बिहार में SIR की ड्राफ्ट मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद विपक्ष की चुनाव आयोग से लड़ाई बढ़ गई है. एक तरफ तेजस्वी यादव ने अपने नाम का ड्राफ्ट मतदाता सूची से कटने का जैसे ही दावा किया, चुनाव आयोग ने सबसे पहले तेजस्वी यादव का नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में साफ-साफ दिखा दिया और दूसरी तरफ तेजस्वी की तरफ से दिखाई गई दूसरे EPIC नंबर की जांच भी शुरू कर दी है. चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक अब तक की जांच में 10 महत्वपूर्ण बातें सामने आई हैं…
दूसरा: तेजस्वी प्रसाद का नाम 1 अगस्त को SIR के अनुसार प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची में मौजूद है.
चौथा: वर्ष 2015 की मतदाता सूची में भी उनका यह EPIC नंबर मौजूद था.
छठा: दूसरी EPIC संख्या RAB2916120 अस्तित्वहीन पाई गई है.
आठवां: अब तक दूसरी EPIC संख्या के लिए कोई भी रिकॉर्ड नहीं मिला है.
दसवां: यह समझने के लिए आगे जांच जारी है कि दूसरी EPIC संख्या की असलियत क्या है, और क्या वह एक जाली दस्तावेज़ है…
हालांकि, तेजस्वी के दावे और विपक्ष के SIR के सवालों को सत्ता पक्ष भी बेबुनियाद बता रहा है और तेजस्वी यादव से माफी की मांग कर रहा है. एक तरफ तेजस्वी यादव के दावे और चुनाव आयोग का जवाब था, तो दूसरी तरफ चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के दावे को भी भ्रामक और बेबुनियाद बताया. दरअसल, राहुल गांधी ने कांग्रेस के एक कार्यक्रम में दावा किया कि वह मतदाता सूची पर Atom Bomb लाने वाले हैं कि कैसे कांग्रेस की जांच में 6.5 लाख मतदाताओं में से 1.5 लाख फर्जी पाए गए.
चुनाव आयोग ने अपने फैक्टचेक में राहुल गांधी के दावे को भ्रामक करार दिया और साफ किया कि लोकसभा चुनाव में मतदाता सूची की तैयारी के दौरान कांग्रेस की तरफ से कोई भी गड़बड़ी की अपील नहीं की गई और लोकसभा चुनाव के नतीजे के बाद कांग्रेस के सिर्फ आठ हारे हुए उम्मीदवारों ने चुनाव याचिका दाखिल की. चुनाव आयोग ने अपने फैक्ट चेक के साथ 12 जून को राहुल गांधी को लिखा पत्र भी सार्वजनिक किया, जिसमें राहुल गांधी को मतदाता सूची से जुड़ी शिकायतों पर चर्चा के लिए आमंत्रित किया गया, लेकिन राहुल गांधी से कोई जवाब नहीं मिला. एक तरफ विपक्ष का दावा दूसरी तरफ चुनाव आयोग का फैक्ट चेक. मतदाता सूची की लड़ाई अभी जारी रहेगी.

