आरोपी युवक नीतेश पिता रोशन सिंह गुर्जर की फाइल फोटो।
भिंड में पुलिस आरक्षक परीक्षा 2023 में चयनित एक युवक के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। आरोपी ने अपनी जगह परीक्षा सॉल्वर बैठाया था। जब पुलिस अधीक्षक कार्यालय में ज्वॉइनिंग के लिए दस्तावेज जांचे गए, तब ये फर्जीवाड़ा सामने आया। कोतवाली पुलिस
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पुलिस भर्ती 2023 के तहत चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों के वेरिफिकेशन के लिए बुलाए गए थे। कुल 68 आरक्षक भिंड जिले को मिले थे, जिनमें 45 पुरुष और 23 महिला आरक्षक शामिल थे। टीआई प्रवीण सिंह चौहान ने वेरिफिकेशन के दौरान बधपुरा, तहसील जौरा निवासी नीतेश पिता रोशन सिंह गुर्जर का बायोमेट्रिक फिंगर प्रिंट सील हो गया। बायोमेट्रिक सेंसर प्रतिक्रिया न देने पर पुलिस सतर्क हो गई और जांच के लिए थाने को रिफर कर दिया गया।
अलग-अलग फोटो और पहचान पत्रों से हुआ खुलासा पासपोर्ट साइज फोटो, आधार कार्ड और अन्य पहचान पत्रों की जांच में पता चला कि लिखित परीक्षा और फिजिकल टेस्ट में नीतेश ने अलग-अलग पहचान पत्र और फोटो का इस्तेमाल किया था। इससे साफ हो गया कि उसने अपनी जगह सॉल्वर के जरिए परीक्षा पास की थी।
सॉल्वर के जरिए कराई परीक्षा, एडिट किए दस्तावेज जांच में पुलिस ने पाया कि नीतेश ने 12 अगस्त 2023 को परीक्षा केंद्र पर अपनी जगह किसी अन्य व्यक्ति (सॉल्वर) को बैठाकर प्रश्नपत्र हल करवाए थे। इस दौरान फोटो और आधार कार्ड को एडिट या बदलकर प्रॉक्सिमिटी चेक और बायोमेट्रिक पहचान छुपाने की कोशिश की। जब फिंगरप्रिंट सील होने पर असली अभ्यर्थी की उपस्थिति की पुष्टि नहीं हो सकी, तो सॉल्वर की पहचान जांच में आई।
परीक्षा अधिनियम के तहत मामला दर्ज जांच अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर थाने में नीतेश के खिलाफ परीक्षा अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया। मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
एसपी कार्यालय में हो रही जांच पुलिस अधीक्षक कार्यालय के अधिकारी भी इस मामले की तह तक जांच कर रहे हैं कि नीतेश ने किन परिस्थितियों में दस्तावेजों का घालमेल करके फर्जी तौर पर आरक्षक की भर्ती पाई।
68 आरक्षकों के दस्तावेजों का हुआ वेरिफिकेशन भिंड जिले को मिले 68 आरक्षकों (45 पुरुष व 23 महिला) के दस्तावेजों की वेरिफिकेशन टीम टीआई प्रवीण सिंह चौहान की अध्यक्षता में कुछ दिन पहले ही पूरी की गई थी। चयनित अभ्यर्थियों के फोटो, हस्ताक्षर, आधार कार्ड, एससी/एसटी प्रमाणपत्र (यदि लागू हो), आयु प्रमाण पत्र, शैक्षिक योग्यता के प्रमाणपत्र तथा अन्य आवश्यक दस्तावेजों की वेरिफिकेशन पर विशेष ध्यान दिया गया।
बायोमेट्रिक स्कैनिंग से सुनिश्चित की जा रही पारदर्शिता टीआई चौहान ने बताया कि प्रत्येक अभ्यर्थी की पहचान की पुष्टि के लिए बायोमेट्रिक स्कैनिंग कराई गई थी। फिंगरप्रिंट में गड़बड़ी दिखने पर थाने को जल्दी सौंपने की जरूरत पड़ी, जिसके बाद मामले का पता चला। इस प्रकार की जांच व्यवस्था से ये सुनिश्चित किया जाता है कि भर्तियों में पारदर्शिता बनी रहे और योग्य उम्मीदवारों को ही मौका मिले।

