Thursday, January 15, 2026
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सहरसा के इस मंदिर में 40 कुंटल दूध से तैयार होता है खीर नहीं डाली जाती है चीनी फिर भी स्वाद होता है बेहतरीन प्रसाद ग्रहण करने के लिए लाइन में खड़े रहते हैं श्रद्धालु अनोखी है अनोखी है परंपरा 


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Saharsa News: आप कभी सहरसा आएं और इस अनोखे दूध की खीर का अनुभव करना चाहें, तो कारू बाबा स्थान जरूर जाएं, यह धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर भारतीय त्योहारों और परंपराओं में अपनी खास जगह बनाए हुए है.

सहरसा. सहरसा के कारू बाबा स्थान में हर साल दो दिन का एक अनोखा और भव्य त्योहार मनाया जाता है, जो क्षेत्र और आसपास के लाखों श्रद्धालुओं के लिए खास महत्व रखता है. इस शुभ अवसर पर लगभग 50 से 60 कुंतल दूध से खीर तैयार की जाती है, जो मंदिर में श्रद्धा और विधि-पूर्वक बनाई जाती है. हजारों से लेकर लाखों श्रद्धालु इस खीर को प्रसाद के रूप में ग्रहण करने के लिए आते हैं. इस खास खीर का सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें चीनी बिल्कुल नहीं डाली जाती, फिर भी इसका स्वाद बेहद मीठा और पौष्टिक होता है. सहरसा के महिषी प्रखंड के महपुरा में स्थित कारू बाबा स्थान पर बनने वाली इस खीर को श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दूध से बनाया जाता है, जो बाबा कारू के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था को दर्शाता है.

मंदिर कमेटी के सदस्य सुरेंद्र यादव बताते हैं कि दूध से बनी यह खीर बहुत बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के बीच वितरित की जाती है और लोग घंटों लाइन में लगे रहते हैं, ताकि वे इस पवित्र प्रसाद को ग्रहण कर सकें. उन्होंने बताया कि बिना चीनी डाले बनी यह खीर स्वाद में इतनी लाजवाब होती है कि लोग इसे चखकर भावुक हो जाते हैं.

कई महीने पहले शुरू होती है खीर बनाने की तैयारी
इस स्थान पर दूध की इतनी विशाल मात्रा में खीर बनाना किसी भी अन्य जगह आसानी से संभव नहीं है, क्योंकि इस खीर को बनाने के लिए शुद्ध दूध का बड़ा संग्रह और विशेष विधि अपनाई जाती है. खीर बनाने में मंदिर के कई सदस्य दिन-रात लगे रहते हैं, ताकि हर श्रद्धालु को प्रसाद उचित मात्रा में मिल सके. इस आयोजन की तैयारी महीनों पहले से शुरू हो जाती है और श्रद्धालु इसके लिए भारी उत्साह के साथ आते हैं. यह परंपरा बहुत पुरानी है और इस क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा बन चुकी है.

श्रद्धालु मानते हैं कि इस खीर को ग्रहण करने से उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और उन्हें आशीर्वाद प्राप्त होता है. इस प्रसाद का वितरण न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह लोगों के दिलों को जोड़ने और समुदाय में एकजुटता बढ़ाने का माध्यम भी बनता है. इसलिए इस आयोजन को क्षेत्र में खास सम्मान और गौरव प्राप्त है. खीर वितरण से जुड़ी यह परंपरा धार्मिक आस्था का प्रतीक होने के साथ-साथ सामाजिक मेलजोल और सांस्कृतिक विरासत को भी जीवित रखती है. हर दुर्गा पूजा पर लाखों श्रद्धालु यह पूजा करने कारू बाबा स्थान पहुंचते हैं और आस्था की इस अनूठी परंपरा का हिस्सा बनते हैं. यह आयोजन ना केवल सहरसा, बल्कि आसपास के जिलों के लिए भी एक बड़ी धार्मिक और सांस्कृतिक घटना बन गई है.

आस्था, भक्ति और सांस्कृतिक का एक बड़ा केंद्र
मंदिर में दूध से बनी खीर की यह विशेषता लोगों को इस स्थान की ओर खींचती है, जहां आध्यात्मिक अनुभव मिलता है और धार्मिक उत्साह बढ़ता है. खास तौर पर जब भक्त बिना चीनी वाली मीठी खीर ग्रहण करते हैं, तो यह उनके लिए एक संभावित चमत्कार की तरह प्रतीत होता है. इस वजह से श्रद्धालु कई बार परिवार सहित यहां आते हैं और पूजा अर्चना के साथ ही प्रसाद ग्रहण करते हैं. इस अनूठी परंपरा के कारण कारू बाबा स्थान क्षेत्र में आस्था, भक्ति और सांस्कृतिक पहचान का एक बड़ा केंद्र बन चुका है. यह मंदिर न केवल धार्मिक श्रद्धा का केंद्र है, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं को भी मजबूत करता है. लाखों श्रद्धालु यहां आकर न केवल खीर का स्वाद लेते हैं, बल्कि अपनी मनोकामनाएं भी पूरी होने की उम्मीद लेकर आते हैं.

Mohd Majid

with more than 4 years of experience in journalism. It has been 1 year to associated with Network 18 Since 2023. Currently Working as a Senior content Editor at Network 18. Here, I am covering hyperlocal news f…और पढ़ें

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40 कुंटल दूध…चीनी शून्य! इस मंदिर में बनने वाली खीर का स्वाद कर देगा दीवाना



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