कमिश्नरेट कानपुर की ओर से चलाए जा रहे ऑपरेशन महाकाल के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने वरिष्ठ एडवोकेट साकेत नगर निवासी अखिलेश दुबे को भाजपा नेता पर झूठी रेप की एफआईआर करा कर रंगदारी मांगने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद गिरफ्तार कर लिया।अखि
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रिपोर्ट वापस लेने के नाम पर मांगी थी 50 लाख रुपए
भाजपा नेता पर बर्रा थाने में एक युवती ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मामले में पुलिस ने साक्ष्य न पाए जाने पर मामला स्पंज कर दिया था। भाजपा नेता ने आरोप लगाया था कि अखिलेश दुबे और उसके साथियों ने रिपोर्ट वापस लेने के लिए 50 लाख की रंगदारी मांगी। मामले में एसआईटी की जांच में आरोप सही साबित पाए जाने पर बर्रा थाने में पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया। डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी ने प्रेस कांफ्रेस कर घटना की जानकारी दी।
जांच के लिए मार्च 2025 में SIT को हुआ था गठन
डीसीपी दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि सांसद अशोक कुमार रावत ने बीते दिनों पुलिस कमिश्नर को एक पत्र लिखते हुए बताया कि शहर में कुछ लोग संगठित गिरोह बना कर लोगों पर झूठे मुकदमे दर्ज करवा कर लोगों से अवैध उगाही कर रहे हैं। इसके बाद मामले की जांच के लिए 3 मार्च 2025 को एक एसआईटी का गठन किया गया, जिसका इंचार्ज डीसीपी क्राइम को बनाया गया।
भाजपा नेता के खिलाफ दर्ज कराया था झूठा मुकदमा
इसी दौरान भाजपा नेता बर्रा निवासी रवि सतीजा ने शिकायत करते हुए बताया कि उनसे 50 लाख रुपए वसूली करने के उद्देश्य से बर्रा थाने में झूठा रेप का मुकदमा दर्ज कराया गया है। इसमें कुछ लोगों के नाम दिए गए। मामले की जांच में भाजपा नेता के आरोप सही पाए गए। इसके बाद बुधवार को रवि सतीजा की तहरीर पर अखिलेश दुबे, निशा कुमारी, गीता कुमारी, विमल यादव, अभिषेक बाजपेई, शैलेंद्र यादव उर्फ टोनू यादव, लवी मिश्रा व अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई। पूछताछ के लिए अखिलेश दुबे व उसके साथी लवी को थाने बुलाया गया। उनके द्वारा साक्ष्य प्रस्तुत न किए जाने पर दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। अन्य की तलाश की जा रही है।
एसआईटी की जांच में शामिल नहीं हुई पीड़िता
डीसीपी के मुताबिक, एसआईटी ने मामले की जांच शुरू की तो रवि सतीजा पर रेप की रिपोर्ट दर्ज कराने वाली किशोरी की बहन व पीड़िता को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया। हालांकि दोनों नहीं आईं। फिलहाल दोनों फरार हैं।

