Saturday, June 6, 2026
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लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्र आंदोलन: निष्कासन के विरोध में छात्रों के साथ अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद ने दिया धरना – Lucknow News




लखनऊ विश्वविद्यालय में बढ़ी फीस, वित्तीय अनियमितताओं और छात्रों के निष्कासन के विरोध में लगातार पांचवें दिन आंदोलन चलता रहा। मौके पर अयोध्या से सपा सांसद अवधेश प्रसाद और पूर्व सांसद कांग्रेस नेता पीएल पुनिया भी पहुंचे। उन्होंने धरना स्थल पर छात्रों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा दर्ज FIR एवं निष्कासन की कार्रवाई पर गंभीर चिंता व्यक्त की। अवधेश बोले लोक तांत्रिक तरीके से बात कहना अपराध नहीं अवधेश प्रसाद ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना अपराध नहीं है। छात्रों पर दंडात्मक कार्रवाई के बजाय संवाद के माध्यम से समाधान निकाला जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालयों को भय का नहीं। बल्कि विचार-विमर्श और लोकतांत्रिक मूल्यों का केंद्र होना चाहिए।छात्रों द्वारा प्रस्तुत किए गए मुद्दों फीस वृद्धि, पारदर्शिता की कमी और निष्कासन पर नेताओं ने आश्वासन दिया कि इन मामलों को संबंधित उच्च स्तरों तक उठाया जाएगा। अवधेश प्रसाद ने कहा कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की बात नहीं सुनता है तो वे इस मुद्दे को राज्यपाल तक ले जाएंगे और आवश्यकता पड़ने पर संसद में भी उठाया जाएगा। FIR दर्ज करना गंभीर सवाल खड़े करता है उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए विश्वविद्यालय में आना चाहिए, न कि उन्हें अपराधी बनाकर प्रस्तुत किया जाए। उनके अनुसार FIR दर्ज कर छात्रों को अनावश्यक रूप से दबाव में लाया जा रहा है, जो उचित नहीं है।पूर्व सांसद पीएल पुनिया ने कहा कि जब छात्र फीस पारदर्शिता जैसे महत्वपूर्ण सवाल उठा रहे हैं। उनके जवाब देने के बजाय उन्हें निष्कासित करना और FIR दर्ज करना गंभीर प्रश्न खड़े करता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा एक मौलिक अधिकार है और इसे सभी के लिए सुलभ एवं किफायती होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान कार्रवाई विश्वविद्यालय प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाती है और यह सोचने पर मजबूर करती है कि कहीं शिक्षा को केवल राजस्व का साधन तो नहीं बनाया जा रहा। छात्र नेता बोले आंदोलन को समर्थन दिया पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष रमेश श्रीवास्तव ने भी आंदोलन को समर्थन दिया और धरना स्थल पर बैठकर छात्रों के साथ एकजुटता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का दृष्टिकोण ऐसा प्रतीत होता है, जिसमें उच्च शिक्षा केवल उन्हीं के लिए सुलभ होती जा रही है जो आर्थिक रूप से सक्षम हैं, जबकि कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए अवसर सीमित होते जा रहे हैं। यह स्थिति समान अवसर की अवधारणा के विरुद्ध है।छात्रों ने बताया कि वे लंबे समय से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें उठा रहे हैं, लेकिन संवाद के बजाय उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है। इस अवसर पर छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्रवाई अन्यायपूर्ण और दमनकारी है तथा जब तक उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा।



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