57 दुनिया का सबसे अच्छे फाइटर जेट्स में से एक
पुतिन ने सुखोई SU-57 की तारीफ करते हुए कहा कि यह पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान है और उनकी नजर में दुनिया के सबसे अच्छे फाइटर जेट्स में से एक है। इसमें स्टेल्थ क्षमता, उच्च गतिशीलता, आधुनिक एवियोनिक्स और मल्टी-रोल कॉम्बैट क्षमताएं हैं।
सुखोई SU-57 हवा, जमीन और समुद्री लक्ष्यों पर हमला करने में सक्षम है। दुनिया में कुछ ही पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान हैं जिनमें SU-5 के साथ चीन का J-35 और अमेरिका के F-35 शामिल हैं।
भारतीय वायुसेना (IAF) के बेड़े में इस समय सबसे एडवांस जनरेशन का फाइटर जेट फ्रांसीसी मूल का राफेल है। इसे तकनीकी रूप से 4.5 जनरेशन का लड़ाकू विमान माना जाता है।

भारत ने सुखोई प्रोजेक्ट से जुड़ने का ऑफर ठुकराया था
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस ने भारत को 2018 के आसपास सुखोई प्रोजेक्ट में शामिल होने का प्रस्ताव दिया गया था, उस समय भारत ने SU-57 प्रोजेक्ट में रुचि दिखाई थी, लेकिन भारतीय वायुसेना का मानना था कि यह विमान उसकी सभी जरूरतों को पूरा नहीं करता।
उस दौर की कई रिपोर्टों में दावा किया गया था कि वायुसेना इसकी स्टेल्थ क्षमताओं से पूरी तरह संतुष्ट नहीं थी। इसके अलावा तकनीक हस्तांतरण (टेक्नोलॉजी ट्रांसफर) को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच मतभेद थे।
गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पिछले वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्हाइट हाउस यात्रा के दौरान भारत को एफ-35 की पेशकश की थी। अब पुतिन के नए प्रस्ताव के बाद माना जा रहा है कि रूस इन पुरानी चिंताओं को दूर करने की कोशिश कर रहा है।
पुतिन बोले- रूस, भारत-चीन के रिश्तों में दखल नहीं देगा
पुतिन ने कहा है कि भारत और चीन के रिश्ते बेहद संवेदनशील और जटिल हैं, इसलिए रूस उनमें दखल नहीं देना चाहता। उन्होंने भरोसा जताया कि मोदी और जिनपिंग बातचीत के जरिए सीमा विवाद समेत सभी अहम मुद्दों का समाधान निकाल सकते हैं। उन्होंने कहा,
भारत और चीन के साथ रूस के रिश्ते अलग-अलग और स्वतंत्र हैं। भारत के साथ रूस की दोस्ती से चीन को कोई परेशानी नहीं होती और चीन के साथ रूस के करीबी संबंधों से भारत के साथ उसके रिश्तों पर भी कोई असर नहीं पड़ता।

रूसी राष्ट्रपति ने भारत, रूस और चीन के त्रिपक्षीय मंच (RIC) का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक समय उन्होंने भारत और चीन के नेताओं को रूस में एक साथ मिलने का सुझाव दिया था, जिसके बाद यह मंच बना। बाद में इसी तरह के सहयोग ने ब्रिक्स जैसे बड़े समूह की नींव रखने में भी मदद की।

पाकिस्तान से भारत के रिश्तों पर भी बोले
पुतिन ने भारत-पाकिस्तान संबंधों पर भी पुतिन ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि रूस भारत और पाकिस्तान के बीच मौजूद मुश्किल मुद्दों को समझता है। हालांकि उन्होंने इस पर ज्यादा विस्तार से बात नहीं की।
जब उनसे पूछा गया कि क्या पाकिस्तान चीन के प्रभाव में है, तो पुतिन ने इससे सहमति नहीं जताई। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान एक बड़ा देश है और उसके कई देशों के साथ अलग-अलग तरह के संबंध हैं। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि पाकिस्तान के लिए चीन के साथ सहयोग काफी महत्वपूर्ण है।

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