मुंगेर में वर्ष 2020 के दुर्गा प्रतिमा विसर्जन गोलीकांड में नया मोड़ आया है। इस मामले में पांच साल बाद सीआईडी ने दोबारा जांच शुरू की है, जिसमें श्रद्धालु अनुराग पोद्दार की मौत हुई थी। सीआईडी की विशेष जांच टीम ने वर्ष 2022 में ही इस मामले में हाईकोर्ट में अंतिम रिपोर्ट सौंप दी थी। इसके बावजूद दोबारा जांच शुरू होने पर सवाल उठ रहे हैं। मामले में अब तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। अग्रतर अनुसंधान के तहत, डीएसपी सीआईडी और अनुसंधानकर्ता फैजल ने मृतक अनुराग पोद्दार के पिता अमरनाथ पोद्दार (जो मामले के सूचक हैं), उनकी मां और बहन के बयान दोबारा दर्ज किए। पूछताछ के दौरान, तीनों से मुख्य रूप से यह जानकारी ली गई कि अनुराग दाएं हाथ से काम करता था या बाएं हाथ से। इससे पहले, वरीय डीएसपी सीआईडी सत्यकाम ने गवाह गौरव कुमार को नोटिस जारी कर 7 जुलाई 2026 को सीआईडी मुख्यालय पटना बुलाया था और उनका भी बयान दोबारा दर्ज किया था। HC की निगरानी में जांच टीम गठित की गई थी मानवाधिकार मामलों से जुड़े अधिवक्ता ओम प्रकाश पोद्दार के अनुसार, हाईकोर्ट के तत्कालीन न्यायाधीश राजीव रंजन के निर्देश पर कोतवाली थाना में कांड संख्या 311/2020 दर्ज किया गया था। इसके बाद हाईकोर्ट की निगरानी में सीआईडी की विशेष जांच टीम गठित की गई थी। टीम ने लगभग 15 महीने तक विभिन्न पहलुओं पर जांच की और 12 जुलाई 2022 को हाईकोर्ट में अंतिम जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की। अधिवक्ता ने बताया कि जांच के दौरान सीआईडी की कार्यप्रणाली को लेकर हाईकोर्ट ने कई बार नाराजगी भी जताई थी। एमिकस क्यूरी की नियुक्ति के बाद भी नहीं शुरू हुई सुनवाई अधिवक्ता ओम प्रकाश पोद्दार के मुताबिक 3 अगस्त 2022 को हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई में सहयोग के लिए अधिवक्ता प्रतीक मिश्रा को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया था। कोर्ट ने बीएएलएसए को निर्धारित राशि प्रत्येक माह एमिकस क्यूरी को देने का निर्देश भी दिया था। एमिकस क्यूरी की ओर से कुछ बिंदुओं पर आगे जांच के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद सीआईडी टीम ने उन बिंदुओं पर भी जांच कर वर्ष 2022 में ही दोबारा अंतिम जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट में प्रस्तुत कर दी थी। इसके बावजूद मामले में सुनवाई की तारीखें निर्धारित होती रहीं। अधिवक्ता के अनुसार तीन वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी मामले की सुनवाई शुरू नहीं हो सकी है। पिछली सुनवाई की तिथि 14 अगस्त 2026 निर्धारित थी। अंतिम रिपोर्ट के बाद अग्रतर अनुसंधान पर उठ रहे सवाल
सीआईडी द्वारा अंतिम जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के तीन वर्ष से अधिक समय बाद अब अग्रतर अनुसंधान किए जाने को लेकर मृतक के परिजनों और मामले से जुड़े लोगों के बीच सवाल उठ रहे हैं। हालांकि यह अनुसंधान किस आदेश के आधार पर शुरू किया गया है, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
मृतक के पिता अमरनाथ पोद्दार और अधिवक्ता ओम प्रकाश पोद्दार पूर्व में सीआईडी की जांच पर सवाल उठाते हुए पक्षपातपूर्ण अनुसंधान और गवाहों को परेशान किए जाने के आरोप लगा चुके हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
जानें, क्या है पूरा मामला…
26 अक्टूबर 2020 को मुंगेर में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान पुलिस फायरिंग में श्रद्धालु अनुराग पोद्दार की मौत हो गई थी। घटना में कई अन्य श्रद्धालुओं के घायल होने की भी बात सामने आई थी। घटना के दो दिन बाद विधानसभा चुनाव होना था। उस समय मुंगेर की एसपी लिपि सिंह थीं। घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई और फायरिंग को लेकर व्यापक विवाद हुआ था।
परिजनों की ओर से आरोप लगाया गया था कि पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर फायरिंग की गई। मामले की जांच में तत्कालीन पुलिस अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष आना बाकी है।
चुनाव आयोग ने डीएम-एसपी को हटाया था
घटना के बाद चुनाव आयोग ने तत्कालीन डीएम और एसपी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें मुंगेर से हटा दिया था। इसके बाद भी मामले को लेकर विवाद बना रहा। पुलिस कार्रवाई और प्रशासनिक भूमिका की जांच की मांग लगातार उठती रही।
हाईकोर्ट की निगरानी में हुई थी जांच
मामले में साक्ष्य नष्ट करने और पक्षपातपूर्ण जांच के आरोप भी लगाए गए थे। हाईकोर्ट के आदेश के बाद तत्कालीन एसपी मानवजीत सिंह ढिल्लों समेत कुछ पुलिस अधिकारियों और थानाध्यक्ष के स्थानांतरण की कार्रवाई हुई थी। हालांकि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई नहीं होने का मुद्दा भी उठता रहा है। अब पांच वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद सीआईडी द्वारा फिर से गवाहों और मृतक के परिजनों से पूछताछ किए जाने से मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब वर्ष 2022 में जांच पूरी कर अंतिम रिपोर्ट हाईकोर्ट में सौंप दी गई थी, तो अब अग्रतर अनुसंधान किस आदेश के तहत और किन नए तथ्यों के आधार पर किया जा रहा है। मामले की अगली कार्रवाई और हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई से ही इसकी स्थिति स्पष्ट होगी।
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