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केंद्र सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है. उत्तर प्रदेश में आलू की सरकारी खरीद को मंजूरी दी गई है. इससे किसानों को कम दाम पर फसल बेचने की समस्या से राहत मिलेगी. सरकार का यह फैसला कई राज्यों के किसानों को फायदा पहुंचाएगा.
सरकार ने यूपी में आलू खरीद को मंजूरी दी है. (Image:AI)
नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश में 6,500.90 रुपये प्रति टन के बाजार हस्तक्षेप मूल्य पर आलू खरीदने की अनुमति दी है. इस योजना के तहत करीब 20 लाख टन आलू की खरीद की जाएगी. इस पर सरकार लगभग 203 करोड़ रुपये खर्च करेगी. यह फैसला किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाने के उद्देश्य से लिया गया है.
किसानों को सस्ते दाम से मिलेगी राहत
अक्सर बाजार में अधिक उत्पादन के कारण आलू के दाम गिर जाते हैं, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है. ऐसे में सरकार का यह कदम किसानों को मजबूरी में कम दाम पर फसल बेचने से बचाएगा. इससे उनकी आय में स्थिरता आएगी और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी.
चना खरीद की सीमा भी बढ़ाई गई
सरकार ने एक और महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए आंध्र प्रदेश में चना खरीद की सीमा बढ़ा दी है. पहले जहां 94,500 टन चना खरीदा जाना था, अब इसे बढ़ाकर 1.13 लाख टन कर दिया गया है. इससे वहां के किसानों को भी अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है.
कर्नाटक में अरहर खरीद की अवधि बढ़ी
कर्नाटक में मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत अरहर (तुअर) की खरीद की समय सीमा को 15 मई तक बढ़ा दिया गया है. इससे किसानों को अपनी फसल MSP पर बेचने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा. यह कदम उन किसानों के लिए राहत लेकर आया है, जो समय की कमी के कारण अपनी उपज सही दाम पर नहीं बेच पाते थे.
कृषि मंत्री की बैठक के बाद फैसले
इन सभी फैसलों को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद मंजूरी दी गई. इस बैठक में विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों और अधिकारियों ने हिस्सा लिया. सरकार का कहना है कि इन कदमों से किसानों को बेहतर दाम मिलेगा और कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी.
किसानों के लिए सकारात्मक पहल
सरकार के इन फैसलों से यह साफ है कि किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें नुकसान से बचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. आलू, चना और अरहर जैसी फसलों पर फोकस कर सरकार ने यह दिखाया है कि वह किसानों की समस्याओं को समझते हुए समाधान निकाल रही है. आने वाले समय में ऐसे कदम कृषि क्षेत्र के लिए और फायदेमंद साबित हो सकते हैं.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें

