Tuesday, August 11, 2026
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विदेशी धरती पर खेल करेगा SBI, भर-भरकर आएंगे डॉलर, भारत को होगा सीधा फायदा?


नई दिल्ली. देश का सबसे बड़ा बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) एक बार फिर विदेशी बाजार से डॉलर जुटाने की तैयारी में है. करीब 1 साल के अंतराल के बाद एसबीआई ग्लोबल पब्लिक डॉलर बॉन्ड मार्केट में वापसी कर रहा है. बैंक 5 साल की अवधि वाले डॉलर बॉन्ड जारी करेगा और शुरुआती तौर पर कम-से-कम 500 मिलियन डॉलर जुटाने की योजना है. बाजार में मांग मजबूत रही तो इश्यू का आकार 1 अरब डॉलर या उससे ज्यादा भी पहुंच सकता है.

एसबीआई यह बॉन्ड अपनी लंदन शाखा के जरिए जारी करेगा. मामले से जुड़े 3 मर्चेंट बैंकरों के मुताबिक, बैंक ने बॉन्ड की मार्केटिंग शुरू कर दी है और इस हफ्ते के अंत तक इश्यू पूरा होने की उम्मीद है. बैंकरों ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर यह जानकारी दी है. एसबीआई ने इस मामले पर रॉयटर्स के सवाल का तुरंत जवाब नहीं दिया.

अमेरिकी बॉन्ड से ज्यादा रिटर्न का ऑफर

एसबीआई ने निवेशकों के लिए शुरुआती प्राइस गाइडेंस अमेरिकी ट्रेजरी से करीब 120 बेसिस प्वाइंट ऊपर रखा है. यानी अमेरिकी सरकारी बॉन्ड के मुकाबले निवेशकों को ज्यादा रिटर्न का शुरुआती ऑफर दिया जा रहा है. एक बैंकर के मुताबिक, एसबीआई की ओर से दिया जा रहा स्प्रेड प्रीमियम काफी आकर्षक है. निवेशकों की तरफ से मजबूत मांग आने पर अंतिम प्राइसिंग में करीब 30 बेसिस प्वाइंट तक की कमी आ सकती है. मजबूत मांग की स्थिति में बॉन्ड इश्यू का आकार 1 अरब डॉलर या उससे ज्यादा होने की संभावना भी जताई जा रही है.

RBI की स्वैप सुविधा से बैंकों को फायदा

एसबीआई का यह डॉलर बॉन्ड इश्यू ऐसे समय में आ रहा है जब भारतीय बैंक विदेशी बाजार से डॉलर जुटाने में तेजी दिखा रहे हैं. इसकी एक बड़ी वजह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से जून में शुरू की गई स्वैप सुविधा है. इस सुविधा से भारतीय बैंकों के लिए विदेशों से डॉलर जुटाने की लागत कम करने में मदद मिली है. इसी वजह से कई भारतीय बैंक हाल के महीनों में डॉलर बॉन्ड मार्केट का रुख कर चुके हैं. जून और जुलाई में एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank), एक्सिस बैंक (Axis Bank) और आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) जैसे बड़े निजी बैंकों ने भी डॉलर बॉन्ड के जरिए विदेशी बाजार से फंड जुटाया था.

जून में 1 अरब डॉलर का प्लान टाल चुका था SBI

एसबीआई ने जून में भी करीब 1 अरब डॉलर का पब्लिक डॉलर बॉन्ड जारी करने की योजना बनाई थी. लेकिन उस समय कई भारतीय बैंकों की ओर से एक साथ बड़े इश्यू आने के कारण उधारी की लागत बढ़ गई थी. ऐसे माहौल में बैंक ने अपना पब्लिक इश्यू टाल दिया था. इसके बाद एसबीआई ने 3 साल की अवधि वाले डॉलर बॉन्ड के जरिए 600 मिलियन डॉलर जुटाए थे. यह प्राइवेट प्लेसमेंट था और इसमें बॉन्ड की कीमत सिक्योर्ड ओवरनाइट फाइनेंसिंग रेट यानी SOFR से 100 बेसिस प्वाइंट ऊपर रखी गई थी. अब एसबीआई एक बार फिर पब्लिक डॉलर बॉन्ड मार्केट में उतर रहा है. इस बार बैंक 5 साल की अवधि वाला बॉन्ड लेकर आ रहा है.

Fitch ने दी BBB रेटिंग

रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स (Fitch Ratings) ने एसबीआई के प्रस्तावित सीनियर अनसिक्योर्ड नोट्स को BBB की अपेक्षित रेटिंग दी है. ये बॉन्ड एसबीआई की सीधे तौर पर बिना गारंटी वाली और अन्य असुरक्षित कर्ज की तरह समान प्राथमिकता वाली देनदारी होंगे. रेटिंग से विदेशी निवेशकों को एसबीआई की क्रेडिट क्वालिटी को समझने में मदद मिलेगी. मजबूत बैंकिंग प्रोफाइल और एसबीआई की बाजार में स्थिति को देखते हुए इस इश्यू में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी मजबूत रहने की उम्मीद है.

भारत में डॉलर आने का क्या फायदा

एसबीआई अगर 500 मिलियन डॉलर से लेकर 1 अरब डॉलर या उससे ज्यादा रकम जुटाता है तो यह विदेशी मुद्रा के रूप में बैंकिंग सिस्टम में आएगी. इससे एसबीआई को अपनी विदेशी मुद्रा जरूरतों और कर्ज से जुड़े इस्तेमाल के लिए फंड मिलेगा. हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि बॉन्ड से आने वाली पूरी रकम सीधे भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में जुड़ जाएगी. रकम का इस्तेमाल बैंक की जरूरतों और फंडिंग स्ट्रक्चर के हिसाब से होगा. फिर भी भारतीय बैंकों की ओर से विदेशी बाजार से लगातार डॉलर जुटाना देश की विदेशी फंडिंग क्षमता और ग्लोबल निवेशकों के भरोसे को दिखाता है.

एसबीआई का यह इश्यू इसलिए भी अहम है क्योंकि यह ऐसे समय में आ रहा है जब भारतीय बैंक विदेशी बाजार में डॉलर फंडिंग का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं. अगर इस बॉन्ड को मजबूत मांग मिलती है और इश्यू का आकार 1 अरब डॉलर या उससे ऊपर जाता है तो यह ग्लोबल निवेशकों के बीच एसबीआई और भारतीय बैंकिंग सेक्टर की मजबूत मांग का संकेत होगा.



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