सोने-चांदी की कीमतों में कल सोमवार को उतार-चढ़ाव देखा गया था. आज 6 अक्टूबर को दोनों के दाम MCX पर फिसल गए हैं. दिसंबर डिलीवरी वाला सोना MCX पर 83 रुपये की गिरावट के साथ 149233 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है. दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी 662 रुपये गिरकर 225425 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रही है.
इंटरनेशनल मार्केट में सोने का दाम 0.02 फीसदी बढ़त के साथ 4157 डॉलर प्रथि औंस पर ट्रेड कर रहा है. चांदी की कीमत में 0.39 फीसदी की गिरावट आई है. चांदी का भाव अब 61 डॉलर प्रति औंस पर आ गया है. अगर आप सोने-चांदी की खरीदारी करने की सोच रहे हैं तो उससे पहले ये समझ लें कि दिवाली में सोने की कीमत कहां तक पहुंच सकती है.
एनालिस्ट ने बताया कहां तक जाएगा सोने का भाव?
सोने की कीमतों को लेकर 2026 और 2027 का आउटलुक अभी भी मजबूत बना हुआ है. J.P. Morgan Global Research की रिपोर्ट का अनुमान है कि 2026 के अंत तक सोने की कीमत 6,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है. वहीं, 2027 में यह 6,300 डॉलर प्रति औंस तक जाने की संभावना भी जताई गई है.
हालांकि, फिलहाल सोने की तेजी पर कुछ दबाव बना हुआ है. CNBC की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड हाई लेवल पर बनी हुई है. डॉलर इंडेक्स करीब 102.37 पर है, जो करीब 18 महीने के उच्च स्तर के आसपास है. कमोडिटी टेक्निकल एनालिस्ट कावेरी मोरे के अनुसार, मजबूत डॉलर और ऊंची यील्ड के कारण सोने में तेजी की रफ्तार सीमित हो रही है.
KITCO की रिपोर्ट के अनुसार, सोने की कीमतों में थोड़ी कमजोरी के बावजूद यह 4,000 डॉलर प्रति औंस के ऊपर मजबूती से टिका हुआ है, जबकि बॉन्ड यील्ड 5% से ऊपर पहुंच चुकी है. आम तौर पर बढ़ती यील्ड सोने के लिए दबाव बढ़ाती है, लेकिन इस बार सोने का टिके रहना निवेशकों के बदलते रुख का संकेत माना जा रहा है.
विश्लेषकों के मुताबिक, ऊंची बॉन्ड यील्ड के बावजूद सोने की मजबूती से पता चलता है कि निवेशक सरकारों की बढ़ती वित्तीय चुनौतियों को लेकर चिंतित हो रहे हैं. ऐसे में सोना धीरे-धीरे बड़े निवेश पोर्टफोलियो में ज्यादा अहम भूमिका हासिल कर सकता है, जबकि पहले अमेरिकी पेंशन फंड्स जैसे बड़े संस्थागत निवेशकों की रणनीतिक एसेट एलोकेशन में इसकी हिस्सेदारी काफी कम रहती थी.
चांदी की कीमतों पर असर
अमेरिकी मल्टीनेशनल इन्वेस्टमेंट बैंक एंड फाइनेंशियल सर्विस कंपनी Citi की अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार, चांदी में अभी और तेजी की गुंजाइश दिख रही है. बैंक ने शार्ट टर्म पीरियड के लिए 75 डॉलर प्रति औंस का टारगेट बरकरार रखा है, जबकि अगले 6 से 12 महीनों में चांदी के 90 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचने का अनुमान लगाया है. बैंक का मानना है कि सोलर सेक्टर से औद्योगिक मांग कुछ कमजोर पड़ सकती है, लेकिन इसकी भरपाई निवेश मांग में बढ़ोतरी से हो सकती है, जो आगे चांदी की कीमतों को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है.
इसके अलावा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज की स्थिति अहम मानी जा रही है. Citi को उम्मीद है कि सितंबर से दिसंबर के बीच मिडिल ईस्ट में मौजूदा तनाव कम हो सकता है. ऐसा होने पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, मजबूत रियल यील्ड और अमेरिकी डॉलर की मजबूती से मिलने वाला दबाव घट सकता है.
इसके अलावा, अगर यूएस फेड का रुख आने वाले समय में ब्याज दरों को लेकर कम सख्त होता है, तो सोने-चांदी जैसी कीमती मेटल्स में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ सकती है. इससे प्रेशियस मेटल्स की कीमतों को आगे सपोर्ट मिलने की संभावना है.

