Tuesday, June 2, 2026
Homeफूडयहां चाय पर चर्चा नहीं चुगली की जाती है, नाम है 'चुगलखोर...

यहां चाय पर चर्चा नहीं चुगली की जाती है, नाम है ‘चुगलखोर चाय’! पीतल का बर्तन, 7 मसाले, गुलाब की पत्ती, हर घूंट वाह


Last Updated:

Ranchi Famous Chugalkhor Chai: रांची के मोरहाबादी में भारती चाय, का स्टॉल लगाती हैं जिसका ना केवल स्वाद बल्कि नाम भी यूनिक है. यह है चुगलखोर चाय जो अपने यूनिक नाम और टेस्ट के लिए मशहूर है. भारती पीतल के बर्तन में गुलाब और मसालों से चाय बनाती हैं, रोज 1500 कप तक बिकते हैं.

ख़बरें फटाफट

रांची. ठंड के दिनों में अधिकतर चाय के स्टॉलों पर काफी भीड़ देखने को मिलती है. लेकिन इन्हीं में से कुछ स्टॉल अपने यूनिक नाम और स्वाद की वजह से अलग पहचान बना लेते हैं. रांची के मोरहाबादी में खासतौर पर “चुगलखोर चाय” लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हो रही है. लोग यहां की चाय को खूब पसंद कर रहे हैं. इस चाय का टेस्ट तो जबरदस्त है ही, खास बात यह है कि चाय पीतल के बर्तन में बनाई जाती है.

नाम भी है बड़ा ही यूनिक
इस चाय का नाम भी लोगों को खूब आकर्षित करता है. इसकी संचालक भारती बताती हैं कि चाय के साथ अक्सर लोग इधर-उधर की बातें करते हैं और चुगली भी करते हैं. इसी वजह से इसका नाम रखा गया चुगलखोर चाय. यहां लोग आते हैं, दो कप चाय लेते हैं, अपने दिल की बातें करते हैं, दिमाग में चल रही बातों पर चर्चा करते हैं, मन को हल्का करते हैं और चाय की चुस्की लेते हुए रिलैक्स होकर लौट जाते हैं. यह चाय दिमाग और दिल, दोनों को हल्का कर देती है.

अलग करना चाहती थी, इसलिए रखा अलग नाम
भारती बताती हैं कि वह अपनी चाय का नाम हमेशा से कुछ अलग रखना चाहती थीं. जब उन्होंने सोचा कि क्या नाम रखा जाए, तो उन्हें बचपन की एक बात याद आई. उन्होंने देखा था कि जब भी दो लोग बैठकर चाय पीते हैं, तो सौ फीसदी इधर-उधर की बातें जरूर करते हैं. बस वहीं से उनके दिमाग में “चुगली” शब्द आया और नाम रख दिया चुगलखोर चाय. अब हालात यह हैं कि शाम होते-होते दो से तीन पतीले चाय महज दो घंटे के अंदर खत्म हो जाती हैं, ग्राहकों की लाइन लगी रहती है.

पीतल के बर्तन और गुलाब की पंखुड़ियों से खास चाय
भारती बताती हैं कि यह चाय खासतौर पर पीतल के बर्तन में बनाई जाती है, क्योंकि पीतल में बनी चाय का स्वाद अलग ही होता है. दूध खौलते समय उसमें सबसे पहले गुलाब की पंखुड़ियां डाली जाती हैं. इसके बाद गोल मिर्च, लौंग, बड़ी इलायची, तेज पत्ता जैसे करीब छह से सात खड़े मसाले डाले जाते हैं. दूध को करीब आधे घंटे तक खौलाया जाता है, ताकि मसालों और गुलाब का स्वाद अच्छे से दूध में घुल जाए.

इसके बाद चाय पत्ती और चीनी डाली जाती है. इस तरह से तैयार होती है चुगलखोर चाय. फिर इसे गरमा-गरम कुल्हड़ में परोसा जाता है. लोग यहां ग्रुप में बैठकर इस चाय का पूरा आनंद लेते हैं. रोजाना यहां 1500 कप तक की बिक्री आराम से हो जाती है.

About the Author

Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें

homelifestyle

यहां चाय पर चर्चा नहीं चुगली की जाती है, नाम है ‘चुगलखोर चाय’! हर घूंट वाह



Source link

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments