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यूएई और ओमान के बीच बन रहा ‘हफीत रेल’ प्रोजेक्ट खाड़ी क्षेत्र की कनेक्टिविटी को पूरी तरह बदलने वाला है. इस नेटवर्क पर पैसेंजर ट्रेनें 200 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलेंगी और सोहार से अल ऐन का सफर सिर्फ 47 मिनट में पूरा होगा. यह प्रोजेक्ट न सिर्फ ट्रैवल टाइम घटाएगा बल्कि व्यापार और लॉजिस्टिक्स को भी सस्ता और तेज बनाएगा. करीब 3 बिलियन डॉलर की लागत से बन रहा यह रेलवे नेटवर्क 5 बड़े बंदरगाहों और कई फ्रेट हब्स को जोड़ेगा. इससे माल ढुलाई की लागत में 40 प्रतिशत तक कमी आने की उम्मीद है. यह खाड़ी देशों का पहला क्रॉस बॉर्डर रेल नेटवर्क होगा, जो पूरे रीजन की इकोनॉमिक ग्रोथ को नई दिशा देगा.
एक पैसेंजर ट्रेन में करीब 400 यात्री सफर कर सकेंगे. (AI)
नई दिल्ली. खाड़ी देशों में एक ऐसा मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट तेजी से आकार ले रहा है, जो आने वाले समय में ट्रैवल और ट्रेड दोनों की तस्वीर बदल सकता है. यूएई और ओमान के बीच बन रहा हफीत रेल प्रोजेक्ट सिर्फ एक रेलवे लाइन नहीं है, बल्कि यह पूरे गल्फ रीजन के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है. बता दें कि हफीत रेल एक जॉइंट वेंचर है, जिसमें एतिहाद रेल, ओमान रेल और मुबादला इन्वेस्टमेंट कंपनी शामिल हैं. इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद लोगों का सफर जहां बेहद तेज और आसान होगा, वहीं कारोबार के लिए भी नई संभावनाएं खुलेंगी.
इस रेल नेटवर्क की खास बात इसकी हाई स्पीड और जबरदस्त कनेक्टिविटी है. अभी जहां एक शहर से दूसरे शहर जाने में घंटों लग जाते हैं, वहीं इस प्रोजेक्ट के बाद वही दूरी मिनटों में तय हो सकेगी. इससे न सिर्फ समय की बचत होगी, बल्कि ट्रांसपोर्टेशन का खर्च भी कम होगा, जिसका सीधा फायदा आम लोगों से लेकर बड़े उद्योगों तक को मिलेगा.
200 की रफ्तार से दौड़ेंगी ट्रेनें
इस नेटवर्क पर पैसेंजर ट्रेनें 200 किमी प्रति घंटा की टॉप स्पीड से चलेंगी. वहीं मालगाड़ियां 120 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेंगी. यानी यह प्रोजेक्ट स्पीड और एफिशिएंसी दोनों का बेहतरीन कॉम्बिनेशन है.
मिनटों में पूरा होगा लंबा सफर
इस रेल लाइन के चालू होने के बाद ओमान के सोहार से यूएई के अल ऐन का सफर सिर्फ 47 मिनट में पूरा हो जाएगा. यह दूरी रेलमार्ग से करीब 150 किलोमीटर है. वहीं सोहार से अबू धाबी पहुंचने में करीब 1 घंटा 40 मिनट का समय लगेगा. यह रेलवे नेटवर्क अलग-अलग फेज के हिसाब से करीब 238 से 300 किलोमीटर लंबा होगा. यह यूएई के नेशनल रेल नेटवर्क को सीधे ओमान के सोहार पोर्ट से जोड़ेगा.
भारी भरकम इंजीनियरिंग का कमाल
इस प्रोजेक्ट में 60 पुल, 36 वायडक्ट, 21 ओवरब्रिज और 130 बॉक्स कल्वर्ट बनाए जा रहे हैं. इसके अलावा कई सुरंगें भी बनाई जा रही हैं, जिनकी कुल लंबाई करीब 2.5 किलोमीटर है.
कितनी है ट्रेन की क्षमता
एक पैसेंजर ट्रेन में करीब 400 यात्री सफर कर सकेंगे. वहीं एक मालगाड़ी लगभग 15000 टन सामान या 270 कंटेनर एक साथ ले जा सकेगी. इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इससे लॉजिस्टिक्स कॉस्ट में करीब 40 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है. यानी कंपनियों का खर्च घटेगा और व्यापार और ज्यादा तेज होगा.
3 बिलियन डॉलर का बड़ा निवेश
पूरे प्रोजेक्ट की लागत करीब 3 बिलियन डॉलर यानी लगभग 25000 करोड़ रुपये है. यह दिखाता है कि दोनों देश इसे कितना बड़ा और अहम प्रोजेक्ट मान रहे हैं. यह खाड़ी देशों का पहला क्रॉस बॉर्डर रेलवे नेटवर्क होगा. इससे न सिर्फ ट्रैवल आसान होगा, बल्कि पूरे रीजन में व्यापार, इंडस्ट्री और इकोनॉमिक ग्रोथ को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा.
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मैं जय ठाकुर, न्यूज18 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहा हूं. मेरा मुख्य काम बिजनेस की पेचीदा खबरों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. फिर चाहे वह शेयर बाजार की हलचल हो, देश की इकोनॉमी क…और पढ़ें

