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1990 का दशक बॉलीवुड के इतिहास का सबसे उथल-पुथल भरा समय रहा. इंडस्ट्री के कई बड़े नामों ने उस दौर में लगातार डर के साये में जीने की बात कही है. उस दौर की सबसे डरावनी घटना थी टी-सीरीज के संस्थापक गुलशन कुमार की दिनदहाड़े हत्या, जिन्हें गैंगस्टरों ने गोली मार दी थी.राम गोपाल वर्मा का कहना है कि दाऊद इब्राहिम ने ‘सत्या’ और ‘कंपनी’ जैसी फिल्मों को प्रेरित किया और वे मानते हैं कि वे गैंगस्टर की वजह से अपनी रोजी-रोटी कमा रहे हैं.
राम गोपाल ने गैंगस्टर्स और फिल्म पर किताब लिखी है.
मुंबई. 1990 के दशक का हिंदी फिल्म इंडस्ट्री एक ऐसे साये में काम करता था, जिसे आज बहुत कम लोग पूरी तरह समझ सकते हैं. उस दौर में अंडरवर्ल्ड का बॉलीवुड पर दबदबा सिर्फ फुसफुसाहटों तक सीमित नहीं था, बल्कि इंडस्ट्री के अंदर के लोग भी इसे खुलकर स्वीकार करते थे. कई एक्टर्स, प्रोड्यूसर्स और डायरेक्टर्स अब तक धमकी भरे फोन कॉल, वसूली की मांग और कई बार विरोध करने पर खौफनाक अंजाम के बारे में बात कर चुके हैं. फिर भी, फिल्मकार राम गोपाल वर्मा का अनुभव इससे बिल्कुल अलग रहा.
राम गोपाल वर्मा ने अपनी आत्मकथा ‘गन्स एंड थाईज’ के बारे में बात करते हुए बताया कि उन्होंने यह किताब दाऊद इब्राहिम को डेडिकेट की थी, लेकिन बाद में पब्लिशर्स ने उनका नाम हटा दिया. उन्होंने कहा, “मैंने किताब दाऊद इब्राहिम को भी समर्पित की थी, लेकिन प्रकाशकों ने उनका नाम हटा दिया. अगर दाऊद इब्राहिम नहीं होते, तो मैं ‘सत्या’ और ‘कंपनी’ जैसी दो आइकॉनिक फिल्में नहीं बना पाता. मैं उन्हें समर्पित क्यों न करूं? मैं उनकी वजह से अपनी रोजी-रोटी कमा रहा हूं.”
राम गोपाल वर्मा के लिए अंडरवर्ल्ड सिर्फ एक डर का कारण नहीं था, बल्कि उनकी सबसे चर्चित फिल्मों के लिए रचनात्मक प्रेरणा भी था. जहां इंडस्ट्री के कई लोगों ने गैंगस्टर्स से डरावने एक्सपीरिएंस शेयर किए हैं, राम गोपाल वर्मा का कहना है कि उन्हें कभी ऐसी कोई धमकी नहीं मिली. उन्होंने कहा, “मैं अकेला था जिसे कभी धमकी भरे कॉल नहीं आए, क्योंकि उन्हें ‘सत्या’ और ‘कंपनी’ बहुत पसंद आई थी. वे मुझे परेशान नहीं करना चाहते थे. मैं उनके लिए जैसे आत्मीय बन गया था.”
बता दें, यह दोनों फिल्में, जिन्हें क्राइम ड्रामा की केटेगरी में मील का पत्थर माना जाता है, मुंबई के अंडरवर्ल्ड की सच्चाई से इंस्पायर थीं. बॉलीवुड और अंडरवर्ल्ड के रिश्ते पर लंबे समय से बहस होती रही है. मुंबई पुलिस के पूर्व अधिकारी डी. शिवानंदन ने पहले कहा था कि गैंगस्टर जीवन पर बनी कई फिल्मों को उन्हीं लोगों ने फंड किया, जिनकी कहानी दिखाई गई.
राम गोपाल वर्मा ने दावा किया कि ‘सत्या’, ‘कंपनी’, ‘शूटआउट एट वडाला’ और ‘शूटआउट एट लोखंडवाला’ जैसी फिल्मों को गैंगस्टरों ने फाइनेंस किया और इन फिल्मों ने कहीं न कहीं उनकी छवि को बदलने या नरम करने में मदद की. उन्होंने यह भी कहा कि ‘दीवार’ और ‘मुकद्दर का सिकंदर’ जैसी पुरानी फिल्मों को भी इसी तरह का सपोर्ट मिला था.
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रमेश कुमार, सितंबर 2021 से न्यूज 18 हिंदी डिजिटल से जुड़े हैं. इससे पहले एबीपी न्यूज, हिंदीरश (पिंकविला), हरिभूमि, यूनीवार्ता (UNI) और नेशनल दुनिया में काम कर चुके हैं. एंटरटेनमेंट, एजुकेशन और पॉलिटिक्स में रूच…और पढ़ें

