सिवनी की पेंच टाइगर रिजर्व की बाघिन पीएन-224 का तीसरे दिन भी कोई सुराग नहीं मिला है। राजस्थान में जीन पूल सुधार के लिए प्रस्तावित देश के पहले इंटरस्टेट टाइगर ट्रांसलोकेशन प्रोजेक्ट के तहत इस बाघिन को चुना गया है। रविवार से लापता होने के बाद बुधवार को
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रविवार को आखिरी बार दिखी थी
बाघिन को रविवार को रूखड़ बफर और कुरई रेंज के जंगल में पांच बार देखा गया था। सुबह वह लेंटाना की झाड़ी के नीचे आराम कर रही थी, लेकिन पास ही पानी का सोर्स होने के कारण ट्रेंकुलाइज करने का फैसला टाल दिया गया।
टीम को डर था कि बेहोशी की हालत में वह जलाशय में गिर सकती है। इसके कुछ समय बाद वह अचानक जंगल में ओझल हो गई और लगातार सर्चिंग के बाद भी दिखाई नहीं दी। सोमवार और मंगलवार को चलाए गए सघन अभियान में कई टीमें और हाथी दल लगाए गए, लेकिन बाघिन का कोई पता नहीं चला।
रणनीति में बदलाव, कम कर्मियों की टीम मैदान में
सर्चिंग के पांचवें दिन रणनीति बदली गई है। अब पहले की तरह 50 कर्मियों और 8 हाथियों की बजाय केवल 25 सदस्यीय टीम जंगल में उतारी गई है। इन टीमों ने रूखड़ बफर से लेकर कुरई सेंचुरी तक पूरे इलाके की सर्चिंग की, लेकिन सफलता नहीं मिली।
करीब ढाई से तीन साल की यह बाघिन बेहद फुर्तीली मानी जाती है, जो टीमों को चकमा देकर निकल जाती है। इसी वजह से उसकी तलाश चुनौती बन गई है।

पहले लगाया जाएगा रेडियो कॉलर
पेंच टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार सिंह ने बताया कि बाघिन का पता चलते ही सबसे पहले उसे न्यूनतम व्यवधान के साथ ट्रेंक्यूलाइज किया जाएगा। इसके बाद उस पर रेडियो कॉलर लगाया जाएगा ताकि उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा सके।
रेडियो कॉलर लगने और सभी प्रोटोकॉल पूरे होने के बाद ही उसे राजस्थान के लिए स्थानांतरित किया जाएगा। फिलहाल सर्च ऑपरेशन बुधवार को भी जारी है।

