Tuesday, June 9, 2026
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पैसा सिर्फ स्मॉल कैप में बनेगा, वरना कहीं कोई उम्मीद नहीं, शंकर शर्मा ने क्यों कही यह बात?


नई दिल्ली. शेयर मार्केट पर अपनी सधी हुई राय रखने के लिए मशहूर इन्वेस्टर शंकर शर्मा ने भारतीय शेयर बाजार, अर्थव्यवस्था, म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री और विदेशी निवेशकों के रुख को लेकर कई ऐसी बातें कही हैं जिन्होंने निवेशकों का ध्यान खींच लिया है. उनका मानना है कि दुनिया के कई बड़े बाजार जहां रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच रहे हैं, वहीं भारतीय बाजार अपेक्षाकृत कमजोर दिखाई दे रहा है. शर्मा का कहना है कि बाजार अक्सर आने वाली चुनौतियों को पहले पहचान लेता है और मौजूदा स्थिति भी कुछ ऐसा ही संकेत दे रही है. उन्होंने कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, रुपये पर दबाव और घरेलू निवेशकों के बढ़ते जोखिम जैसे मुद्दों को लेकर चिंता जताई है. हालांकि, इसी बातचीत में उन्होंने यह भी बताया कि मौजूदा माहौल में उन्हें सबसे ज्यादा अवसर कहां दिखाई दे रहे हैं और किन हिस्सों में निवेशकों को सावधान रहने की जरूरत है.

शंकर शर्मा के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में दुनिया के कई बड़े बाजारों में मजबूत तेजी देखने को मिली है. अमेरिका, यूरोप, जापान और लैटिन अमेरिका तक में निवेशकों ने शानदार रिटर्न कमाए हैं. लेकिन भारतीय बाजार का प्रदर्शन उस तरह का नहीं रहा जिसकी कई लोगों को उम्मीद थी. उनका मानना है कि इतिहास में जब भी बड़ी मंदी आई, भारत ने दुनिया के साथ गिरावट देखी और बाद में दुनिया के साथ ही रिकवरी भी की. इस बार तस्वीर अलग दिखाई दे रही है. उनके अनुसार, वैश्विक बाजारों की तेजी के बावजूद भारतीय बाजार में निवेशकों का भरोसा पहले जैसा मजबूत नहीं दिख रहा.

कच्चा तेल और ईरान संकट क्यों बढ़ा रहे चिंता

शर्मा का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव भारत के लिए सिर्फ एक भू-राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि आर्थिक चुनौती भी है. भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है. ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे महंगाई और व्यापार संतुलन पर पड़ता है. उनके अनुसार, यदि तेल लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बना रहता है तो इससे भुगतान संतुलन पर दबाव बढ़ सकता है. यही कारण है कि निवेशक केवल शेयर बाजार ही नहीं बल्कि तेल बाजार पर भी बारीकी से नजर रख रहे हैं.

एफआईआई क्यों बेच रहे हैं भारतीय शेयर

शंकर शर्मा का कहना है कि विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय बाजार को पहले की तुलना में ज्यादा महंगा मान रहे हैं. कई कंपनियों के वैल्यूएशन ऐसे स्तर पर पहुंच गए हैं जहां ग्रोथ और कीमत के बीच संतुलन कमजोर दिखाई देता है. उनके मुताबिक, जब किसी बाजार में वैल्यूएशन बहुत ऊंचे हो जाएं और ग्रोथ उतनी तेज न हो तो बड़े वैश्विक निवेशक वैकल्पिक बाजारों की तरफ रुख कर सकते हैं. यही वजह है कि हाल के समय में विदेशी निवेशकों की बिकवाली चर्चा का विषय बनी हुई है.

म्यूचुअल फंड और एसआईपी पर बड़ा सवाल

इंटरव्यू के दौरान शर्मा ने घरेलू निवेश के बढ़ते प्रवाह पर भी सवाल उठाए. उनका कहना है कि बड़ी मात्रा में आने वाला एसआईपी का पैसा बाजार को सपोर्ट जरूर दे रहा है, लेकिन निवेशकों को केवल इस भरोसे पर नहीं रहना चाहिए कि बाजार हमेशा ऊपर ही जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि निवेशकों को हर निवेश उत्पाद को समझकर पैसा लगाना चाहिए और सिर्फ लोकप्रियता के आधार पर फैसले नहीं लेने चाहिए.

कंजम्पशन सेक्टर पर क्यों जताई चिंता

शर्मा का मानना है कि महंगाई का सबसे बड़ा असर आम उपभोक्ता पर पड़ता है. यदि रोजमर्रा की लागत बढ़ती है तो लोगों की खर्च करने की क्षमता प्रभावित होती है. ऐसी स्थिति में ऑटोमोबाइल, रिटेल, एफएमसीजी और अन्य उपभोक्ता आधारित सेक्टर दबाव में आ सकते हैं. उनका कहना है कि वर्तमान समय में निवेशकों को यह समझना होगा कि उपभोग आधारित ग्रोथ हमेशा एक जैसी नहीं रहती.

स्मॉल कैप में क्यों दिख रहा मौका

कई चेतावनियों के बीच शंकर शर्मा ने एक बड़ा अवसर भी बताया. उनका कहना है कि भारतीय बाजार अब पूरी तरह स्टॉक आधारित बाजार बन चुका है. सिर्फ इंडेक्स देखकर निवेश करने का दौर कमजोर पड़ रहा है. उनके मुताबिक, चुनिंदा स्मॉल कैप कंपनियों में अभी भी ग्रोथ की मजबूत संभावनाएं मौजूद हैं. उन्होंने दावा किया कि उन्होंने गिरावट के दौरान कई स्मॉल कैप शेयरों में निवेश किया और वहां उन्हें अच्छा रिटर्न मिला है. हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि स्मॉल कैप में निवेश आसान नहीं है. यहां सही कंपनी चुनना सबसे बड़ी चुनौती होती है. इसलिए निवेशकों को केवल किसी नाम या ट्रेंड के पीछे भागने के बजाय कंपनी के बिजनेस, बैलेंस शीट और भविष्य की संभावनाओं को समझकर फैसला लेना चाहिए.

निवेशकों के लिए संदेश

शंकर शर्मा की राय बाजार की मुख्यधारा सोच से अलग हो सकती है, लेकिन उनका संदेश साफ है. मौजूदा दौर में केवल इंडेक्स, एसआईपी या लोकप्रिय शेयरों पर भरोसा करना पर्याप्त नहीं होगा. निवेशकों को वैल्यूएशन, वैश्विक हालात, तेल की कीमतों और कंपनी की वास्तविक स्थिति को समझकर ही निवेश करना चाहिए. आने वाले समय में अवसर भी होंगे और जोखिम भी, लेकिन दोनों की पहचान करना ही सफल निवेश की असली कुंजी होगी.



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