वैश्विक मंच पर बिहार के पर्यावरण प्रेमियों और युवा वैज्ञानिकों ने एक बार फिर अपनी धाक जमाई है। दुनिया के सबसे बड़े नागरिक विज्ञान उत्सव ‘सिटी नेचर चैलेंज 2026’ के परिणाम घोषित हो गए हैं, जिसमें बिहार ने रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन किया है। इस वैश्विक प्रतियोगिता में बिहार से 1,665 अवलोकन दर्ज किए गए, जिनमें 543 से अधिक अनूठी प्रजातियों की पहचान की गई है। इस वर्ष के वैश्विक आयोजन में दुनिया के 61 देशों से 30 लाख से अधिक अवलोकन और 76,000 से अधिक प्रजातियों को रिकॉर्ड किया गया। इस महाकुंभ में भारत के कई राज्यों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिसमें बिहार की भागीदारी बेहद खास और उत्साहजनक रही। राजगीर रहा सबसे आगे, कैमूर और भागलपुर ने भी दिखाया दम बिहार में इस अभियान का नेतृत्व मुख्य रूप से राजगीर, गोरारी, भागलपुर और कैमूर जैसे क्षेत्रों ने किया। ऐतिहासिक और प्राकृतिक रूप से समृद्ध राजगीर ने राज्य में सबसे बेहतर प्रदर्शन करते हुए सर्वाधिक अवलोकन और प्रजातियों के रिकॉर्ड दर्ज कराए। वहीं कैमूर के जंगलों और भागलपुर के गांगेय क्षेत्रों से भी दुर्लभ वनस्पतियों और जीव-जंतुओं की तस्वीरें आईनेचुरलिस्ट (iNaturalist) ऐप पर साझा की गईं। तीन सालों में दिखा अभूतपूर्व उछाल वन्यजीव विशेषज्ञ राहुल कुमार ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में बिहार से जैव विविधता के दस्तावेजीकरण में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है। यह डिजिटल डेटा न केवल शोधकर्ताओं के लिए मददगार साबित होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की योजनाओं को बनाने में भी मील का पत्थर साबित होगा। विज्ञान और प्रकृति संरक्षण से जोड़ना मुख्य लक्ष्य यह एक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता है, जहां आम नागरिक अपने आस-पास पाए जाने वाले पौधों, कीड़े-मकोड़ों, पक्षियों और जानवरों की तस्वीरें खींचकर ‘आईनेचुरलिस्ट’ ऐप पर अपलोड करते हैं। इसका उद्देश्य आम जनता को विज्ञान और प्रकृति संरक्षण से जोड़ना है। युवाओं की भागीदारी से सुधरेगा भविष्य इस सफलता पर पर्यावरणविदों का कहना है कि बिहार के ग्रामीण और शहरी इलाकों से आए ये आंकड़े यह साबित करते हैं कि हमारे युवाओं में प्रकृति के प्रति जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। सामुदायिक भागीदारी और युवाओं का यह प्रयास आने वाले समय में बिहार को पर्यावरण संरक्षण के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में खड़ा करेगा।
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