करवा चौथ आज श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के लिए व्रत रखती हैं। हालांकि, यह व्रत केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है। पुरुष भी अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रख सकते हैं। बाबा बिलेश
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शाम 5:36 से 6:53 बजे तक पूजा का शुभ मुहूर्त
करवा चौथ पर शाम के समय पूजा और व्रत कथा का विशेष महत्व है। पंचांग के अनुसार, 29 अक्टूबर को पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:36 बजे से 6:53 बजे तक माना जा रहा है। इस दौरान महिलाएं और व्रत रखने वाले पुरुष भगवान गणेश, माता पार्वती और करवा माता की पूजा कर सकते हैं। इसके बाद करवा चौथ की कथा सुनने और सुनाने की परंपरा है। स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त में थोड़ा अंतर हो सकता है।
शाम 4 बजे से सूर्यास्त तक कथा सुनना शुभ
पुजारी हरिश्चंद्र जोशी ने बताया कि शाम चार बजे से सूर्यास्त तक व्रत कथा करना शुभ माना जाता है। इस समय को गोधूलि बेला भी कहा जाता है। हालांकि, पूजा के लिए पंचांग में बताए गए शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना चाहिए। पूजा के दौरान भगवान का स्मरण करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।
चंद्रोदय रात करीब 8:10 से 8:14 बजे के बीच होने का अनुमान है।
रात करीब 8:10 बजे हो सकते हैं चंद्र दर्शन
करवा चौथ पर चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलने की परंपरा है। मेरठ में 29 अक्टूबर को चंद्रोदय रात करीब 8:10 से 8:14 बजे के बीच होने का अनुमान है। मौसम और स्थानीय परिस्थितियों के कारण चंद्र दर्शन में कुछ देरी हो सकती है। चंद्रमा निकलने के बाद व्रत रखने वाले लोग अर्घ्य देकर पूजा करें। इसके बाद पारंपरिक रीति के अनुसार छलनी से चंद्रमा और पति का चेहरा देखकर व्रत का पारण किया जाता है।
महिलाएं ही नहीं, पुरुष भी रख सकते हैं व्रत
पुजारी हरिश्चंद्र जोशी ने बताया कि करवा चौथ में गणेशजी की पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और भक्ति भाव से पूजा करने से परिवार में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। यह व्रत केवल महिलाओं के लिए ही नहीं, पुरुष भी अपनी इच्छा और आस्था के अनुसार रख सकते हैं। व्रत का उद्देश्य परिवार की सुख-समृद्धि और पति-पत्नी के सुखी जीवन की कामना करना है।

पुजारी हरिश्चंद्र जोशी ने बताया कि करवा चौथ में गणेशजी की पूजा का विशेष महत्व है।
बीमार लोग सेहत के अनुसार करें व्रत
करवा चौथ पर निर्जल व्रत रखने की परंपरा है, लेकिन बीमार या स्वास्थ्य संबंधी परेशानी से जूझ रहे लोगों को अपनी सेहत को प्राथमिकता देनी चाहिए। पुजारी ने बताया कि ऐसे लोग जरूरत के अनुसार पानी और फल लेकर भी व्रत कर सकते हैं। निर्जल व्रत नहीं रख पाने पर खुद को परेशान करने की जरूरत नहीं है। यदि किसी को दवा लेने या पानी पीने की जरूरत है, तो उसे ऐसा करना चाहिए। श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा करना अधिक महत्वपूर्ण है।

